अपने फर्ज को कभी नहीं भूलें

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ धर्म की उस लौ को फिर जलाया जाना चाहिए, क्योंकि वर्तमान समय में रिश्तों में दरार है। रिश्तों में बढ़ती खटास को मिटाने के लिए हमारी अपनी वह भारतीय संस्कृति व परंपरा का दौर फिर लाने हेतु सामाजिक स्तर पर आगे आने की जरूरत आन पड़ी है, क्योंकि इस समय … Read more

पूजा और पाखंड के बीच खड़ा मनुष्य

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मनुष्य की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वह पूजा को साधना कम, प्रदर्शन अधिक बना लेता है। मंदिर, मस्जिद, गिरजों और गुरुद्वारों में भीड़ बढ़ रही है, पर पड़ोस के भूखे की थाली खाली है। माथे पर तिलक, हाथों में माला, होंठों पर मंत्र और व्यवहार में छल, … Read more

लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराएँ सत्ता व विपक्ष

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी लोकतंत्र के लिए चिन्ताजनक घटना है, क्योंकि लोकतंत्र केवल शासन की एक प्रणाली नहीं, बल्कि निरंतर संवाद, असहमति के सम्मान और संस्थागत विश्वास पर टिकी हुई जीवंत परंपरा है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में संसद इस लोकतंत्र का सर्वोच्च … Read more

समय का फेर

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** वह नगर की सबसे बड़ी पत्र- पत्रिकाओं की दुकान थी। पूरी दुकान पत्र-पत्रिकाओं और उपन्यासों से सजी हुई थी। अंदर, मालिक का केबिन बना था और उसके बाहर एक सोफा रखा था। केबिन के बाहर मालिक का निज सचिव बैठा था। साधारण-सी वेशभूषा में एक सज्जन आए।उन्होंने अपना नाम एक … Read more

संविधान ? हर कोई मांग रहा आरक्षण

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)…. मेरा मन बहुत उदास है। बहुत दुखी भी है। मन में बहुत क्षोभ और आक्रोश है। न जाने कितनी ही बातें जहन में कौंध रही हैं। हमारे संविधान निर्माताओं ने क्या सोचकर संविधान बनाया था। उस समय यह कहा गया था कि १० वर्ष … Read more

बहुआयामी व्यक्तित्व थे जयशंकर प्रसाद

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* हिंदी साहित्य के आकाश में जिन नक्षत्रों की ज्योति युगों तक आलोकित रहेगी, उनमें महाकवि जयशंकर प्रसाद का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। वे छायावाद के शिखर स्तम्भ, रहस्यवाद के गम्भीर चिन्तक, स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिधर्मी उदघोषक तथा आधुनिक हिंदी नाटक के अप्रतिम शिल्पी थे। उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था … Read more

रिश्तों की धूप में पनपती ज़िंदगी और भविष्य

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** आज का समय तेज़ रफ्तार का समय है। सुबह आँख खुलते ही मोबाइल की स्क्रीन, अधिसूचना (नोटिफिकेशन) की कतार, व्हाट्सएप के संदेश, सोशल मीडिया की सुर्खियाँ और ब्रेकिंग न्यूज़-इन सबके बीच हम जीवन जी रहे हैं। इस भाग-दौड़ में सबसे ज़्यादा जो पीछे छूट रहा है, वह है-ठहराव, संवाद और संवेदना। … Read more

‘छोटी चादर’ में बड़ी सोच ही असली ताकत

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** “जिन्हें घुटने मोड़ कर सोना आ गया, उनकी ज़िंदगी में कोई भी चादर छोटी नहीं पड़ सकती।” यह पंक्ति केवल नींद की मुद्रा नहीं बताती, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा दर्शन समझाती है। यह उन लोगों की कहानी है, जिन्होंने हालातों से लड़ना नहीं, उनके बीच जीना सीख लिया। जिन्होंने शिकायत … Read more

डराने लगी है आभासी खेल की लत

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** आभासी खेल (ऑनलाइन गेमिंग) की लत एवं दुनिया कितनी भयावह व घातक हो सकती है, इसकी एक ही दिन में २ अलग-अलग जगह घटी घटनाओं ने न केवल झकझोरा है, बल्कि यह हमारे समय, हमारी सामाजिक संरचना और सामूहिक असावधानी पर लगा हुआ एक गहरा प्रश्नचिह्न बना है। धीरे-धीरे किशोरवय को अपने … Read more

पुस्तकों से प्रेम बढ़ाएँ

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ आज डिजिटल आपा-धापी के समय में पढ़ने की संस्कृति और पुस्तकों पर छाए हुए संकट की बात अक्सर होती रहती है, परंतु सुखद बात यह है कि आज भी पुस्तकों का अलग ही महत्व है। अंतरजाल के शुरुआती दौर में लोगों ने यह चिंता जताई थी कि सूचना का यह माध्यम पुस्तकों … Read more