आओ मिलकर दीप जलाएँ
डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* सूरज ने चाहे मुख मोड़ा हो, या अंधेरों ने अब घेरा होविषम पलों में हम जल जाएँ,आओ मिलकर दीप जलाएँ। मन की गाँठें अब तो खुल जाए,सुख के सब सपने चलकर आएजीवन का अवलंबन बन जाएँ,आओ मिलकर दीप जलाएँ। मधुर पलों ने करवट ले ली,घिरकर आई है काली बदलीजीवन की … Read more