मध्यरात्रि का सूरज
संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* जहाँ अंधकार ने दरवाज़े पर,जंजीरें डाल रखी थींवहीं आपका जन्म हुआ,आपने पूछा कि कुछ लोगों कोज़मीन पर क्यों रेंगना पड़ता है ?किताबों को कवच और,कानून को प्रकाश मानकरअंतहीन रात में आपने रास्ता बनाया। उन्होंने आपकी जाति को तौला,आपकी योग्यता या बुद्धि को नहींलेकिन आप इतने ऊँचे खड़े रहे कि,कोई चाहकर आप … Read more