अदम्य साहस का प्रदर्शन किया था वीर सैनिकों ने

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)….           भारत की नारियों के लिए सिंदूर सम्मान और गर्व का प्रतीक है। जब इस सम्मान पर आघात हुआ, तो पूरे देश में दुःख और आक्रोश फैल गया। २६ अप्रैल २०२५ को हुए हमले में निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया। … Read more

श्रम की गरिमा और समाज की संवेदना

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. यदि हम मानवता के विकास का इतिहास देखते हैं तो एक सत्य निकाल कर सामने आता है कि संसार की प्रत्येक भव्य इमारत व प्रत्येक विकसित नगर और प्रत्येक सुविधा के पीछे मजदूरों का श्रम छिपा हुआ है। समाज का निर्माण केवल … Read more

महिला आरक्षण: राजनीतिक दलों का दोहरा चरित्र

ललित गर्गदिल्ली*********************************** भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है, कि जिस देश में महिलाओं को ‘शक्ति’, ‘मातृशक्ति’ और ‘आधी दुनिया’ कहकर सम्मानित किया जाता है, वहीं राजनीति में उन्हें समान भागीदारी देने के प्रश्न पर लगभग सभी राजनीतिक दलों की नीयत संदिग्ध दिखाई देती है। संसद से लेकर चुनावी मंचों तक … Read more

भारतीय सेना की सटीक रणनीति का जश्न है ‘आपरेशन सिंदूर’

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)…. जब कश्मीर में अमन-चैन की इबादत लिखी जा रही थी, सभी भाई-बंधु मिलजुलकर एकजुटता की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल प्रस्तुत कर रहे थे; ऐसे में दुश्मन पाकिस्तान के आतंकवादियों ने अमन-चैन को खत्म करने का दुस्साहस किया। वह भी तब, जबकि माँ भारती की … Read more

मासूम का करुण क्रंदन

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** यूक्रेन और रूस के बीच छिड़े युद्ध में राजधानी कीव में फंसी जूही अपने ३ महीने के बच्चे को अपनी छाती से चिपकाए हुए बैठी हुई थी। गरजती-बरसती मिसाइल और बम के धमाकों की आवाजों से वहाँ बैठे सभी लोगों के चेहरे पर भय और खौफ का आतंक छाया हुआ था। तभी धमाके की … Read more

हमेशा सच के साथ चलिए

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** सतरंगी दुनिया-२२… ज़िंदगी को ठंड और घमंड दोनों से बचाकर रखना चाहिए, क्योंकि दोनों ही परिस्थितियों में आदमी अकड़ जाता है। हम लोग घर के दरवाजे पर शुभ-लाभ लिखते हैं। केवल शुभ-लाभ लिखने से कुछ नहीं होगा। शुभ विचार रखिए अपने लिए भी और दूसरों के लिए भी, फिर … Read more

गंगोत्री से गंगासागर तक ‘कमल’ दस्तक

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारतीय लोकतंत्र के विशाल परिदृश्य में समय-समय पर ऐसे क्षण आते हैं, जो केवल चुनावी परिणाम नहीं होते, बल्कि वे इतिहास की दिशा को बदलने वाले संकेत बन जाते हैं। वर्ष २०२६ के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम ऐसा ही एक निर्णायक मोड़ लेकर आया है, जिसने देश के राजनीतिक … Read more

‘अपराजेय’ कोई नहीं, इसलिए जन-हित न भूलिए

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** जैसे खेल में बहुत कुछ तय होने पर भी अनेक बार नया इतिहास रचा जाता है, ऐसे ही राजनीति में भी सबका समय आता है और जनादेश किसी को सत्ता देता है, तो किसी के किलों की दीवारें दरक जाती है। अर्थात साफ है कि राजनीति में कोई ‘अपराजेय’ नहीं होता। … Read more

‘किराए की संतान’ के प्रचलन से घटते सम्बंध

ललित गर्गदिल्ली*********************************** जीवन की सांझ जब अपने पूरे विस्तार के साथ उतरती है, तब मनुष्य को सबसे अधिक आवश्यकता दवाइयों या धन की नहीं, बल्कि अपनों के सान्निध्य और अपनों की होती है। यह वही समय होता है, जब व्यक्ति अपने जीवन की संचित स्मृतियों, अनुभवों और भावनाओं को साझा करना चाहता है, लेकिन आज … Read more

अगर ये  पंछी न होते तो…

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* पूर्वांचल पर भोर की लालिमा धूमिल हुई, तब उजियारे की नई आभा लेकर सूरज की कोर उभरने लगी है। भीषण गर्मी के दिन हैं, फिर भी सुबह की ठंडी हवा के झोंके कुछ यूँ छू रहे हैं, जिससे तन-मन प्रसन्न हुआ जा रहा है।   सामने इमली के पेड़ों में छिपकर एक भरद्वाज का … Read more