अश्क़
शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** नीर आँखों से ढलक कर बह रहा।ये व्यथा अश्कों के ज़रिए कह रहा। बंद अधरों ने सुना दी है व्यथा,दर्द दिल का जाने कब से सह रहा। देख कर के इस जहाँ का ये चलन,खामुशी से मार के मन रह रहा। हो गया ऐसा ज़हन क्यों आज ये,प्यार का सुदृढ़ महल … Read more