हम तो नए परिंदे
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)***************************************** जान लें आप कि हम तो साहित्य के नये परिंदे हैं,मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं। काव्य के प्रति अनुराग हमारा, अंतर्मन में हर्ष लिएलेखन के प्रति नवल चेतना, हर पल ही संघर्ष लिएभले नये पर करें साधना, हमने लिखना जाना है,अनुशासन में रहते हैं … Read more