माहवारी:सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** भारत के सामाजिक विकास की यात्रा में महिलाओं की स्थिति हमेशा एक निर्णायक कसौटी रही है। किसी भी राष्ट्र की प्रगति केवल आर्थिक आँकड़ों या बुनियादी ढाँचे से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से आँकी जाती है कि वह अपने समाज के आधे हिस्से-महिलाओं को कितना सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर … Read more

अब दुनिया को चाहिए बेटियाँ

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ वंश चलाने के नाम पर सदियों से बेटों की चाहत रखने वाली दुनिया की सोच अब बदल रही है। पहले लोगों ने बेटियों को दुनिया में आने से रोका, वहीं अब बेटों से ज्यादा बेटियों की चाहत बढ़ रही है। अब वह बोझ की तरह नहीं, वरन् वरदान समझी जा रही है। … Read more

ऐसी शिक्षा नीति की आवश्यकता, जो प्रतिभा को जाति से ऊपर रखे

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विवि अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से … Read more

अभिभावक समझें-बच्चा प्रतिष्ठा का साधन नहीं, स्वतंत्र व्यक्तित्व

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडम्बना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और शाला में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर … Read more

भारत को गौरवान्वित करने की दिशा में प्रयास जरूरी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)…. किसी भी देश के संचालन के लिए उसका संविधान बेहद अहम् होता है। हमारे भारत का संविधान दुनिया का सबसे अच्छा संविधान माना जाता है, क्योंकि इसमें हर किसी को समान अधिकार हैं। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व … Read more

महँगा सोना, हल्का रुपया और भारी पड़ती ज़िंदगी

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** कहते हैं, “जब घर की थाली खाली हो, तब तिजोरी का सोना भी बोझ लगने लगता है।” यही बात आज भारत के आम आदमी की सच्चाई बन चुकी है। आम आदमी को कारण कुछ पता नहीं, पर बस यह पता है कि सोना और चाँदी ऐतिहासिक ऊँचाई पर हैं, लेकिन रुपया … Read more

सुरक्षित, शिक्षित व आत्मविश्वासी बनाना जरूरी

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ (२४ जनवरी) विशेष… ‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए जागरूकता बढ़ाने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने का दिन है, जिसकी शुरुआत २००८ में हुई। इसके माध्यम से बालिकाओं की तस्वीर बदल रही है, अब वे शिक्षा, खेल और नेतृत्व में आगे बढ़ … Read more

प्रकृति का पुजारी है वसंत उत्सव

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** ज़िंदगी एक वसंत… (वसंत पंचमी विशेष)… ‘वसंत पंचमी’ जो अबूझ मुहूर्त माना जाता है, विवाह आदि मांगलिक कार्य तथा नवीन प्रतिष्ठान के लिए श्रेष्ठ दिन होता है। ऋतुराज वसंत के आने पर वृक्षों की पत्तियाँ अभिवादन के लिए जमीन पर बिछ जाती हैं। टेसू के फूल खिलने लगते हैं। आमों के … Read more

सचेत होकर बचेंगे मानवीय मूल्य

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** मानवीय मूल्यों से नाता तोड़ कर जिस नव संस्कृति से हम इठला रहे हैं, वह हमारी अस्मिता को ही समाप्त करती जा रही है। हमें अपनी संस्कृति को बचाने के लिए सचेत होने की ज़रूरत है।अनुशासन और मर्यादा का एवं हमारी संस्कृति और सभ्यता का क्षरण होता जा रहा है। जब समाज … Read more

पाश्चात्य संस्कृति बुझा रही चिराग

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ आधुनिकता का यह दौर ना जाने इन युवा पीढ़ी को कहाँ ले जाएगा। पाश्चात्य संस्कृति का रंग शहरों के युवक-युवतियों पर ऐसा चढ़ा है, कि खुलेआम सिगरेट के गुल-छर्रे उड़ा रहे हैं। शराब की बोतलें पार्टी की संस्कृति बनता जा रही है। जैसे यह अमृत है ? इस आपा-धापी व … Read more