रखिए स्नेह को सुधामय
डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* कहाँ गया रिश्तों में प्रेम…?… बड़े प्रेम से रिश्ते थे, गहन भाव मन साथ।मात पिता आशीष का, त्याग क्षमा सब हाथ॥ भरा हुआ घर स्वर्ग-सा, सदा रहे जगदीश।पले बढ़े बाल-बालिका, मिले उन्हें आशीष॥ आस-पास के पड़ोसी, बुआ, बहन थे सभी।कभी चाची जी मासी, भाई-बंधु सब तभी॥ बड़ी अमीरी स्नेह की, … Read more