सफ़र
जबरा राम कंडाराजालौर (राजस्थान)**************************** चलता रहता है सफर,जीवन के पल चार।प्रतिपल सोच-विचार का,दिन में बार हजार॥ सोने-जगने का सफर,करने का कुछ काम।सैर-सपाटे घूमने,छुटपुट काम तमाम॥ खाने-पीने और सब,रहत चलत हर रोज।सफर कई हैं भांत के,मिले करे ज्यों खोज॥ घड़ी दिवस पल मास का,साल सदी के पार।सफर अवधि सम ही चले,समझो करो विचार॥ सफर पूर्ण कब … Read more