तुझ-सा न कोई हमसफ़र मेरा

पी.यादव ‘ओज’झारसुगुड़ा (ओडिशा)********************************************** ‘क्या अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)… ज़िंदगी के हर एक मोड़ पर,साथ निभाया है जिसने मेराऐ किताब! तुझ-सा ना कोई,इस जहां में हमसफ़र मेरा। कोख में जब था मैं माँ की,सुनता था तेरी सारी बातेंसकुशल मैं धरती पर आऊँ,पढ़ती थी माँ कई किताबें। माँ सुलाती जब-जब मुझको,लोरियाँ तेरे पन्नों की है … Read more

देश की नींव ‘परिवार’

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** परिवार समूचे राष्ट्र की है सबसे महत्वपूर्ण कड़ी,देश की किस्मत और अस्मत है परिवार से जुड़ीपरिवार वो ईंट है जिस पर राष्ट्र की सदा नींव खड़ी,परिवारों की ईंट-ईंट ईट मिलकर ही इमारत देश की बड़ी। परिवार केवल कुछ लोगों जमावड़ा मात्र नहीं है,यह संस्कार, चारित्र्य, पुरुषार्थ गढ़ने का मंदिर हैव्यक्ति निर्माण … Read more

कायर न समझ लेना

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* पहलगाम हमला… अश्रुओं को सह सको तो,हाल-ए-जख्म समझ लेनाग़म से दिल अब फटा जा रहा,अग्निपरीक्षा मत लेनाजल्लाद नहीं, इंसान हैं हम,कायर न समझ लेना। दिल में दर्द की आँच जले तो,सत्य नहीं झुठला देनायही सत्य और एक ही सत्य है,सर्प को दूध नहीं देनाबाँह वस्त्र की आज ही काटो,आस्तीन में पलने … Read more

पुस्तक है उजियार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* ‘क्या अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)… वाहक पुस्तक सत्य की, पुस्तक है उजियार।पुस्तक ने इस लोक से, किया परे अँधियार॥ पुस्तक देती चेतना, नया सोच दे नित्य।पुस्तक को मानें सभी, जैसे हो आदित्य॥ पुस्तक अनुशासन रचे, संस्कार की धूप।जो पुस्तक को पूजता, पाता तेजस रूप॥ पुस्तक गढ़े चरित्र को, पुस्तक … Read more

पुस्तक हमारी सच्ची दोस्त

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ‘क्या अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)… पुस्तकों का यह ज्ञान,हमें प्रकाश की और ले जाता हैयह अन्धकारमय जीवन को रोशनी का संसार है,और यह हम सभी के करीब है क्योंकि पुस्तक ही हमारी सच्ची दोस्त है। रामायण, महाभारत, गीता व धार्मिक ग्रंथ,यह मीरा, तुलसीदास, कबीर के छंदहर एक गीत-दोहों … Read more

पृथ्वी की रक्षा कर्तव्य

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* ‘विश्व पृथ्वी दिवस (२२ अप्रैल)’ विशेष… कहती पृथ्वीपर्यावरण दिनमानव जागे। उचित होगासंरक्षण करनाप्रत्येक दिन। दूषित करेनदियाँ जलाशयसोचता नहीं। उजाडे़ वनवृक्ष काटते सदाप्रगति नाम। बाढ़ बढा़एतूफा़न भी भीषणपाए हताशा। वर्षा गले जो,बदले तापमानमानव त्राहि। करे दुहाईसोचे नहीं मानवआए विपदा। रोको जी क्षतिअपनी जीव दुर्गतिकरो प्रगति। वृक्ष लगाओहरियाली बढा़ओहानि हो कम। प्रकृति … Read more

करनी पड़ेगी चिंता

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** ‘विश्व पृथ्वी दिवस (२२ अप्रैल)’ विशेष… ‘पृथ्वी’,अनमोल तत्वकरनी पड़ेगी चिंता,वरना संकटजीवन। ‘पृथ्वी’,बचाना हैजल, जंगल, जमीन,जीवन कीमतीसमझो। ‘पृथ्वी’,तत्व घटेंगेजीव-जंतु तड़पेंगें,साँस छूटेगीमौत। ‘पृथ्वी’,जागरूकता जरूरी‘विश्व पृथ्वी दिवस’,पिघलती बर्फजागो। ‘पृथ्वी’,संकट गहराया‘ओजोन’ परत छेद,भयंकर तूफान,‘सुनामी।’ ‘पृथ्वी’,प्रकृति कीमतीसमस्या हुई विकराल,मनुष्य जिम्मेदारभविष्य। ‘पृथ्वी’,दर्जा ‘माँ’करते रोज प्रदूषित,जलवायु संकटअस्तित्व। ‘पृथ्वी’,सुन्दर जीवनआकाश-जल-अग्नि,दुरूपयोग क्यों ?चिंतन। ‘पृथ्वी’,मिटेगा पानीबस जीवन ‘कहानी’,विलुप्त हवायमराज। ‘पृथ्वी’,स्वार्थ छोड़ोसहज-सरल … Read more

पुस्तकें कल्पवृक्ष और कामधेनु, प्रेरणा लें

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)…. ‘विश्व पुस्तक दिवस’ जिसे ‘विश्व पुस्तक प्रतिलिपि दिवस’ भी कहा जाता है, पुस्तक-संस्कृति को बल देने और पढ़ने की प्रवृत्ति के आनंद को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाने वाला विश्व उत्सव है। हर साल २३ अप्रैल को दुनियाभर में पुस्तकों के दायरे को … Read more

किताबें ही मन को पढ़ती

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)…. किताबें ही सबसे अच्छी दोस्त,जीवन भर साथ देतीबच्चों से लेकर बुजुर्गों की हमदर्द,लिखे मन के भाव कोपढ़ता है जब मनतब मन तृप्त हो जाता। किताबें कभी बूढ़ी नहीं होती,जब सड़कों पर बिकती रद्दी मेंतब मन व्यथित हो उठता,ऐसा लगता है किघर के बुजुर्ग … Read more

इश्क़ करना खता थी

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** नासमझ बेअदब, बेवफा, आदमी,खुद को भी अब समझता है खुदा आदमी। ज़िंदगी बर्बाद कर डाली है उसने प्यार में,बारहा पैरों से जमीं छीन लेता आदमी। बेवफाई का तेरी शिकवा भला कैसे करूँ,पाक मोहब्बत की भी तौहीन करता आदमी। इश्क़ करना क्या खता थी कोई बतलाए मुझे,वादा करके क्यूँ हो गया … Read more