बूँदों की पायल
राधा गोयलनई दिल्ली************************************* रुनझुन-रुनझुन बूँदों की पायल की मृदु झंकार,कानों में जब पड़ी, हृदय तब करने लगा पुकारबरसो सावन झूम के, इस धरती को चूम के,बड़े दिनों के बाद धरा की, तुमने सुनी गुहार। बूँदों की पायल बजती, नभ गाए मेघ मल्हार,अंग-अंग हो गया प्रफुल्लित, है चहुँ ओर बहारइस मौसम का लुत्फ उठाने, इन्द्रधनुष सतरंगी,अम्बर … Read more