प्रभु की रचना…
हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************* रचनाशिल्प:मापनी- प्रति चरण १६ मात्रा, मुखड़ा ४ चरणों का, तथा तीन अंतरे ८-८ चरणों के प्रभु की रचना, कितनी न्यारी,जीव-जगत ने हर सुख पाया।मन का मौसम, तन की खुशियाँ,अंग सृष्टि का इन्हें बनाया॥प्रभु की रचना… धरती और गगन दोनों ही,इक-दूजे का प्रेम सजाते।सूरज, चाँद-किरण से अपनी,पहरों में धरती चमकाते।धरती, … Read more