जाति-वर्ण लोकतंत्र पर है भारी

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* जाति वर्ण और भेदभाव,लोकतंत्र पर है भारीऊँच-नीच के चक्कर में,लड़ती है यह दुनिया सारी। अमीर गरीब गोरा काला,छोटे बड़े की भावनाहै बड़ी ही अत्याचारी,इस दुनिया में आने वाला,हर शख्स है समानता का अधिकारी। जाति-धर्म की बातें करके,जो लोगों को भड़काते हैंदेश की एकता और अखंडता को,तार-तार कर जाते हैंऐसे लोगों से ही,भरी … Read more

दो नयन

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* दो नयन मिले मुस्कान खिले,कितना कुछ कहती ये बातें ! शिशु के निश्छल भाव सलोने,ममता गदगद हँसती दिन-रातें ! नटखट कान्हा का रूप लख,गोपियाँ मुग्ध नयना मटकावें ! राधारानी भाव लजा छुपाती,प्रेम मुदित झुके दो नयन विंहसते ! विरह वेदना आह पीड़ अंत: में,दो नयन तड़प अश्रु बरसावें ! क्रोध … Read more

ठहराव ढूँढते हैं…

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मृगतृष्णा की चकाचौंध में दर्दिल गम भाव भूलते हैं,व्यस्त दौड़ती हुई ज़िंदगी में ठहराव ढूँढते हैं। बस चाहत आहत जीवन अरमानों पग-पग अन्वेषण,मर्यादित जीवनचर्या लालच में कहीं छूट जाते हैं। कहाँ ख्याल लालच मन अपनापन रिश्ते रह पाते हैं,व्यस्त दौड़ती हुई ज़िंदगी में ठहराव ढूँढते हैं। छोटी-छोटी बातों में … Read more

आ रहा सिंहस्थ… अमृत बरसेगा

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** सिंहस्थ आ रहा अवंतिका द्वार,अमृत बरसेगा हर घर के द्वार। नयन थके हैं सुनो हे पालनहार,दर्शन से होगा सबका बेड़ा पार। सेवकों की मीठी वाणी करती थी आदर-सम्मान,प्रेरणा देते कर्म पर है आज सबको है अभिमान। क्षिप्रा नदी में तैरते जलते दीपक ने भी जाना,वो अपनी लौ से बता रहा सिंहस्थ … Read more

कर देती हैं पूर्ण

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कर देती हैं पूर्ण समर्पणनहीं कामना प्रतिफल की,करतीं हैं स्वीकार चुनौतीलिखें कहानी प्रतिपल की। नभ, थल चाहे गहरा सागरबढ़ कर उसको नाप लिया,देश की नेता बनीं बेटियाँराजनीति स्वीकार किया। तोड़ पुराने बंधन उसनेख़ुद्दारी को मोल लिया,आगे-आगे कदम बढ़ानेकठिन परिश्रम खूब किया। तूफ़ानों से लड़ना सीखासीमा पर ललकार दिया,उनके घर में घुसकर माराबड़ा … Read more

दर्द लिख जाऊँ

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* प्रेम पर लिखूं, इश्क को गाऊं काले तिल की महिमा बताऊं, आत्मा अभी मरी न इतनी…राष्ट्र शोक में चुप रह जाऊं। सबका दुःख महसूस करूं चीथड़े देखकर अश्क़ बहाऊं, ईश्वर ने गर कलम थमाई…हर इंसा का दर्द लिख जाऊँ। कलम को हथियार बना लूँ अश्कों की स्याही भर पाऊं,जितने भी घर कल उजड़े हैं…उस पर मलहम … Read more

जीवन का मतलब आना और जाना

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** इस तन का अभिमान न करना, यहीं पड़ा रह जाएगा,माटी का यह चोला तेरा, माटी में मिल जाएगा। चाहे राम हो चाहे श्रीकृष्ण, नर रूप में जन्मे थे,दोनों ने अपने जीवन में लाखों कष्ट सहे थेश्रीकृष्ण को जीवन में बेहद अपमान मिला,रणछोड़ और रसिया तक उनको कहा गयाकितने ही कष्ट सहे, विचलित … Read more

मृगतृष्णा में जीवन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मृगतृष्णा में भटके जीवन, लगी पेंच मस्तिष्क सुमति में,मिथ्याचारी छल प्रपंच तम, लगी जंग अस्तित्व प्रकृति मेंखो विवेक कर्त्तव्य भाव मन पेंच खोलने जड़ता अक्षम,गुमराही यायावर विचलित कहाँ सफलता सुख उन्नति में। कठिनाई ख़ुद आवाज़ बन भागमभागी हो जीवन में,खोते संयम साहस संबल तपते ख़ुद नित दावानल मेंसदा तिरोहित … Read more

धरा श्यामल भई

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** वसुंधरा शुष्क हुई, श्यामल ओढ़नी धरी,रूखी, हरियाली खोई, मैली बे-रंग हुई। हिम जाड़ा सांय-सांय, कीटक गजब ढाए,हेमंत राह चेताए, शरदंत वंदना। उल्लसित ऋतु प्रिय, उमंग सुहानी भए,ताप निंदित आदित्य, प्राणी चैतन्य भरे। कनक हरित धरा,अनावृत मणि धरा,अपार गुंजन धरा, सौरभ दिलकुशा। अदब हिम आतप, गज़ब हिम आतप,अलसाई हिम सर्वत्र, विलक्षणता … Read more

जीवन और प्रकृति

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* घाट-घाट नीर वायु, शीत प्रीत रहती थी,प्राकृतिक शीतलता, वादियाँ सजाती थीं। मानवीय स्वार्थ बने, मिट गए दृश्य सभी,नीर बिन बहा करे, दिखाती रेत नदी। सूर्य किरण से दिखे,नीर सतह स्वर्ण सी,चन्द्र किरण से वही, दिखे है रजत सी। स्वर्ण रजत एक ही, सतह पे दिखा किए,फर्क भोर रात भर, के … Read more