पापा, लौट आओ ना…

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ***************************************** पापा फिर से लौट आओ ना,अपने में मुझे फिर समेट लो नादुनिया की भीड़ में खो गया हूँ मैं, आपके बिना पापा हताश हो गया हूँ मैं।  आपकी फटकार में छिपा था प्यार,आपके वचनों में समाया था संसारआपके जाने के बाद संसार सूना है,हर खुशी अब अधूरी आपके बिना है। बहुत … Read more

नफ़रत की दीवार

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* नफ़रत की दीवार से, गिरा प्रेम का गेह।मन की कटुता छोड़कर, बरसाओ बस नेह॥ नफ़रत की दीवार अब मत रखन  परिवार।मिल-जुलकर सुख बाँटिए, प्रेम  रहे आधार॥ नफ़रत की दीवार जब, बढ़ती बारम्बार।क्षमा-दीपिका फिर जलें, मन का मिटे विकार॥ नफ़रत की दीवार को, प्रेम करे बेकार।मीठी वाणी से सदा, जीतो सबका प्यार॥ नफ़रत की दीवार बिन, जागे नव संसार।मानवता के फूल से, महके खुशी बयार॥ नफ़रत की दीवार से, टूटे सारे … Read more

सावन की रिमझिम रातें

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सावन की रिमझिम रातें, मन में    रस घोल रही हैं,भीगी-भीगी चाँदनी, चुपके से कुछ बोल रही हैं। बादल की ओट में चंदा, जैसे लजाकर मुस्काए,पुरवाई की उँगली थामे, मन के तार झंकृत हो जाए। नीम तले टप-टप बूँदें, मधुरिम    गीत सुनाती हैं,सूनी पड़ी हुई गलियों में, स्मृतियाँ  लौट आती हैं। भीगी मिट्टी की खुशबू, साँसों में    उतर रही है,मन की सूनी चौखट पर, कोई    आस सँवर रही है। … Read more

विदेशों में भी धूम

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)******************************** हम सब हिन्दुस्तानी है, भाषा हमारी हिन्दी है,हम सब स्वाभिमानी हैं, शान हमारी हिन्दी है। हम सभी सदा एक हों, आन हमारी हिन्दी है,गौरव हमारी हिन्दी है, जान हम सबकी हिन्दी है। इसका प्रसार बढ़ाना है, लोगों को समझाना है,हिंदी में ही बात करें हम, हिन्दी को अपनाना है। चाहे घर हो … Read more

कलम की शक्ति

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************** जिसने आँसू को स्वर देकरपीड़ा को पहचान लिया,जिसने मौन खड़े लोगों कोबोलने का अधिकार दिया। गुमसुम घने अँधेरे पल कोजिसमें नवल प्रकाश दिया,सत्य मार्ग को पोषित करताजिसने सच्चा ज्ञान दिया। अन्याय हो रहे अंधी रातों कोजागृत पहरेदार दिया,जिसने रणभेरी बजते हीयोद्धा को तुरत जगा दिया। कलम उठे तो सत्य लिखे,कलम उठे तो … Read more

दान से भवसागर पार

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)****************************************** छपा के नहीं,छुपाकर कीजिए अपना दान। इस पृथ्वी का,सबसे बड़ा दानी कर्ण महान। कीजिए दान,ज़िन्दगी संवारिये सुख पाइये। दान जरूरी,अपने लाभांश का दस पर्सेन्ट। कीजिये दान,अक्षम व्यक्तियों को पुण्य मिलेगा। नहीं है कुछ,दान से बढ़कर इस जहां में। दान के बाद,फल की इच्छा व्यर्थ यही है अर्थ। खुश रहेंगे,कीजिए गुप्त दान बनें महान। तर जायेगी,आपकी सात पीढ़ियाँगुप्त … Read more

ऐसा था गुरु-शिष्य सम्बन्ध

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)******************************* मेरे भाग्य विधाता (शिक्षक दिवस विशेष )… पांच सितम्बर का दिन दिन है आज महान,आज मिलता है देश मेंगुरूओं को सम्मान। जो गुरु होते,सच्चे अर्थों मेंवे होते हैं महान,उनके बल से बनते हैं सब बच्चे महान। देश के कर्णधारों को,मांज-मांज कर कुन्दन-साचमकाते हैंजिससे बनते हैं वे बच्चे एक दिन महान सच्चे। एक से एक … Read more

मेरे भाग्य विधाता शिक्षक

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************* मेरे भाग्य विधाता… (शिक्षक दिवस विशेष)… हमें अपने हाथों से लिखना सिखाते हैं,शब्दों की ‘पहचान’ बताते हैंविद्या के सागर को समझते हैं,शिक्षक ही है जो हमें ‘संवारते’ हैं तभी तो वह ‘भाग्य विधाता’ कहलाते हैं। शिक्षा की ‘ज्योति’ के इस प्रकाश को,हम ‘नादान’ बच्चों तक पहुंचाते हैंज्ञान के दीप को जलाते … Read more

मेरे हर गुरु को नमन

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* मेरे भाग्य विधाता… (शिक्षक दिवस विशेष)… गुरु नहीं, तुम दीपक हो,अंधेरों में जो राह दिखाते होहाथ में चॉक नहीं, भविष्य है,जिससे तुम किस्मत बनाते हो। तुमने कहा – डरना नहीं है,तुमने कहा – झुकना नहीं हैहर सवाल का जबाब,किताब में नहीं, यह बात तुमने ही तो सिखाई है। आज जो कुछ भी हूँ … Read more

सदगुरु ने राह दिखाई

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** मेरे भाग्य विधाता (शिक्षक दिवस विशेष )… मोह-माया के जाल में घिरी,झूठे जग को लेकर दौड़ीअंधकार में जकड़ी घिरी,सतगुरु जी, ने मुझे राह दिखाई। धन-दौलत के लोभ में फिरती,चारों पहर माया में जकड़ीअपने मन को चंचल करती,दिन-दिन सतगुरु ‘जरा’ में जकड़ी। मेरी नैया भंवर में डोली,मैं तो मुख से सदगुरु … Read more