ख़्वाब में नहीं देखा
सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)****************************************** किताब-ए-ज़िंदगी के बाब में नहीं देखा।बहुत दिनों से उसे ख़्वाब में नहीं देखा। बहुत दिनों से मेरी आँखों में अँधेरा है,बहुत दिनों से उसे ख़्वाब में नहीं देखा। हक़ीक़तन भी जिसे देखना न था मुमकिन,बहुत दिनों से उसे ख़्वाब में नहीं देखा। वो जिसको देख के सूरज भी नूर … Read more