दहेज की आग में जलती रहूँगी… बाबूजी!..

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बाबूजी! आँचल में सपनों की कलियाँ लायी थी,माँ की मधु लोरी सुन जीवन की ज्योति जगायी थीचन्द सिक्कों के लिए रिश्ते सौदा होते देखा,अब दहेज की आग में जलती रहूँगी बाबूजी!… मेहँदी वाले हाथों ने जब चौखट पहली चूमी थी,आशाओं की चिड़िया मन के आँगन तब झूमी थीलालच की काली आँधी डाली थी मुस्कान निगल,अब दहेज की आग में जलती     रहूँगी बाबूजी!.. सासों के तीखे तानों ने श्वांसों को  भी बाँटा,पति की चुप्पी … Read more

जहाँ क़दर न हो

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** मेरे बारे में कोई क्या कहता है,इसकी चिंता छोड़, दी है मैंनेज़िंदगी दूसरे की शर्तों पर,जीना छोड़, दी है मैंने। सफ़ाई देने की आदत,अब तो छोड़, दी है मैंनेजहाँ मिलती हैं खुशियाँ,उधर राह मोड़, दी है मैंने। जो कपटी दिल के हैं,उनको छोड़ दिया मैंनेजहाँ दिल को सुकून मिले,वहाँ कड़ी जोड़, … Read more

संयमित भोजन औषधि

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भोजन यदि संयमित हो, जीवन     का वरदान बने,तन-मन की हर तक़लीफ का सहज समाधान बने।दवा खोजती फिरती है जिस रोगी  के द्वार पर-सात्विक आहार ही उसकी प्रथम  पहचान बने॥ अन्न नहीं केवल दाने, प्रकृति    अमृत प्याला है,हर कण में स्वास्थ्य, शक्ति का अनुपम उजियाला है।जितना चाहिए उतना ही थाली में मान करो-अतिभोजन रोगों का खुला हुआ शिविरशाला है॥ ताज़े फलों, साग-सब्जियाँ औषधि का भंडार हैं,इनसे ही प्रसन्नचित्त ज़िंदगी के   आधार … Read more

वीर हमारे

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** वीर हमारे बड़े साहसीराणा प्रताप का क्या कहना,देश के सच्चे थे रखवालेमेवाड़ शान का क्या कहना। थी भाले की क्या ग़ज़ब बातभयभीत मुग़ल थे क्या कहना,चेतक पर होते वे सवारउस भुज विशाल का क्या कहना। अकबर की सेना रही काँपभाला प्रहार का क्या कहना,हार कभी नहीं थी स्वीकारउस धैर्यवान का क्या कहना। … Read more

नशे में गिरफ्त आज का युवा

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* आज का देख युवाओं का सच वक्त भी रोया है,आज का युवा पूरी तरह नशे की गिरफ्त में खोया है। कहीं तम्बाकू है, सिगरेट है, और कहीं पर शराब है,उससे भी कहीं बढकर हेरोइन का नशा खराब है। नशे की गोलियों का कहीं पर घेरे हुए जंजाल है,तो कहीं पर इंजेक्शन, … Read more

कैसी है विडम्बना ?

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कैसी है विडम्बना ?स्त्रीत्व की यह अवहेलना,निर्णय स्वयं वह कर नहीं पातीक्योंकि समाज की है वर्जना। अविवाहिता की कामनाअति उद्विग्न नहीं मानना,समाज में हो जाएगा मुश्किलउस छोटी-सी जान का जीना। कलेजे का टुकड़ाकिसी के द्वारा जाएगा पकड़ा,मिलेगी सम्मान की ज़िंदगीअसहाय न रह जाएगा खड़ा। निर्णय यही लेना,इसको नदी में बहा देना।ईश्वर ही … Read more

संतोष ही सुख

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* जहाँ में कोई नहीं है खुश,  सर्वत्र दु:ख का माहौल हैकोई है धन के लिए दुखी,  तो कोई मन में लिए दुखी। अमीरों के संग धन अपार,  पर शान्ति, नींद नहीं आधारगरीबी में है बहुत ही अभाव,  धूमिल सुख-शान्ति का प्रभाव।   किसानों को है सूखे का डर,  जवान खोजता सुरक्षित डगरनेता के सिर पर सत्ता … Read more

दीए से बाती कह रही…

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** दीए से बाती कह रही श्री बालाजी का राज है,शंख घंटी बता रही जैसे यही तो सरगमों का राज हैभक्त द्धारा श्री बागेश्वर धाम आरती करने का रिवाज है,सजी है रंगोली द्धार पर स्वागत के लिए सजाई आज है। आकाश में लगते चाँद-सितारों से धाम के दीए खास है,दीयों का जमीं पर जलने … Read more

महंगाई की मार, आम आदमी बेजार

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* महंगाई की मार, मार गई,परेशान हो गया आम आदमीअब कैसे चले यह जीवन की गाड़ी,आसमान छू रही सभी चीजों की कीमत भी। आम आदमी की पहुँच से, दूर-दूर काफी,कैसे करें सामना महंगाई से भीकैसे पार करें हम जीवन की नैया अपनी,नहीं कुछ भी बचत, आय-व्यय में असमानता बढ़ी। इससे जीना भी … Read more

राधा-कृष्ण की अलौकिक प्रेम-लीला

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राधा के दृग में प्रेम-ज्योति, श्याम अधर मुरली प्यारी,कुंज-निकुंज महके जैसे खिल उठी हो फुलवारी।हिय निकुंज प्रेम वह जिसमें स्वार्थ कहीं भी न ठहरे,जिसकी शक्ति से हार गई जग की हर अंधियारीf॥ श्याम-संग राधा खड़ी साहस की अमर कहानी,प्रेम जहाँ सम्मान सुरक्षित, पूजित होती नारी।अन्यायों के सिंहासनों को प्रेम सदा झुकवाता,करुणा, सत्य, समत्वबोध से होती  विजयज्ञ हमारी॥ मुरली मधुरा तान सुनाकर मोहन जग समझाते,राधा बनकर प्रेम-समर्पण के नव … Read more