युद्ध का उन्माद
सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** क्यों युद्ध का उन्माद येप्रतिदिन ही बढ़ता जा रहा,क्यों हो रहा मानव पशु-संहार करता जा रहा। क्यों चाहता वर्चस्व अपनाबस मैं ही मेरा हो रहा,मानव गुणों को भूल कर-सब ध्यान अपना कर रहा। क्यों दूसरों को आगे बढ़तेदेख सकता वह नहीं,निर्बलों की जान जाती-क्यों शांति उसको प्रिय नहीं ? क्या है उसे … Read more