प्लास्टिक मुक्त भारत सपना या हकीकत!

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* प्लास्टिक मुक्त भारत सपना या हकीकत ?आज जन-जन की समस्या है प्लास्टिक का उपयोग,आज भारत में चारों ओर बस प्लास्टिक का ही समाज है। हर जगह इसका उपयोग होता, फिर तुरंत फेंक देते,प्रत्येक मनुष्य इसको अपनाता, मनमाने ढंग से फेंक देताप्लास्टिक की थैलियाँ हर जगह बिखरी पड़ी मिलेंगी,इसका पानी पीने से … Read more

सफ़र में..

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ मैं यूँ ही चल रहा था सफ़र में,रास्तों पर हर एक ‘रंग’ देख रहा थाजीवन की गाड़ी को ‘पटरी” पर लाने,मैं चल रहा था सफर में…। कभी पटरी पर, कभी रास्तों पर,मैं निकल रहा था ‘मंजिल’ की तलाश मेंक्योंकि चलना ही ‘ज़िन्दगी’ होती है,इसलिए मैं चल रहा था सफ़र में…। … Read more

प्रेम शायद ऐसा ही होता

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** किसी के जीवन मेंशोर की तरह नहीं,धीरे-धीरे उतरती हुई शाम की तरह आना। बिना कहे समझ लेनाकि सामने वाला थका हुआ है,और उसके पास बैठ जानाबिना किसी सलाह, बिना किसी प्रश्न के। प्रेम बड़े वादों में नहीं रहता,वह छिपा होता हैचाय के उस आख़िरी घूँट में-जो कोई आपके लिए बचाकर रख देता … Read more

चलो हरि की शरण

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** चलो हरि की शरण, छू लें हरि के चरणशुद्ध हो अंतःकरण, वस्त्र नूतन हो वरण।  करें गीता ग्रंथ का स्मरण,पाएँ वेद पांच का विवरणकरें पुरखों का भी अनुसरण, जाने कब हो जाएगा मरण ?  चित्त शुद्ध, स्वच्छ आचरण, हो भक्ति-भाव वातावरणआसक्ति का करें संवरण, मद्द्य पान का हो उद्धरण। न कर सके कोई अपहरण,हरि महिमा … Read more

युद्ध सदा विनाशकारी

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** युद्ध विनाशकारी होता है,युद्ध का अंत संहारी होता है। युद्ध तो केवल युद्ध होता है,यह तो नहीं शुद्ध होता है। शांत व्यक्ति तो प्रबुद्ध होता है,अशांत व्यक्ति अप्रबुद्ध होता है। यह अंदर और बाहर दोनों होता है,एक युद्ध हमारे अंतर्मन में होता है। दूसरा युद्ध भी बर्हियुदध होता है,इसमें अनाड़ी भी शिकारी … Read more

लोक क्रांति का अग्रदूत

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** लोक क्रांति का दूत अग्र है, श्रमिक है जिसका नाम,मेहनत करता सारे दिन वह नहीं करे आराममूढ़, अशिक्षित और उपेक्षित कहते उसको लोग,भूख-प्यास से पीड़ित वह तो क्या जाने सुख भोग। आग उगलता तपता सूरज गरम हवा का ज़ोर,कर्मक्षेत्र में व्यस्त नहीं है किसी से वह कमजोरचाहे ओला, पाला हो या झमझम … Read more

देशभक्त थे कॉमरेड ए.के. राय

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** कामगारों के मसीहा थे कॉमरेड ए.के. राय,रासायनिक अभियंता थे कॉमरेड ए.के. रायसिंदरी के जनप्रिय विधायक थे ए.के. राय, धनबाद के लोकप्रिय सांसद थे ए.के. रायजन-जन को समर्पित नेता थे ए.के. राय। विनम्र, मृदुभाषी, सरल-सहज थे ए.के. राय, शख्स व शख्सियत में अव्वल थे ए.के. रायसादगी प्रतिमूर्ति, सर्वहारा के तारा थे राय, मार्क्स, … Read more

लकीरें हाथ की

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** लकीरें हाथ की अपनेये मानव खुद सजाता है,ये दोनों हाथ की ताक़तसफल जीवन बनाता है। लिखा है जो लकीरों मेंभाग्य में जो समाया है,उसी के हाथ में सब हैकहानी ख़ुद रचाता है। अपनी शक्ति के बल सेहिमालय पर पहुँचता है,बनाता रेत में गुलशननहीं फ़रियाद करता है। छोड़ पढ़ना भाग्य में लिखी,हाथ की … Read more

स्वार्थी होती ज़िन्दगी

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* स्वार्थी होती जा रही है आज सभी की ज़िन्दगी,माता-पिता साथ नहीं रहते, फिर भी प्रेम की कमीअकेले-अकेले रह रहे हैं लोग सभी,फिर भी रिश्तों की डोर टूटती जा रही है कहीं। हाय-हाय में डूबा है हर इंसान,स्वार्थ के पीछे भाग रहा है सारा जहानकमाते बहुत हैं, फिर भी संतोष नहीं,असंतोष बढ़ता … Read more

आया पुरुषोत्तम मास

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आया पुरुषोत्तम मास, पुण्य की पावन बेला,भक्ति-भाव से भर उठता जन-जन का हर मेलानाम-स्मरण, सत्कर्मों से जीवन होता उज्ज्वल,हरि-कृपा बरसाती धरती, अम्बर व अलबेला। दान, धर्म, जप, तप से मन का नित कल्मष धुलता,सद्विचार का दीपक अंतर्मन में है जलतालोभ, मोह, अहंकार सभी चरणों में झुक जाते,पुरुषोत्तम की महिमा से भाग्य नया फिर फलता। गीता, … Read more