वो मीठी-मीठी बातें

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* आती हैं याद अक्सर,अब वो पुरानी बातें।वो मीठी-मीठी बातें, वो प्यारी मुलाकातें॥तुम मिली हो अँधेरे में रोशनी की तरह मुझे प्रिये।तुम मिली हो निशा में चाँदनी की तरह मुझे प्रिये॥आँखों में बस जाओ काजल की तरह आज प्रिये।दूर जाकर मत देना मुझे आज कोई भी दर्द प्रिये॥सुखे अधर हृदय बोझिल है, … Read more

रोटी का अपना मान

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ भूख में दो रोटीबहुत होती है,जब भी मिल जाएआत्मा ‘तृप्त’ कर देती है,रोटी का मोल जानो रे भाईइसे खाने दो हमको,चाय हो या दूध या फिर सब्जी, दालरोटी का अपना मान है। बचपन हो या बुढ़ापाचाय के साथ रोटी,चाहे ताजी हो या बासीरोटी का अपना मान है,भूख में तो सूखी … Read more

‘तीमारदारी’ मन का उपहार

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रोगी मन जब टूटता, जग छूटे हर आधार,सेवा का कोमल स्पर्श दे जीवन विस्तारममता की छाया चुपचाप नवशक्ति भर देती,सूने जीवन-निकुंज पर फिर खिलती नव बहार। रात-रात भर जागकर, रखते दवा का ध्यान,चेहरे पर धीरज धरकर, बाँटे मधुरिम मानकरुणा भरे दो बोल सदैव संबल बन जाते,तीमारदारी प्रेम सुधा बन … Read more

युद्ध:हर कोई अड़ा

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… अपने हित साधन में कोईतानाशाह जिद पर अड़ा है,जगह-जगह पर युद्ध छिड़ा हैयूक्रेन से रूस भिड़ा है,चार वर्ष से लगातारयूक्रेन रूस में युद्ध छिड़ा है,मैं क्यों युद्ध विराम करूँ ?इस जिद पर हर कोई अड़ा है। वह युद्ध अभी थमा नहीं किनये युद्ध कई शुरु हो गए,अफगानिस्तान … Read more

शांति की कामना

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** युद्ध और शांति-जरूरी क्या ? क्यों विनाशक शक्ति काउपयोग करता जा रहा,युद्ध का उन्माद यहप्रतिदिन ही बढ़ता जा रहा। क्यों ये उन्मादी कदमआगे बढ़ाता जा रहा,अपने हाथों ही प्रलय केबीज बोता जा रहा। विश्व जनमत को भी येअस्वीकार करता जा रहा,सभ्यता के नाम कासंहार करता जा रहा। प्राणी वहाँ भयभीतजलवायु प्रदूषित हो … Read more

बाजार में ईमान बेच रहा

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* पहले दिल की ज़ुबां को,बिन कहे नजरों से हीसमझ जाते थेप्रेम में ऐसी मौन प्रगाढ़ता होती थी। हर स्पर्श निष्कपट था,हर साँस में पवित्रता का,एहसास होता थामन से मन का जुड़ना,ऐसा रिश्ता होता था। कहाँ गए वो दिन,जब दिल ही मंदिर होता था ?जहाँ प्रेम की पूजा होती थी,और ईमान … Read more

दीप-सा जले

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प: २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २… कर्महीन भावहीन, नीति रीति से विहीन, कर्म जो करे मनुष्य, व्यर्थ जीव जानिए। नित्य ही करें सुकर्म, जीव का यही सुधर्म, दीप-सा जले सदैव, प्रीत रीत मानिए। सत्य का करें प्रकाश, छूट जाय झूठ … Read more

पर्यावरण की पुकार

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ वक़्त कैसा आ गया अब धरा पर,हवा भी डरने लगी अपनी ज़िंदगी सेधरती भी अब निराशा रहने लगी है,गगन में तारे भी आँसू बहाने लगे हैं। जो ना कर सके हमारी रक्षा,पर्यावरण की तो कहाँ कहींधरती पर चिड़ियों की चहचहाहट रहेंगी,किसी दिन सब खत्म हो जाएगी। हवा भी सिसकियाँ अब लेने लगी … Read more

परिवर्तन नियम

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** गर्मी, सर्दी और ये बारिशक्रम से सब परिवर्तन होते,नियम प्रकृति का सत्य यही है,जिस पर सब विधिवत चलते। परिवर्तन है सत्य यहाँ परकुछ तो रोज-रोज होता,इनके बीच झूलता जीवनअनुभव से अनुभव बढ़ता। बीते वर्ष सुहाने क्षण वोहृदय पटल पर एक-एक छाए,तोड़ पुराने बंधन सारेआगे को सब बढ़ते जाएँ। रखना सौम्य भाव सब … Read more

सेहत दौलत है बड़ी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** अच्छी सेहत है अगर, तो मिलता आनंद।ताक़त मिले शरीर को, सुस्ती सारी बंद॥ सेहत दौलत है बड़ी, रखना इसे सँभाल।लापरवाही जो करें, उनके संग बवाल॥ सेहत तो वरदान है, धारण कर संकल्प।नहीं बिगड़ने दो कभी, जीवन है अति अल्प॥ अच्छी सेहत तब बने, जब अच्छा आहार।योग और कसरत करो, तो जय-जय-जयकार॥ … Read more