माओवादी मुक्ति से शांति एवं संतुलन की नई संभावनाएँ

ललित गर्गदिल्ली*********************************** भारत जैसे विशाल, विविधतापूर्ण और लोकतांत्रिक राष्ट्र के सामने आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियाँ हमेशा से बहुआयामी रही हैं। इन चुनौतियों में नक्सलवाद या माओवादी हिंसा एक ऐसी समस्या रही, जिसने दशकों तक देश की आंतरिक शांति, विकास और सुशासन को गंभीर रूप से प्रभावित किया। विशेषकर छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार और आंध्र प्रदेश … Read more

सशक्त बनाती है सार्थक अभिव्यक्ति

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मनुष्य का मन विचारों का अथाह सागर है, जिसमें प्रतिक्षण असंख्य तरंगें उठती-गिरती रहती हैं। ये विचार ही हमारे व्यक्तित्व, व्यवहार और जीवन-दृष्टि का निर्माण करते हैं, परंतु केवल विचारों का होना पर्याप्त नहीं है; उनकी सार्थक अभिव्यक्ति ही उन्हें मूल्यवान बनाती है। जब मन के भाव उचित शब्दों, … Read more

मर्यादा, सुशासन और शांति के विश्वनायक श्रीराम

ललित गर्गदिल्ली*********************************** ‘रामनवमी’ (२६ मार्च) विशेष…. रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के नैतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पुण्य और पवित्र अवसर है। आज जब दुनिया युद्ध, हिंसा, आतंक, असहिष्णुता, पारिवारिक विघटन, राजनीतिक अविश्वास और नैतिक पतन जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रही है, तब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन-दर्शन केवल आस्था … Read more

कृत्रिम मेधा:भारतीय भाषाओं के डाटा की कमी अत्यंत गंभीर मुद्दा

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) विश्व की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक बन चुकी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, मीडिया, प्रशासन और व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इस तकनीक की सफलता का एक महत्वपूर्ण आधार विशाल मात्रा में उपलब्ध … Read more

उपवास, दिनचर्या और खान-पान में समन्वय आवश्यक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* नवरात्र भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पावन और आध्यात्मिक पर्व है, जो आत्मशुद्धि, साधना और संयम का संदेश देता है। यह केवल देवी आराधना का ही अवसर नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन स्थापित करने का भी एक श्रेष्ठ माध्यम है। इन नौ दिनों में उपवास, दिनचर्या और खान-पान के … Read more

अनुकरणीय भगवान् श्री राम

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ‘रमणे कणे कणे इति राम’ यानी जो कण-कण में बसे, वही राम है। श्री राम के विषय में सनातन धर्म में अनेक कथाएं एवं गाथाएं विद्यमान हैं। श्री राम जी के जीवन की अनुपम कथाएं महर्षि वाल्मीकि जी ने अत्यंत सुंदर शब्दों में रामायण में प्रस्तुत की हैं। इसके अतिरिक्त गोस्वामी तुलसीदास … Read more

हँसते-हँसते फाँसी को गले लगाया

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ‘शहीद दिवस विशेष’ (२३ मार्च)… ‘२३ मार्च’ इस दिन भारत के ३ सपूतों शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने देश के लिए हँसते-हँसते फाँसी की सजा को गले लगा लिया था। उनकी शहादत को देश का हर नागरिक सच्चे दिल से नमन करता है।भारत में शहीदों के सम्मान और देश के … Read more

अक्ल बड़ी या भैंस ?

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हमारे शरीर की समस्त चेष्टाओं का संचालन मस्तिष्क द्वारा होता है, जिनमें अग्रणी है बुद्धि बल। इस बल के आगे सभी बल फीके पड़ जाते हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहाँ शारीरिक बल पर बुद्धि ने विजय पाई। बुद्धिमान लोगों ने अपने बुद्धि बल से साम्राज्यों के उत्थान पतन में बहुत बड़ी … Read more

‘कृत्रिम मेधा’ और मानवीय रिश्ते

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** समय की संध्या और सुबह के संगम पर खड़ा आधुनिक मनुष्य एक ऐसे युग का साक्षी है, जहाँ संवाद की सरिता अब शब्दों से अधिक संकेतों, स्पर्शों से अधिक पर्दे (स्क्रीन) और संवेदनाओं से अधिक सॉफ्टवेयर के सहारे बह रही है। ‘कृत्रिम मेधा’ ने न केवल कार्य और व्यापार की दुनिया … Read more

‘मनोरंजन’ की गिरावट और ‘मौन’ सेंसर बोर्ड

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ के दौर में इन दिनों शायद सेंसर बोर्ड ने भी देशवासियों की बुद्धि को कृत्रिम ही समझ लिया है, वरना क्या बिसात कि ‘सरके चुनर तेरी सरके’ जैसा द्विअर्थी गीत बाज़ार में आ जाता।इस गीत में कलाकारों के रूप में नर्तकी नोरा फतेही और अभिनेता संजय दत्त दिखाई देते … Read more