तुझ-सा न कोई हमसफ़र मेरा
पी.यादव ‘ओज’झारसुगुड़ा (ओडिशा)********************************************** ‘क्या अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)… ज़िंदगी के हर एक मोड़ पर,साथ निभाया है जिसने मेराऐ किताब! तुझ-सा ना कोई,इस जहां में हमसफ़र मेरा। कोख में जब था मैं माँ की,सुनता था तेरी सारी बातेंसकुशल मैं धरती पर आऊँ,पढ़ती थी माँ कई किताबें। माँ सुलाती जब-जब मुझको,लोरियाँ तेरे पन्नों की है … Read more