….बिके तो सपनों का रक्त बहा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ‘नीट’ परीक्षा के प्रश्न बिके तो  सपनों का रक्त बहा,मेहनत करने वाला छात्र भीतर ही भीतर चुप रहा।रातों जागे नयनों प्रतिफल जब सौदे  में बँट जाता-विश्वासों का टूटा दर्पण अभिभावक ने स्वयं सहा॥ कितनी आशाओं के दीप उत्तर-पुस्तक संग बुझते,सच्चे श्रम के कोमल पौध भ्रष्ट हवाओं में झुलसते।धन के आगे ज्ञान झुके तो शिक्षा शव बन जाती … Read more

तपती दुपहरी में

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ जेठ वैशाख का वह ‘प्रखर’ समय,जब ‘सूरज’ सिर के ऊपर आएचिलचिलाती ‘धूप’ में गर्म हवाएं भी लाए,तो लोग पूछते हैं,-कैसा लगता है इस तपती दुपहरी में…? तलाशता है मन ‘छाया’ व सुकून के वह पल,शीतलता की प्यास में ठंडा-सा जलतृप्ति के लिए इन ‘गर्म’ दिनों में भी निकलता तो हूँ … Read more

सोशल मीडिया और युवतियाँ

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सोशल मीडिया ने सबको कुछ ऐसा भरमाया है,कि लाइक और फोलोवर्स में सारा संसार सिमट आया है। मोबाइल के आकर्षण में खोया है आज का संसार,इसीलिए नष्ट होते जा रहे युवतियों के संस्कार। बन रही है रीलें,हो रहा अंग प्रदर्शन और बढ़ रहीअश्लीलता,तज रही है नारी अपनी गरिमा और नैतिकता। फोटोग्राफ … Read more

आम… हम बेकरार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** रहते हम बेक़रार,गरमी का इन्तज़ारआम होते बेशुमार,गरमी मनाइए। आम के है वहाँ बाग,हमारे हैं बड़े भागदादी-बाबा मेरे आप,वहाँ कभी आइए। सुबह से जाते बाग,आम खाते भाग-भागतोड़ते अपने हाथ,सुख नया पाइए। बाबा पकाते आम,रखते हैं उसे पाल।तीसरे दिन निकाल,स्वाद को बढ़ाइए॥

सबसे प्यारा परिवार

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** कितना अच्छा कितना प्यारा परिवार हमारा,सबसे प्यारा, सबसे अच्छा है परिवार न्यारा। इसमें तो बसता है, प्यारा संसार हमारा,सबसे प्यारा, सबसे दुलारा परिवार सहारा। सबसे छोटा होता है, सबका प्यारा दुलारा,सबकी आँखों का वो, तो होता है इक तारा। सबसे बड़ा होता, हर किसी की छत्र-छाया है,परिवार में रीढ़ की, वो हड्डी … Read more

सिर्फ कहने भर का साथ

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** भीड़ में खड़े लोग,अक्सर भरोसे की बातें करते हैंवे कहते हैं—“हम तुम्हारे साथ हैं।” लेकिन यह साथ,सिर्फ शब्दों की सतह पर ठहरा रहता हैजब जीवन की सड़क,अचानक पत्थरों से भर जाती है। जब भीतर का साहस,धीरे-धीरे टूटने लगता हैतब वही लोग,अपनी आँखें दूसरी ओर मोड़ लेते हैं। दु:ख के समय,सबसे अधिक सुनाई … Read more

प्रेम की पराकाष्ठा ‘राधा-कृष्ण’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राधा अन्तर्मन में दीप जलाकर श्याम सुधा बरसाती है,मुरली की मधुरिम तानों में नित प्राण-पुष्प महकाती हैवृन्दावन की रज में डूबा हर कण प्रेम-पुजारी बनता,कृष्ण नयन की चंचल छाया जग में नेह जगाती है। यमुना तट पर रास रचाकर मधुबन सुगीत सुनाता है,राधिका का अनुराग सलोना कान्हा हृदय लुभाता … Read more

हूँ माँ की लिखावट

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माँ एक छोटा-सा, प्यारा-सा अंश निराला,जिसमें समाया अनुपम ब्रह्मांड निरालामाँ को अपनी ममता-प्रेम लुटाने में नहीं होती थकावट,मैं माँ के लिए क्या लिखूँ, मैं हूँ माँ की लिखावट…। माँ भोली है, अद्भुत छवि वाली है,माँ की मूरत जैसे दूसरी कोई नहीं होने वाली हैसजल नयनों … Read more

करती उजाला पुस्तक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पुस्तक दीप-सी हर मन में उजाला करती है,ज्ञान का सूरज जीवन में सवेरा भरता हैपन्नों में छुपा है चतुर्युगों का गू़ढ़ अनुभव,पाठक का हर संशय पल में दूर करती है। हर किताब ज्ञान नया संसार खड़ा करती है,सूखी सोच में भी भावों पुण्य जल भरती हैशब्दों में रचा हुआ … Read more

करना नहीं पाखंड

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* असली बनकर ही रहो, करना नहीं पाखंड।वे ही पाखंडी बनें, जिनके संग घमंड॥ मत करना पाखंड तुम, वरना हो अवसान।विनत भाव धारण करो, होगा तब उत्थान॥ मूर्ख करे पाखंड नित, ऐंठ दिखाए ख़ूब।आने वाले काल में, वह जाएगा डूब॥ बनो संत सच्चे सदा, नहीं करो पाखंड।वरना गिरना जान लो, कोई नहीं … Read more