‘जल ही जीवन’, फिर भविष्य प्यासा क्यों ?
नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ‘जल ही जीवन’ है यही विश्वास मानव का,बूंद-बूंद का महत्व है आजीवन पानी का जैसे पानी बिना मछली नहीं,वैसे ही पानी बिना जीवन नहीं। चारों तरफ हाहा-कार मचा बिन पानी,बादल जब बरसें तो जग झूमने लगे खुशी-खुशी। नज़र आए चारों तरफ हरियाली ही हरियाली,प्यास बुझा कर नव जीवन प्रदान करती। जीवन … Read more