युद्ध का उन्माद

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** क्यों युद्ध का उन्माद येप्रतिदिन ही बढ़ता जा रहा,क्यों हो रहा मानव पशु-संहार करता जा रहा। क्यों चाहता वर्चस्व अपनाबस मैं ही मेरा हो रहा,मानव गुणों को भूल कर-सब ध्यान अपना कर रहा। क्यों दूसरों को आगे बढ़तेदेख सकता वह नहीं,निर्बलों की जान जाती-क्यों शांति उसको प्रिय नहीं ? क्या है उसे … Read more

न्याय दर्शन के प्रणेता गौतम

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** गौतम ऋषि दिवस (१९ मार्च) विशेष… १९ मार्च को मनाते हैं गौतम ऋषि दिवस,होती हैं धार्मिक झांकियाँ और दीपोत्सव। ब्राम्हण ऋषि दीर्घ तमस के पुत्र थे गौतम,न्याय दर्शन के प्रणेता सप्त ऋषियों में गौतम। ऋषि गौतम ने रचना की ग्रंथ न्याय दर्शन,ये तत्व ज्ञान का होता है जो इक साधन। देवी अहिल्याबाई … Read more

मधुर शुभ रात्रि

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* कभी-कभी मुझे ख्याल आता है,कि करती रहूं तुमसे बातें अभीसुनाती रहूं दास्तां नई पुरानी,बुनती रहूं शब्दों के जाल रुहानी। शायद तुम भी कुछ सुनाओ,किस्से कही-अनकहीमैं सुनती रहूं मुग्ध-सी,बिन सोचें-क्या है गलत और सही। यूँ ही चलती रहे हमारी,रातभर बातों की खुमारीतुम्हें नींद सताए तो मैं क्यों,रातभर तुम्हें लफ्ज़ों से बैचेन करूँ … Read more

लूट रहे प्रबंधन संग ठेकेदार

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं, देखो यह संसार,एम.टेक. डिग्री लिए भी हैं युवक लाचारपाँच हजार के वेतन पर नौकरी को तैयार,सरकारी आदेश का हो रहा है बंटाधार। सरकारी नौकरी अब कहाँ ? ठेके की बहार,ठेकदारी में काम को अब तरस रहे हैं यारउद्योगों को ही बेच रही राज्य की सरकार,कोयला, स्टील … Read more

प्यारी तितली रानी

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** बड़ी ही प्यारी लगती है रानी तितली,उड़ती-फिरती, करे मनमानी तितली। लाल, गुलाबी, पीले पंख की सुंदर तितली,कहीं ना रूकती, रंग-बिरंगी तितली। फूलों पर है हरदम मंडराती तितली,कभी यहाँ-कभी वहाँ जाती तितली। फूलों का मीठा रस पी जाती तितली,बागों में सुंदरता फैलाती तितली। छोटे-छोटे पंख हिलाती तितली,सबके मन को खूब लुभाए तितली। … Read more

चंद उदासियाँ

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ज़िन्दगी में उदासियाँ आती ही रहती हैं,कभी किसी से मतभेद भी होते हैंमन में उदासी हो ही जाती है,मन बेचैन होकर उदासी में खो जाता है। अब हर समय यही उदासी दिल पर छाई रहती है,किसी भी काम को करने की इच्छा नहीं होतीदुश्वार हो जाता है समय काटना भी,मन की … Read more

नारी शक्ति, शिवा स्वरूपा

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…. नारी सृष्टि का संचार, नारी सृष्टि का आधारनारी सब रिश्तों का भण्डार, नारी बिन सूना संसारनारी जननी नारी धरणी, नारी से सब शोभायमान,नारी मूर्त प्रेम व्यवहार, नारी धरती का श्रृंगार। नारी करूणा नारी अपर्णा, नारी धूप, ठंडी छाँव,नारी माँ नारी भगिनी, नारी कोमल, घाव सहलावसहचरी … Read more

संवेदनाओं का टूटता घरौंदा…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ अब जीवन का हर एक पल ‘मुश्किलों’ से भरा हुआ है,रिश्तों में ‘दूरियाँ’ बढ़ती जा रही है,कोई किसी का नहीं होता, इस जहान में,तभी तो सामने आ ही जाता है संवेदनाओं का टूटता घरौंदा..। आज ‘भावात्मक’ अभिव्यक्ति शून्य ही हो गई है,कोई किसी का नहीं;मतलबी लोग ‘ज्यादा’ नजर आते हैंआपसी … Read more

हमें दूर कर न पाए कोई

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई,मेरे दिल में तुम बसे हो और नहीं कोई। साँवली-सी सूरत मनभावनी-सी मूरत,उस पर हँसी तेरी दिल को लुभाए कोई। जबसे तुम मिले हो जान ही न बच पायी,तन तो मेरे पास है, मन ले गया है कोई। वो तो इक छलिया है, छल ही कर … Read more

मानसिक जकड़-बंदी

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मेरे मित्र के मन की रंगभूमि परमानसिक जकड़-बंदी है,यह समाज का पहरा भी नहीं,फिर भी न जाने कैसे बंदी है। अपने विचारों को जाहिर करनाएक द्वंद्व-युद्ध के समान है,यह एक ऐसा अँधेरा फैलाता है-जहाँ अच्छी विचारधारा का प्रवाह भी बंद है। मानसिक जकड़-बंदी से ऊपर उठकरआगे बढ़ना हर मानव चाहता है,लेकिन … Read more