कौन बचाये!
जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)*************************************** अर्थी लेटा पूत धरा का,बोलो उसको कौन बचाये!स्वागत करते घने अँधेरे,छूट गयी पीछे रोशनियाँ!कर्जे से पसरा सन्नाटा,रोज डराता ब्याजू बनिया!आँखों के आगे छाये हैं,आँधी बरसातों के साये!बोलो उसको कौन बचाये…॥ गुर्राते रोजाना उस पर,जन्तु सींग नाखूनों वाले!हाथों की रेखा को खायें,काले काले खूनी छाले!घूम रही जंगली आंधियाँ,कैसे उनसे फसल रखाये!बोलो उसको … Read more