सार्थक चिंतन की ओर बढ़ें

राधा गोयलनई दिल्ली*************************************** यह तो हमें ही तय करना है, कि हम केवल चिंतन की चिंता करते रहें या उस पर कुछ अमल भी करें ? जो करना है, उसकी केवल चिंता करने से तो काम नहीं होगा। काम तो अमल करने से ही होगा। कुछ लोग ऐसे हैं, जो समस्या पर सिर्फ चिंता ही … Read more

मन से अमीर रहिए

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)******************************************** सतरंगी दुनिया-३३… हमारे समाज को सब पता है कि कौन किसके साथ घूम रहा है, किसकी बहू, बेटी कहाँ जा रही है, और किसके बेटे का कहाँ लफड़ा है ?, लेकिन किसके घर आज खाना नहीं बना, ये समाज को नहीं पता और न ही जानना चाहते हैं। शेर … Read more

स्वप्रेरित प्रकटीकरण से होगा लोकतंत्र अधिक पारदर्शी

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** सूचना का अधिकार अधिनियम… भारतीय लोकतंत्र ने ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ २००५ के माध्यम से नागरिकों को शासन में भागीदारी का एक ऐसा संवैधानिक औजार प्रदान किया, जिसने पहली बार यह स्पष्ट किया कि सरकारी सूचनाएँ सरकार की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की धरोहर हैं। यह कानून केवल सूचना प्राप्त … Read more

युवाओं को को बचना होगा नशे के जाल से

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** आजकल युवाओं में धूम्रपान और अन्य तरह के नशे का आकर्षण चिंताजनक रूप से  बढ़ता जा रहा है। इन किशोर एवं युवा बच्चों को इस तरह की हर चीज एक क्लिक पर मिल जाती है। ऐसी स्थिति में उनके मन में धैर्य और संयम जैसे शब्दों का उनके शब्दकोष में कोई स्थान नहीं होता। जरा-सी निराशा … Read more

मंदिरों में हो सुशासन का सूत्रपात

ललित गर्गदिल्ली******************************* भारत की पहचान केवल उसकी प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक दर्शन से नहीं है, बल्कि उन मंदिरों से भी है जो करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और जीवन का आधार हैं। अयोध्या का श्रीराम मंदिर, बद्रीनाथ धाम, माता वैष्णोदेवी, तिरुपति, काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, सालासर बालाजी, खाटू श्यामजी जैसे मंदिर केवल धार्मिक स्थल … Read more

कुत्सित सोच वाले लोग बाधक

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** कुत्सित सोच (संकीर्ण मानसिकता) वाले लोग समाज, रिश्तों और खुद के विकास में सबसे बड़ा बाधक होते हैं। इनकी पहचान, नकारात्मकता और इनसे बचाव के व्यावहारिक उपाय हैं-  कुत्सित सोच वाले लोगों की पहचानदूसरों की टांग खींचना:ये लोग अपनी सफलता पर काम करने के बजाय दूसरों को नीचा दिखाने में ऊर्जा … Read more

अब यादें शेष… जो है विशेष

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )********************************** छोटे से गाँव देहरिया साहू (जिला देवास) में अपनी शिक्षा, संस्कार व समर्पण में कर्मवीर श्रेष्ठ शिक्षक, जो बच्चों के प्रति सजगतापूर्वक ईमानदारी से शासकीय शाला में अपनापन रखते हुए अपना अव्वल दे रहा था, उनका यूँ चले जाना बहुत आश्चर्यजनक है। विद्यार्थियों की योग्यता का बीज पूर्ण रूप से … Read more

हिंद-प्रशांत में भारत का बढ़ता सामर्थ्य

ललित गर्गदिल्ली******************************** भारत आज केवल विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति ही नहीं, बल्कि एक उभरती हुई वैश्विक महाशक्ति के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति ने जिस आत्मविश्वास, स्पष्टता और दूरदृष्टि का परिचय दिया है, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल … Read more

क्या शाकाहारियों को स्वच्छ हवा में साँस लेने का अधिकार नहीं ?

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** लोकतांत्रिक समाज में प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का भोजन करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। यह स्वतंत्रता व्यक्तिगत गरिमा और जीवन-शैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, किंतु किसी भी अधिकार की सीमा वहीं तक होती है, जहाँ से दूसरे व्यक्ति के अधिकारों का हनन प्रारंभ होता है। यदि किसी व्यक्ति की भोजन … Read more

भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर ‘संयुक्त परिवार’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* संयुक्त परिवार भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। यह केवल एकसाथ रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, सहयोग, अनुशासन और पारिवारिक मूल्यों का सुदृढ़ आधार है। संयुक्त परिवार में दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची, भाई-बहन तथा अन्य सदस्य एक ही छत के नीचे रहते हैं। सभी एक-दूसरे के सुख-दुःख में … Read more