आओ मिलकर दीप जलाएँ

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* सूरज ने चाहे मुख मोड़ा हो, या अंधेरों ने अब घेरा होविषम पलों में हम जल जाएँ,आओ मिलकर दीप जलाएँ। मन की गाँठें अब तो खुल जाए,सुख के सब सपने चलकर आएजीवन का अवलंबन बन जाएँ,आओ मिलकर दीप जलाएँ। मधुर पलों ने करवट ले ली,घिरकर आई है काली बदलीजीवन की … Read more

मेघ गगन पर छाने लगे

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* घिर-घिर मेघ गगन पर छाने लगे,सूखे वन-उपवन मुस्काने लगे।हर बूँद नवजीवन का वरदान-प्यासे निर्झर कल-कल गाने लगे॥ रिमझिम फुहार भू पर आने लगी,माटी सौंधी खुशबू लाने लगी।प्रकृति सदा संतुलन की है साधक-सूनी डाली कोपल पाने लगी॥ मोर पंख नभ ओर उठाने लगे,मधुर पपीहे स्वर भी गाने लगे।सावन पावस प्रीत मन का उत्सव-सारे पथ मुस्कानें बिछाने लगे॥ खेतों में अरमान उगाने लगे,श्रम के बीज सुनहरे फलने लगे।यत्न से ही खिलता जीवन-किसान हृदय सपने सजाने लगे॥ परिचय-डॉ.राम कुमार झा का साहित्यिक उपनाम ‘निकुंज’ … Read more

निराकरण तो करना है

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )********************************** ‘नीट’ विवाद-आंदोलन… देशभर में सड़कों पर छात्र कर रहे अपने अधिकारों की बात,ऐसे में चुप नहीं बैठ सकते हो सरकारआप उनके ‘भविष्य’ के हो तारणहार,उनकी परेशानी का आपको करना है निराकरण…। कुछ गलती अगर हुई है, तो उसे ठीक किया जा सकता है,सुधार हेतु ‘प्रयास’ जरूरी है, प्रबंधन के प्रबंध … Read more

क्यों न आए श्याम…?

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)************************************ मैं हेरी-हेरी देखूँ,अब तक क्यों न आए श्यामतुम कहाँ रह गए मेरे,सुन लो मेरी पुकार श्याम। मैं तुम्हें पुकारूँ,ले-लेकर तेरा नामहर पल रो-रोकर,गला मेरा रुंध गयारात भी अब ढल चली,मन के दीपक जला-जला करतेरी राह निहारूँ,मैं हेरी-हेरी देखूँअब तक क्यों न आए श्याम…? कैसे तुझे ढूँढूं,इस संसार की भीड़ में ?तेरे … Read more

प्रकृति एक अनसुलझी पहेली

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)**************************************** प्रकृति एक अनसुलझी पहेली है,यह एक सुलझी हुई सहेली भी हैप्रकृति में उगते है सूरज तारे-चंदा,जिससे बनते दिन और रात का धंधा। प्रकृति में मिट्टी है जिसमें बोते हैं बीज,वही बीज बड़ा होकर बन जाता है पौधाप्रकृति का अपना भाई एक हिसाब होता है,भूल से भी इसमें नहीं है कोई सौदा। इस … Read more

हम तो नए परिंदे

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)***************************************** जान लें आप कि हम तो साहित्य के नये परिंदे हैं,मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं। काव्य के प्रति अनुराग हमारा, अंतर्मन में हर्ष लिएलेखन के प्रति नवल चेतना, हर पल ही संघर्ष लिएभले नये पर करें साधना, हमने लिखना जाना है,अनुशासन में रहते हैं … Read more

अनकहे अहसास

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आँखों से जो कह न पाया, मन ने उसे सँभाल लिया,मौन अधरों ने हर धड़कन का      संदेश उछाल दिया,कुछ संबंध शब्दों से नहीं, विश्वास से जीवित रहते हैं,अनकहे हर एक अहसास ने जीवन को निहाल किया। बिन बोले जो साथ निभाए, वही सच्चा अपनापन है,दु:ख की धूप में छाँव … Read more

प्रेम सिखाता चाँद

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** आसमान से नित्य ही, प्रेम जताता चाँद।साजन-सजनी को सदा, प्रेम सिखाता चाँद। आस-निराश को संग ले, मनभावन है ख़ूब,देर रात तक प्रेम को, रोज़ जगाता चाँद। अंधकार में हर किरण, बनती है उजियार,संघर्षों से जीत है, हमें बताता चाँद। प्रियवर यदि हो दूर तो, तन्हाई का गीत,प्रेम-हृदय को हर समय, बहुत … Read more

मन का सुकून

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* सुकून कोई जगह नहीं एक अहसास है,जो मेरे लिए कदम-कदम पर खास है। हरेक इंसान को बस शोहरत की चाह है,दुनिया में हर शख्स यहाँ दौलत का दास है। अब तो मैंने खुद ही खुद से सुलह कर ली,जीवन का हर लम्हा लगता मधुमास है। सुकून वह नहीं, जो … Read more

दुआएँ माँ की

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)************************************* ऐ मेरे बच्चे,मरकर भी दूँगी तुमको दुआएँजिस पल तुम मुझे याद करोगे,मैं साया बनकर साथ रहूँगी। अचानक जब जिह्वा पर,आएगा मेरा नाममैं साया बनकर साथ रहूँगी,तेरे संकल्प बनकर आ जाऊँगी। घनघोर अँधेरा हो,या घनघोर निराशाजब सूझे न कोई राह,मैं आशा बनकर आ जाऊँगी। उस पल जब तुम याद करोगे,मैं साया बनकर … Read more