दहेज की आग में जलती रहूँगी… बाबूजी!..
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बाबूजी! आँचल में सपनों की कलियाँ लायी थी,माँ की मधु लोरी सुन जीवन की ज्योति जगायी थीचन्द सिक्कों के लिए रिश्ते सौदा होते देखा,अब दहेज की आग में जलती रहूँगी बाबूजी!… मेहँदी वाले हाथों ने जब चौखट पहली चूमी थी,आशाओं की चिड़िया मन के आँगन तब झूमी थीलालच की काली आँधी डाली थी मुस्कान निगल,अब दहेज की आग में जलती रहूँगी बाबूजी!.. सासों के तीखे तानों ने श्वांसों को भी बाँटा,पति की चुप्पी … Read more