गुलों के नगर में

अरशद रसूलबदायूं (उत्तरप्रदेश)**************************************************** जहां दूर तक कोई साहिल नहीं था,मैं दरिया-ए उल्फत में डूबा वहीं था। गुलों के नगर में जो गोशा नशीं था,बड़ा खूबसूरत वह बेहद हसीं था। यह इंसाफ दुनिया का अच्छा नहीं था,बहारें वही थी,जहां हमनशीं था खबर ही नहीं थी पता ही नहीं था,सितमगर हमारे ही घर में मकीं था। तसव्वुर … Read more

चालाकियाँ इंसान की

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरीकुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ************************************************************* हम समझ पाते नहीं चालाकियाँ इंसान की,हो गयी बंजर जमीं अब दोस्तों ईमान की। लाख सिक्के ले के आओ मामला गंभीर है,इस तरह कुछ डॉक्टर कीमत लगाते जान की। अनसुनी करते हैं बातें जो अगर निर्धन कहे,गौर से सुनते मगर सब लोग क्यों धनवान की। देखकर भूखा उसे मुझको तजुर्बा … Read more

सँभलकर देखता हूँ मैं

डॉ.अमर ‘पंकज’दिल्ली***************************************************** कड़ा पहरा है मुझ पर तो सँभलकर देखता हूँ मैं,बदन की क़ैद से बाहर निकलकर देखता हूँ मैं। कभी गिरना कभी उठना यही है दास्ताँ मेरी,बचा क्या पास है मेरे ये चलकर देखता हूँ मैं। जिधर देखो उधर है आग छूतीं आसमाँ लपटें,चलो इस अग्निपथ पर भी टहलकर देखता हूँ मैं। बहुत है … Read more

फिक्र नहीं है उसको

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)*********************************************************** फिक्र नहीं है उसको ख्वाब सजाने की।फिक्र परिन्दे को है आबो दाने की। पेड़ तनावर बीज वही बन पाता है,जिसमें कूवत होती है मिट जाने की। बॉस तरक़्क़ी उसको देता ही कब है,जिसको जल्दी होती है घर जाने की। पूरी दुनिया निश्चित होती क़दमों में,चाहत दिल में होती गर … Read more

…पत्थर बनाया न होता

डॉ.अमर ‘पंकज’दिल्ली******************************************************** अगर मैं तेरे शह्र आया न होता,तो दिल को भी पत्थर बनाया न होता। उजड़ती नहीं ज़िंदगी हादसों से,अगर होश अपना गँवाया न होता। सँपोले के काटे तड़पता नहीं मैं,अगर दूध उसको पिलाया न होता। बयाँ कैसे करता यहाँ अपना अनुभव,अगर ज़िंदगी ने सिखाया न होता। कभी कह न पाता ग़ज़ल इस तरह … Read more

मज़दूर

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरीकुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ************************************************************* बनाता वाहनों को है वो इक मज़दूर होता है,मगर पैदल ही चलता है बहुत मजबूर होता है। बनाता है किला वो ताज,मीनारें,पिरामिड भी,मगर गुमनाम रहता है कहाँ मशहूर होता है। दरो-दीवार पर करता सदा जो पेंट औ पालिश,कि चेहरे से उसी के दूर अक्सर नूर होता है। बहुत होता है … Read more

बस दुआओं से है ज़िन्दगी

विनोद सोनगीर ‘कवि विनोद’इन्दौर(मध्यप्रदेश)*************************************************************** सहमी सुबह सहमी-सी शाम है।पुर्जा-पुर्जा जिस्म का जाम है। जा़यका जिंदगी में वो रहा नहीं,मेहनती हाथ भी अब हुए आम है। घर में कैद लगती है साँसें अब तो,पहचान भी जैसे मेरी बेनाम है। मैं क्यूं करता फिरुं जियारत तेरी,मेरे माँ-बाप ही मेरे चारों धाम है। बस दुआओं से है ज़िन्दगी … Read more

करेंगे हम अपने वतन की हिफ़ाज़त

डॉ.नीलिमा मिश्रा ‘नीलम’ इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) ************************************************************** स्वतंत्रता दिवस विशेष …….. करेंगे हम अपने चमन की हिफ़ाज़त।हमारा है मक़सद वतन की हिफ़ाज़त। सबब जश्न-ए-आज़ादी का है तो ये है,करें हम शहीदों के प्रण की हिफ़ाज़त। हैं जाँबाज़ सैनिक वतन के हमारे,करें जल की थल की गगन की हिफ़ाज़त। तिरंगे में लिपटा दे माँ जिस्म मेरा,शहादत करेगी … Read more

जीना ही दुश्वार हुआ

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)***************************************************************** जबसे मुझको प्यार हुआ।जीना ही दुश्वार हुआ। अब न यहाँ का भाता कुछ,मन जब से बीमार हुआ। दुर्दिन का है फेर अलग,बैरी कुल संसार हुआ। साथ आया जबसे हमदम,तब से दिल दमदार हुआ। एक सनम के जाने से,रस्ता हर पुरख़ार‌ हुआ॥ परिचय : अब्दुल हमीद इदरीसी का साहित्यिक उपनाम-हमीद कानपुरी … Read more

कभी ढोता नहीं हूँ

डॉ.अमर ‘पंकज’दिल्ली******************************************************************** भीड़ में शामिल कभी होता नहीं हूँ,बोझ नारों का कभी ढोता नहीं हूँ। रात को मैं दिन कहूँ सच जानकर भी,क्यों कहूँ मैं ? पालतू तोता नहीं हूँ। मुल्क़ की बर्बादियों को लिख रहा जो,मैं ही शाइर आज इकलौता नहीं हूँ। झेलता हूँ हर सितम भी इसलिए मैं,हूँ ग़ज़लगो धैर्य मैं खोता नहीं … Read more