निठल्ला…

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************** अलाव में डालते लकड़ी के टुकड़े…‘तेज ठंड हो रखी है ना’ मंगू बोलाजैसे बहुत बड़ा कोई राज खोला,ठंड फकत उसी को है जैसे जकड़े…। मुँह बिचकाती खड़ी रोटी पकड़े…बड़े बिहानी से रसोई झाड़ू कटकाकाम करे यह ठंड का उसको झटका,बुधिया के हाथ जा रहे हैं अकड़े…। रोटी खाने के भी सौ नखरे … Read more

जय गणतंत्र

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************************ स्वतंत्र देश और हमारी जिम्मेदारी… जय हो जय गणतंत्र की,जय हो भारत वर्ष।सतत् प्रगति की राह पर,मिले नया उत्कर्ष॥ नया सृजन गढ़ते रहें,नया-नया परिवेश।विश्व गगन पर सूर्य सा,चमके मेरा देश॥खुशियों का मेला रहे,हर मानव में हर्ष।जय हो जय गणतंत्र की,जय हो भारत वर्ष॥ कभी भूल पाएँ नहीं,वीरों का बलिदान।देश धर्म … Read more

शोभित हिंदुस्तान हमारा

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* गंगा-यमुना-सी नदियों की, बहे जहाँ शुचि धारा।वन, उपवन, हिमगिरि से शोभित हिन्दुस्तान हमारा॥ होली-दीवाली मनती है, जहाँ खुशी के मेले।जहाँ तीज-त्यौहार सभी ही, सचमुच हैं अलबेले।ईदों में हिन्दू शामिल हैं, मुस्लिम नवरातों में।हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई मिलकर उल्लासों में॥रातें उजली होतीं जहँ पर, दूर भगे अँधियारा।वन, उपवन, हिमगिरि से शोभित, हिन्दुस्तान … Read more

राम अवध हैं लौटते

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* वायु सुगंधित हो गई, झूमे आज बहार।राम अवध हैं लौटते, फैल रहा उजियार॥ सरयू तो हर्षा रही, हिमगिरि है खुश आज।मंगलमय मौसम हुआ, धरा कर रही नाज़।सबके मन नर्तन करें, बहुत सुहाना पर्व।भक्त कर रहे आज सब, इस युग पर तो गर्व॥सकल विश्व को मिल गया, एक नवल उपहार,राम अवध हैं … Read more

लो आ गए सिया के राम

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** लो आ गए हैं सिया के राम।आ गए हैं राधा के श्याम॥ बरसों की तपस्या का फल है मिला,अवध में हर चेहरा है आज खिला।आने से प्रभु के हुआ हर्षित हर धाम,लो आ गए हैं सिया के राम…॥ राम का नाम जीवन को तारे,है राम ही सब संकट से निकारे।हम भक्तों के … Read more

सुना है वहाँ राम लला आए हैं

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ मची है धूम कैसी अवध नगरी में।सुना है वहाँ राम लला आये हैं,बिछे हैं फूल घर-घर सदर देहरी में। अवध नगरी है देश भारत में,युगों से जहाँ राम रमे आदत मेंभजन बजें पंछी की स्वर लहरी में।मची है धूम कैसी… हवन कुंडों से उठी जो हवाएँ,महक उठीं सारे भुवन में दिशाएँकलश सजें सखियाँ … Read more

मुक्तिधाम-जीवन का सत्य

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* जीवन का तो अंत सुनिश्चित, मुक्तिधाम यह कहता है।जीवन तो बस चार दिनों का, नाम ही बाक़ी रहता है॥ रीति, नीति से जीने में ही, देखो नित्य भलाई है।दूर कर सको तो तुम कर दो, जो भी साथ बुराई है।नेहभाव ही सद्गुण बनकर, पावनता को गहता है,जीवन तो बस चार दिनों … Read more

आँखों के आगे से गुजरा

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ आँखों के आगे से गुजरा,जब मेरा प्रिय गाँवहाय मैं कितना रोई। ऊँची-ऊँची पहाड़ियों की,लम्बी बड़ी कतारेंबेटी की अगवानी को थीं,सारे साज सँवारें।छलक पड़ीं प्रेमातुर नभ से,रिमझिम-रिम बौछारेंस्वागत करने दौड़ पड़ी थीं,टेसू पगी बहारें।हाथ पसारे किये हुये थे,तरुवर शीतल छाँव॥हाय मैं कितना रोई… ज्यों-ज्यों दौड़ी गाड़ी मेरी,यूकिलिप्टस भागेदेते हुये संदेशा-सा कुछ,दौड़े आगे-आगे।पंक्ति बना सागौन … Read more

साथ तुम्हारा

अंजना सिन्हा ‘सखी’रायगढ़ (छत्तीसगढ़)********************************* साथ तुम्हारा बना रहे सुन, ओ मेरे हमराज।दिन को रात कहो तो वो ही, मैं कह दूँ सरताज॥ तुम ही मेरी चाहत हमदम, बनना मत अनजान,दूर तलक हम संग चलेंगे, ये दिल में अरमान।कभी नज़र से दूर लगूँ तो देना तुम आवाज़…,साथ तुम्हारा बना रहे सुन, ओ मेरे हमराज…॥ तुमसे बेहद … Read more

तुम न सुनो, यह गगन सुनेगा

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ मेरे मानस के गीतों को,तुम न सुनो, यह गगन सुनेगा।कब अतीत को चाहा मैंने,नव निमेष ही मुझको भाया जिसने मेरे हृदय पटल परअभिनव जग का चित्र बनाया।नूतन जग के इन भावों को,मेरे भव का भवन सुनेगा॥ निश दिन दौड़ी मरु में मृग-सी,जीवन से भी प्रीति हटाईकिन्तु नहीं उस पार क्षितिज के,अपनी कुटी बना … Read more