वर दे वीणावादिनि, वर दे
डॉ. मीना श्रीवास्तवठाणे (महाराष्ट्र)******************************************* वसंत पंचमी:ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव.. “वर दे वीणावादिनि वर दे।प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव भारत में भर दे!काट अंध-उर के बंधन-स्तर, बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर, जगमग जग कर दे!नव गति, नव लय, ताल-छंद नव, नवल कंठ, नव जलद-मंद्ररव,नव नभ के नव विहग-वृंद को नव पर, नव स्वर … Read more