भारतीय लोकतंत्र को लोक केंद्रित होने की आवश्यकता

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है। यह लोकतंत्र करोड़ों नागरिकों की आशाओं, संघर्षों और अधिकारों पर आधारित है। संविधान ने भारत को एक ऐसे गणराज्य के रूप में परिकल्पित किया था, जहाँ शासन की प्रत्येक व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य जनता का कल्याण हो। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ … Read more

आम आदमी विकास से बाहर ?

ललित गर्गदिल्ली*********************************** स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नए भारत के निर्माण के जिन आधार स्तंभों की कल्पना की गई थी, उनमें शिक्षा और चिकित्सा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। यह माना गया था कि यदि देश के नागरिक शिक्षित, स्वस्थ और जागरूक होंगे तो लोकतंत्र मजबूत होगा, सामाजिक असमानताएं कम होंगी और राष्ट्र विकास के … Read more

वृक्षों, पेड़-पौधों और नदियों का अपना महत्व

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ गंगा दशहरा पर्व (२६ मई) विशेष…      दस पापों को नष्ट करने वाले शुभ योग के संयोग के साथ ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर पूरे देश में ‘गंगा दशहरा’ पर्व मनाया जाता है। इस दिन माँ गंगा के स्वर्ग से धरती पर अवतरण की खुशी में इस … Read more

राजनीतिक दलों के लिए गम्भीर चेतावनी है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में कभी-कभी ऐसे प्रतीक अचानक उभरते हैं, जो देखने में भले व्यंग्य, मजाक या इंटरनेट ट्रेंड लगते हों, लेकिन उनके भीतर समाज की गहरी बेचैनी, निराशा और राजनीतिक असंतोष छिपा होता है। मई २०२६ में सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इसी प्रकार की … Read more

दवा-इलाज  के नाम पर मौत… कब तक ?

ललित गर्गदिल्ली*********************************** किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सेना, अर्थव्यवस्था, तकनीकी उपलब्धियों या ऊँची इमारतों से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह अपने नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति कितना संवेदनशील है। स्वास्थ्य व्यवस्था किसी भी देश की आत्मा होती है। अस्पताल केवल भवन नहीं होते, … Read more

भारतीय ज्ञान परंपरा का दिव्य आलोक ‘शास्त्र’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मानव सभ्यता के विकास में ‘शास्त्र’ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। शास्त्र केवल ग्रंथ नहीं, अपितु जीवन को दिशा देने वाले ज्ञान, अनुशासन, नीति, विज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के आधार स्तंभ हैं। भारतीय संस्कृति में शास्त्रों को ज्ञान का दिव्य स्रोत माना गया है। ‘शास्’ धातु से निर्मित … Read more

कृत्रिम बुद्धिमता : बढ़ते कदम, जिम्मेदारी सबकी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** कृत्रिम बुद्धिमता (ए.आई.) एक ऐसी तकनीक है, जो कम्प्यूटर और मशीनों को मानव सीखने, समझने, समस्या समाधान, निर्णय लेने, रचनात्मकता और स्वायत्तता का अनुसरण करने में सक्षम बनाती है।    ए.आई. से सज्जित एप्लिकेशन और उपकरण वस्तुओं को देख और पहचान सकते हैं। ये मानवीय भाषा को समझ सकते हैं। ये नई … Read more

घोषणा-पत्र की राजनीति पर लोकतांत्रिक लगाम आवश्यक

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति जनता का विश्वास है। चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं होते, बल्कि जनता और राजनीतिक दलों के बीच एक नैतिक अनुबंध भी होते हैं। जब कोई राजनीतिक दल चुनाव के समय घोषणा-पत्र जारी करता है, तब वह जनता के सामने अपने विचार, नीतियाँ और … Read more

राष्ट्रहित के आह्वान में भी राजनीति क्यों ?

ललित गर्गदिल्ली*********************************** आज पूरी दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं ने मानव सभ्यता को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है। खाड़ी देशों में लंबे समय से चल रहे संघर्ष और युद्ध की विभीषिका ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे तक प्रभावित … Read more

बंगाल : बवाल, बगावत और बदलाव की बड़ी चुनौती

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** पश्चिम बंगाल की राजनीति ने ९ मई २०२६ को एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ देखा, जिसकी कल्पना कुछ वर्ष पहले तक कठिन मानी जाती थी। लंबे समय तक वामपंथी शासन और फिर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के बाद अब राज्य की सत्ता भारतीय जनता पार्टी के हाथों में … Read more