धैर्य कभी खोना नहीं
ममता सिंहधनबाद (झारखंड)********************************* समय बीतता जाता है,परिवर्तन होता रहता हैआज ये कल बनता जाता है,औेर कल, कल होता रहता है। अपना, पराया बनता जाता है,पराया, अपना बनता रहता हैतू-तू, मैं-मैं और मैं-मैं, तू-तू,हर कोई करता रहता है। आज जो बनता जाता है,वो कल बिगड़ता जाता हैआज जो सदमा लगता है,कल आदत बनता जाता है। वक़्त-वक़्त … Read more