प्रभु की रचना…

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************* रचनाशिल्प:मापनी- प्रति चरण १६ मात्रा, मुखड़ा ४ चरणों का, तथा तीन अंतरे ८-८ चरणों के प्रभु की रचना, कितनी न्यारी,जीव-जगत ने हर सुख पाया।मन का मौसम, तन की खुशियाँ,अंग सृष्टि का इन्हें बनाया॥प्रभु की रचना… धरती और गगन दोनों ही,इक-दूजे का प्रेम सजाते।सूरज, चाँद-किरण से अपनी,पहरों में धरती चमकाते।धरती, … Read more

मन दर्पन हम उजला कर लें

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश) ***************************************** सोच को अपनी ऊँचा कर लें।मन दर्पन हम उजला कर लें॥ झूठ से दामन पाक रखें हम,चुग़ली बदी से दूर रहें हम।छोड़ के हर इक काम बुरा अब,दिल को अपने सच्चा कर लें।मन दर्पन हम उजला कर लें…॥ भाई चारा टूट न पाए,साथ हमारा छूट न पाए।अम्नो अमां की ख़ातिर आओ,ख़त्म … Read more

हो गीत का फेरा मेरे घर

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ यह नियम नियति का है कैसा,है जगत का डेरा मेरे घर।ये भाव कहीं जाकर विचरें,हो गीत का फेरा मेरे घर॥ सूरज से नाता मैं न रखूं,पर किरणें बनी सहेली हैंआगे-पीछे दायें-बायें,अनबूझी अजब पहेली हैं।वह सूर्य बसा है सूने में,किरणों का बसेरा मेरे घर॥ शशि पर भी मैं आकृष्ट नहीं,पर तारे मुझे रिझाते हैंअपनी … Read more

हम उन्हीं से पूछ आते हैं

 डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** क्यों उलझ गई है ये जिन्दगी,कि चलो अब इसे सुलझाते हैं।आखिर हुई ऐसी बात क्या,हम उन्हीं से पूछ आते हैं॥ दिन-रात खयालों में क्यों,उनका आना-जाना है।होंठों पर भी क्यों हरदम,उनका ही तराना है।ख्वाबों में भी क्यों आते-जाते हैं,आखिर हुई ऐसी बात क्या-हम उन्हीं से पूछ आते हैं…॥ ये कैसी उदासी-सी,चहुंओर छायी है।चुपचाप … Read more

जीवन सच की राह चलाना सीखें

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** हम अपना ये जीवन सारा सच की राह चलाना सीखें।झूठ कपट अरु लोभ मोह को मन से दूर हटाना सीखें॥ राह चलेंगे जब नेकी की जीवन निर्मल हो पायेगा,संगति सत् की करने से ही तन मन पावन हो जायेगा।औरों का दु:ख अपना समझें काम सभी के आना सीखें,हम अपना ये जीवन…॥ … Read more

धन ऋण का जीवन जीती हूँ

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ मैं तो एक आपबीती हूँ,मेरी कोई राह न मंजिलधन ऋण का जीवन जीती हूँ। मैं हूँ एक मूलधन विधि का,विश्व बैंक में जमा आज हूँकुछ अनुभव प्रति क्षण की दर से,स्वयं दिलाती उसे ब्याज हूँ।एक भविष्य सदा है आगे,एक अतीत अभी बीती हूँ। मैं हूँ पूंजी ऐसी जग में,आगे बढ़ती पीछे घटतीएक तरफ … Read more

माँ की ममता

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* माँ अनमोल रिश्ता (मातृ दिवस विशेष) … मन के गहरे अंधियारे में ज्योति सम तुम जलती हो।त्याग, तपस्या और समर्पण की गाथाएं कहती हो॥ संतों की वाणी से अनुपम माँ की मीठी बातें हैं,आशीषों की छाँव तले ही कटती सारी राते हैं।जीवन का श्रृंगार तुम्हीं हो, गीतों में तुम ढलती हो,मन के … Read more

जियो और जीने दो

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* ‘जियो और जीने दो’ में ही,जीवन का सम्मान है।सेवा से जीवन की शोभा,मिलता नित यशगान है॥ वक़्त कह रहा है हमसे,नैतिकता भी करे पुकारजागो भाई कुछ अब तो,करो न मानवता शर्मसार।प्रेम,नेह,करुणा से ही तो,मानव बने महान है,सेवा से जीवन की शोभा,मिलता नित यशगान है॥ दीन-दुखी के अश्रु पोंछकर,जो देता है … Read more

नदियाँ

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* नदियाँ बहती जगत के हित में,सबको नीर दें।खेत सींचती,मंगल करती,सबकी पीर लें॥ सरिता अपना धर्म निभातीं,बहती ही रहें,कोई कितना कर दे मैला,सहती ही रहें।हर नदिया गंगा-सी पावन,इतना जान लो,हर नदिया पूजित,मनभावन,यह तो मान लो॥ नदियाँ सबकी प्यास बुझातीं, सबकी पीर लें।नदियाँ बहतीं जगत के हित में, सबको नीर दें॥ नदियाँ … Read more

ज़िन्दगी की ख़ातिर

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* जिंदगी की खातिर (मजदूर दिवस विशेष)….. श्रम करने वालों के आगे,गहन तिमिर हारा है।श्रम करने वालों के कारण,ही तो उजियारा है॥ खेत और खलिहानों में जो,राष्ट्रप्रगति के वाहक हैंअन्न उगाते,स्वेद बहाते,जो सचमुच फलदायक हैंश्रम के आगे सभी पराजित,श्रम का जयकारा है।श्रम करने वालों के कारण,ही तो उजियारा है…॥ सड़कों,पाँतों,जलयानों को,जिनने … Read more