चेतना बिना ज़िंदगी अधूरी
संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** चेतना जागृत होती है,जब मन अचेतन होताज़िंदगी चेतना बिना अधूरी,बुद्धि ही चेतना की होती अधिकारीनहीं तो सड़कों पर घूमते अचेतन। चेतना के आँसू नहीं होते,चेतना आँखों से भी नहीं देखतीमन अधिष्ठान का अधिकारी जब बनता।रिश्ते बिखर जाते बिन चेतना के,चेतन मन ही ईश्वर को पूजता॥ परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ … Read more