आ गई बारिश

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** बरसात का पानी, कागज की कश्ती,छपाछप करता पानी, बच्चों की मस्ती। बारिश की झमझम, बूंदों की छम-छम,बड़ी ही लुभावनी, बच्चों की सरगम। कागज की नाव बनाते, पानी में फिर बहाते,जो खुशी चेहरे पर आती, वो अब बनती देखते। पेड़ों पर लटकना, फिर पानी में छपकना,धमाचौकड़ी उनकी, बंदरों-सा फुदकना। बच्चों की शैतानी, याद … Read more

तुम्हें ढूंढती रहती हूँ

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)*************************************** चाँदनी रात में मैं तुम्हें ढूँढती रहती हूँ,नज़र से नज़र बचाकर अपनों से तेरे पास आने कोतड़पती हूँ, मचलती हूँ, मेरा दिल तरसता है,अपनी बाँहों में तुम्हें भर लेने कोमैं ढूँढती हूँ तुम्हें गलियों और राहों में,पर तुम तो बसे हो फलों की खुशबू में और बच्चों की मुस्कान में। कैसे … Read more

इनके जैसा कोई नहीं

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** धरती के भगवान…. है धरती के भगवान चिकित्सक,इनके जैसा कोई नहीं है सहायक। मरने वाले को ये जीवन जो है देते,उनके लिए तो बन जाते समर्थक। अपाहिजों के लिए सहारा बन जाते,बन जाते हैं वो इक नया पथ प्रदर्शक। बेसहारों का एक अच्छा चिकित्सक,नि:स्वार्थ भाव से बन जाते हैं पोषक। समाज में … Read more

कभी देर है न, उन्हें साथ ले लोे

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अभी देर है न, उन्हें साथ ले लो,गिरे जो पथिक हैं, उन्हें हाथ दे दोजो ठिठके हुए हैं अँधेरों की राहों,उन्हें प्यार का एक विश्वास दे दो। न धन से बड़ा है, न शोहरत का कद है,मनुष्यता ही सदा जीवन का पद हैजो भूखे हैं रोटी, जो प्यासे हैं ममता,उन्हें नेह का मधुर आकाश दे दो। किसी की उदासी … Read more

हक़ीक़त

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)***************************************** झूठ, कपट में खोये हैं,गलत राह के होये हैं। कैसे फूल खिलेंगे अब,जब काँटों को बोये हैं। जिनके पग अनीति पथ पर,वे इक दिन तो रोये हैं। जो दौलत के हैं पीछे,समझो वे तो सोये हैं। भले नहा लो गंगा में,तो भी पाप न धोये हैं। सता रहा जो दुखियों को,वह … Read more

मंजिल की तलाश

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** मंज़िलों की तरफ, बढ़ना है अब हमें,मुश्किलों से बहुत, लड़ना है अब हमें।कैसी भी हो परेशानी, कठिनाई अब-अपनी ज़िद पर शरद अड़ना है अब हमें॥ मंज़िलों की तरफ कूच करना ही है,हर सफलता को अब नित्य वरना ही है।हौसला सँग में होगा, तो हारूँ नहीं-बनके जलधार हमको तो बहना ही है॥ … Read more

राम-राम धुन मन में बसियो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राम-राम धुन मन में बसियो, मोरे जीवन नाथ तिहारो जी।दीन अनाथ जनन के स्वामी, भवसागर सो उबारो जी॥ मन-मंदिर में दीप जलाओ, प्रेम-सुधा रसधार बहे।माया-मोह के घोर तिमिर को, ज्ञान-किरन से निखारो जी॥ सीता-राम बसो उर भीतर, पावन हो हर श्वास प्रभो।करुणा-कृपा की छाँव बिछाकर, जीवन-बाग सँवारो जी॥ शबरी-जैसी सरल प्रतीक्षा, हनुमत-सा विश्वास मिले।भरत-सरीखा भाव समर्पण, चरणों  में स्वीकारो … Read more

बरखा रानी, खुशियों की रवानी

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)**************************************** कभी लगे बरखा रानी,कभी लगे बरखा बैरन। तप्त धरा पर जब बरखा बरसे,तब लगे बरखा रानीठंडी-ठंडी हवाएँ संग-संग लाए,हर मन में खुशियों की नई रवानी। मन में उमंगों की लहरें उठें,हर हृदय हर्ष से भर जाएधरती पर हरियाली छा जाए,मुरझाए पेड़-पौधे फिर मुस्काएँ। किसान प्रफुल्लित होकर,खेतों में हल-बैल चलाएँपेड़-पौधे, पशु-पक्षी सब,मगन … Read more

मेघा रे मेघा

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)**************************************** बुरो रिमझिम सावन में,सिक्कों के साथ झम-झम बजरो रे। चारों ओर की तस्वीरें घटी काली-काली हैं,मन के बंजर सरकार को भी सींचोभीगी-भीगी सुगंध, मधुर हवाएँ लेकर आएँ,मेरा मन ख़ुशी से लहराए बारम्बार। मेरा सूना-सूना आँगन,मुर्गे और खिलखिलाएवंदे-ठंडी मस्त हवाएँमन को हिलाएँ। बातें-बातें याद आ ही जाती हैं,जो मन को बहलावे।घर का … Read more

पिता की जान

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* पिता के लिए बेटा और बेटी दोनों ही उनके जान होते हैं, बेटी उसकी मुस्कान होती है बेटा भविष्य का अरमान होता है। बेटी की किलकारियों से घर गूंजेबेटे के कंधे पर गर्व से सीना तने,एक के आँचल में बचपन बसता है दूसरे की मेहनत में बुढ़ापा पलता है। बेटी है तो घर में … Read more