मुक्तक

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उद्यम से ही जीवन

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* उद्यम करते जो मनुज, होते कारज सिद्ध।कर्महीन नर का हृदय, होता हर क्षण विद्ध॥होता हर क्षण विद्ध, कभी भी सफल न होता।रहता पौरुषहीन, समय को यूँ […]

मैं प्यासा हूँ

दिनेश चन्द्र प्रसाद ‘दीनेश’कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)******************************************* मैं प्यासा हूँ पर पानी नहीं है,मैं भूखा हूँ पर खाना नहीं है।फूल बहुत हैं बाग में खिलते-पर किसी में भी खुशबू नहीं है॥ […]

बदल कर देखो

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* सलीक़े से थोड़ा संभल कर तो देखो,कभी रूप अपना बदल कर तो देखो।नहीं मिल रही है अगर कामयाबी-तरीके को अपने बदल कर तो देखो॥ […]

बनाते सुनहरा भविष्य

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** यदि आप नहीं होते तो…(शिक्षक दिवस विशेष)…. शिक्षक ही जिंदगी संवारते हैं,ईश्वर की बंदगी सिखाते हैंमत भूलना कभी इनको-क्योंकि, यही जिंदगी निखारते हैं॥ बचपन से देते हैं […]

मेरा तिरंगा महान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* अपना सम्मान तिरंगा…. कोई झंडा उसे कहता,तिरंगा कोई कहता है,कोई ऊँचा है फहराता,कोई निज हाथ गहता है।मेरा झंडा मेरा गौरव,मेरे सम्मान का सूचक-छतों पर ना दिखे […]

एक धागे में है बात बड़ी

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** तोड़ना मत कभी भाई-बहन का प्यार,रिश्ता है अनमोल ये, इसमें है संसार।महिमा इसकी न समझना तुम कभी कम-रेशम की डोरी से जुड़ा प्रेम ये अपार॥ स्नेह का […]

कागज की कश्ती

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *********************************************** वो कागज की कश्ती, गुलफ़ाम बन हमारा,यादों के दरख्तों में, जीवन का सहारा।माना मैंने लुटाई बेपनाह वफा़ बेवफाई में-खूबसूरत लम्हें आज भी जीवन दे […]

काया रहे स्वस्थ

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस विशेष…. करना नित व्यायाम,ज़िन्दगी मंगल गाती,कहता चोखी बात,मान यदि मन को भाती।जीवन में उत्थान,यही तो सब ही चाहें-करता जो है योग,जिन्दगी सदा […]

सद्भाव

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* सबसे हिल-मिलकर रहो,तभी बनेगी बात,जब-सब सद्भावी बनें,तब रोशन हो रात।यही आज संदेश है,यही आज उद्घोष-भारतवासी एक हों,तब मिलती सौगात॥ हिन्दू-मुस्लिम एक हैं,मानव सारे एक,सबको बनना […]

पुरातन मूल्यों का हो अधिक प्रसार

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* नववर्ष विशेष… फसल चक्र ऋतु परिवर्तन का,संकेत है हिन्दी नव वर्ष,नवरात्री के जयकारों से होता,व्याप्त सबमें भक्ति हर्ष।सूर्य चंद्रमा दिशा परिवर्तन और जुड़ी कृषकों की ख़ुशहाली-विक्रमादित्य,भगवान झूलेलाल,से […]