गीतिका

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हिन्दी लिए हर ज्ञान

डॉ.सरला सिंह`स्निग्धा`दिल्ली************************************** कहें सबसे सुगम हिन्दी सभी को देख भाती है।सदा तुलसी महादेवी सरिस का मान पाती है॥ युगों से देख हिन्दी ही रही साहित्य की भाषा।कभी कविता, कहानी बन […]

देव तुम संसार के

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)***************************************** विघ्नहर्ता गजानंद विशेष….. विघ्नहर्ता श्री गणेशा, देव तुम संसार के।लाज तेरे हाथ में अब, दीन हम लाचार के॥ प्रार्थना स्वीकार करना, हे गजानन दास हम।भक्ति […]

नशा

डॉ.सरला सिंह`स्निग्धा`दिल्ली************************************** भार यह सारे मनुज को ही उठाना चाहिए।हाथ भी अब तो नशे पर ना लगाना चाहिए॥ यह बुरी, कहते सभी हैं लोग दुनिया में बड़े।तोड़ती घर भी यही, […]

भुगत रहा इंसान

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** आज विपद्रव का कहर, भुगत रहा इंसान।देख रहा भगवान है, मत कर तू अभिमान॥ छेड़छाड़ तू प्रकृति से, करता बारंबार।देख रहा तू आज है, अपना यह […]

माँ सरस्वती की वंदना

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** गीत की माला अधर पर, हाथ में माँ फूल है,गा रहा हूँ गीत तेरे, हृदय में पर शूल हैबस करूँ सेवा तुम्हारी, ये हमें वरदान […]

रिश्तों को मत तोड़ो

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** अपने छोटे से जीवन में क्या खोया क्या पाया हमने,नहीं किया गर अच्छा कुछ भी जीवन व्यर्थ गँवाया हमने। टूट रहे संबंध सभी भाई भाई को […]

हे जगदंबा

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** नवरात्रि विशेष…. रचनाशिल्प:२६ मात्राएं-१४,१२ पर यति,अंत में लघु गुरुकालरात्रि महागौरी, सिद्धिदात्री अंबिका।जगत माता जगत धात्री, दुर्गा जगदंबिका।जगत जननी दुष्टदलनी, मधुकैटभ हारिणी।विश्वेश्वरी माँ भवानी, महिषासुरमर्दिनी॥ रक्तबीज विदारिणी […]

शुर्पणखा प्रसंग

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** कौन ये बैठा शिला पर,रातभर है जागता,देखता है शून्य में वो,चाँद-तारे ताकता।हाथ में लेकर धनुष वो,लग रहा है वीर-सा,भाव मुखड़े पर लिए यूँ,संत कोई धीर-सा॥ […]

लक्ष्मण शक्ति प्रसंग

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** मेघ सा वो नाद करके, हँस पड़ा था जोर से,तू बचेगा अब कहाँ से,भाग जा रण छोड़ केदर्प से सीना फुलाकर, बुदबुदाने वो लगा,बाण अपना […]

दीप्त दीपिका हो तुम…

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** जैसे रितिका हो तुम,प्यारी प्रीतिका हो तुम…। गहन बासंतिक कोई,जैसे वीथिका हो तुम…। मंदिर मध्यम जलती,दीप्त दीपिका हो तुम…। हर्षाती मृदु मधुरस्वर गीतिका हो तुम…। कोमल तरल […]