शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया और गिरता स्तर

डॉ. रामवृक्ष सिंहलखनऊ (उप्र)******************************* मेरे अनुभव और मतानुसार शिक्षकों, विशेषकर महाविद्यालयीन शिक्षा के स्तर में गिरावट का मुख्य कारण है – शिक्षकों के चयन में धाँधली, भाई-भतीजावाद, प्रतिभा एवं योग्यता की अनदेखी करके केवल अपने चहेतों की नियुक्ति करने का व्यापक प्रचलन। हालांकि, स्नातक स्तर के संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए राष्ट्रीय स्तर … Read more

युद्ध हर दृष्टि से विनाशकारी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** युद्ध और शांति-जरूरी क्या ? वर्तमान समय में पूरा विश्व, युद्ध की विभीषिका के परिणामों से प्रभावित हो रहा है। हमारे देश भारत में भी कोई ‘लॉकडाउन’ की बात कर रहा है तो कोई एलपीजी गैस, तो कोई पेट्रोल, तो कोई डीजल के लिए कतार में लगा हुआ है। सब तरफ अफवाहों … Read more

सामाजिक कलंक है मानव अंग तस्करी

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ लालच का यह खेल देखकर बहुत दुःख होता है। अपनी महत्त्वाकांक्षा के लिए इंसान कितना गिर सकता है, यह सोचकर मन विचलित हो उठता है। देश के नोएडा, दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, मेरठ आदि न जाने कितने शहरों-राज्यों में मानव अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त का धंधा जोरों पर है।हाल ही में … Read more

संतुलन बनाएं, ताकि विवाह संस्था सुरक्षित रहे और व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी

ललित गर्गदिल्ली*********************************** आधुनिकता के संक्रमणकालीन दौर में सबसे अधिक यदि कोई संस्था प्रश्नों के घेरे में है, तो वह विवाह और रिश्तों की पारंपरिक अवधारणा है। बदलती जीवन शैली, आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीक, वैश्वीकरण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती चेतना ने रिश्तों की परिभाषा, अपेक्षाएँ और संरचना-सब कुछ बदल दिया है। यही कारण है, कि आज … Read more

मिथकों को तोड़कर देशभक्ति मजबूत करती है ‘धुरंधर २’

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** समकालीन हिंदी सिनेमा में देशभक्ति का विषय हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है, लेकिन इसके चित्रण का तरीका समय के साथ बदलता रहा है। लम्बे समय तक मुख्यधारा के सिनेमा में देशभक्ति को एक सीमित, भावनात्मक और कई बार रूढ़ छवि के रूप में प्रस्तुत किया गया, जहाँ नायक अकेले … Read more

ललामभूत मिट्टी

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* अभी-अभी गेहूँ की फसल कट गई है। कितनी रौनक थी खेतों में, अचानक रौनक चले जाने से मिट्टी उदास, हताश हो गई है। मिट्टी को लहराती बालियों की रह-रहकर याद आ रही है। बालियों का झूमना, हवाओं से बातें करना, अपनी ही मस्ती में अठखेलियाँ करना, मिट्टी से कुछ-कुछ बतियाना, हवाओं … Read more

स्वयं से प्रेम जरूरी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** ‘स्वयं प्रेम स्वार्थ है या जरूरी’, यह विषय हमें सोचने के लिए मज़बूत करता है, कि क्या हम मशीन बनते जा रहे हैं। कई तो अपने काम में इतने व्यस्त हैं, कि उनके पास अन्य किसी काम के लिए समय नहीं, पर इसका प्रभाव परोक्ष रूप से उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है … Read more

आत्म शक्ति का नाम – रामभक्त हनुमान

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ‘हनुमान जयंती’ विशेष… हर युग में भक्ति का परिचय जिन्होंने दिया, वह सरल-सौम्य जिनका कोई तोड़ विश्व में नहीं है, वह राम भक्त हनुमान हैं; जिनके हृदय में राम, लक्ष्मण व जानकी माता हरदम रहते हैं। आत्मशक्ति का वह अनूठा नाम राम भक्त हनुमान है। ‘जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, … Read more

महावीर के संदेश जीवन में उतारना चाहिए

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ‘महावीर जयंती’ विशेष… जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर वर्धमान जी की जयंती महावीर जयंती के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व श्रद्धालुओं द्वारा मानवता, अहिंसा और आत्मज्ञान के महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। अहिंसा के पर्याय माने जाने वाले भगवान स्वामी महावीर जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर माने … Read more

उत्तम विचारों को जीवन में उतारने का संकल्प लें

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** जैन ग्रंथों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान् महावीर का जन्म चैत्र माह (हिंदू पंचांग) की १३ तिथि को बिहार के कुंडल ग्राम (वर्तमान कुंडलपुर) में हुआ था।इधर, श्वेतांबर जैन धर्म के अनुसार महावीर जी का जन्म ५९९ ईसा पूर्व में हुआ था, जबकि दिगंबर जैन धर्म के अनुसार उनका जन्म वर्ष … Read more