रखे जाल बुन-बुन

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ अब तो नव जन्मे जीवन में, लग जाता है घुन।फिर भी हमें लगी रहती है, वृद्धापन की धुन॥घटते जीवन का भी अपने,बढ़ता पल-पल भावथोड़ी उम्र और मिल जाये,सभी लगाते दाव।अब तो बांट रहा है सृष्टा, प्राण हमें चुन-चुन…॥ स्वाति-स्वाति रटते बुझ जाती,चातक की भी प्यासनयनहीन ही नयनों को अब,देते यहां प्रकाश।तुला तुल्य हो … Read more

चलो चलें स्कूल हम

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *********************************************** आओ हम सब बच्चे भारत,नौनिहालों साथ स्कूल चलें।अ आ इ ई क ख ग घ पाठ ज्ञान,हम भारतीय इन्सान बनें॥ ज्ञानोदय नव भोर किरण पथ,नव विहान ज्ञान अनुकूल बने।शिक्षा का आलोक चरित निज,शील धीर वीर सच मूल बनें। शिक्षा संयम साहस सम्बल,दुर्गम बाधा पथ शान बढ़ें।हम बच्चे भारत भविष्य … Read more

जीवन ढला

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** शैशव से फिर आया बचपन और जवाँ का दौर चला।जैसे उदय पूर्व से होकर रवि पश्चिम में जाय ढला॥ समय धुरी पर चलता रहता रोक नहीं कोई पाया,जीवन की गति यही निरंतर ये सब है विधि की माया।सूरज-चाँद सितारे नदियाँ है परिणाम यही सबका,खिलते हैं सब वृक्ष धरा पर ऋतु बसंत … Read more

तुम ही पावन…

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************* रचना शिल्प: प्रति चरण १६ मात्रा-२ २ २ २ २ २ २ २…. तुम ही पावन, मन भावन हो,जीवन का तुम ही उपवन हो।तुमसे ही जीवन में सुख हैं,हर सुख का तुम ही मधुवन हो॥तुम ही पावन… पलभर भी जब तुम नहिं दिखती,बेचैनी तब मन में रहती।साँसें थमतीं, आहें … Read more

तुम ही तो शुभ साज हो

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* प्रियवर मेरे हृदय भाव की, तुम ही तो आवाज हो।आशा के हर गीत सृजन का, तुम ही तो शुभ साज हो॥ प्रियतम तुम्हीं गीत सार में, तुम तो शुभ नव भावना,अविरल तेरे प्रेम धार से, पाती निर्मल कामना।मधुर मधुर श्रृंगार गीत का, तुम ही तो आगाज हो,आशा के हर गीत सृजन … Read more

धीमा ज़हर, ले मुँह मोड़

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* तम्बाकू धीमा ज़हर,इससे ले मुँह मोड़।तम्बाकू सेवन नहीं,इसको दे तू छोड़॥ तम्बाकू को जान ले,लाती ढेरों रोग।फिर भी सेवन कर रहे,देखो मूरख लोग॥तम्बाकू से चेतना,होती है नित लुप्त।समझ-सोच की बुद्धि भी,हो जाती है सुप्त॥ और नहीं अब बंधुवर,नहीं नशे की होड़।तम्बाकू सेवन नहीं,इसको दे तू छोड़…॥ तम्बाकू लेती यहाँ,सतत् अनेकों … Read more

बूंद न व्यर्थ गंवाएं

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ जल ही कल…. जल ही जल है, जल ही कल है,बूंद न व्यर्थ गंवायें।जल से मिलता जीवन कैसे,आओ हम समझायें॥ जल से ही दिखती है भू पर,खेतों में हरियालीगेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का,सबकी फसल निराली।आओ इसका करें संरक्षण,कुछ कर्तव्य निभायें॥ जल से ही दिखते हैं भाई,खिलते सब वन उपवनफल-फूलों से सजा दिखता,धरती का घर-आँगन।जल … Read more

हम करें प्रयास

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** हो हरित वसुंधरा….. वातावरण सुरम्य हर तरफ़ हरा-भरा।हम करें प्रयास सभी हो हरित वसुंधरा॥ वृक्ष हों घने-घनें लचक रहीं डालियाँ,खेतों में धान की लहरा रही बालियाँ।लुटाए खजाने हमें अपनी माता धरा,हम करें प्रयास सभी…॥ जगमगाती दिनकर की किरणों का साथ हो,पतझड़ न आये कभी खिले-खिले बाग हो।नृत्य कर रहे मयूर पी … Read more

आशा

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** बीतेगा गर्मी का मौसम जब होगी बरसात।उमड़ घुमड़ कर बदरा दिखलायेगा निज औकात॥ प्राची से सूरज निकलेगा किरणें मुस्कायेंगी,होगा नवल प्रभात गोरियाँ मिल मंगल गायेंगी।होगी खतम घिरी जो तम से वो अँधियारी रात,बीतेगा गर्मी का मौसम जब होगी बरसात…॥ झूम उठेगी धरती सारी हरियाली छायेगी,महकेंगे सब खेत जवानी खेतों पर आयेगी।फसल … Read more

बनकर के इंसान जगत में

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** बनकर के इंसान जगत में, अपना नाम कमाओ।मानव हो मानवता रक्खो, मानव धर्म निभाओ॥ कर्म निरंतर करते रहना,है कर्तव्य तुम्हाराबिन लहरों का किये सामना,मिलता नहीं किनारा।पार करो जीवन सागर तुम, डूब कहीं नहिं जाओ,बनकर के इंसान…॥ नही मिलेगा कोई तुमको,साथ निभाने वालादुनिया के झंझावातों से,सदा पड़ेगा पाला।कदम कहीं रुकने नहिं पाये, … Read more