सराहनीय है पहल,पर कैसे होगी सफल ?

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** मुद्दा:हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं में अभियांत्रिकी की पढ़ाई………. जर्मनी,रूस,फ्रांस,जापान और चीन सहित दुनिया के दर्जनों देशों में पूरी शिक्षा ही स्थानीय भाषाओं में दी जाती है। हाल ही में देश में आई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी स्थानीय भारतीय भाषाओं में पढ़ाई पर जोर दिया है। अखिल भारतीय … Read more

विश्व शांति के प्रबल पक्षधर रहे गुरुदेव

नमिता घोषबिलासपुर (छत्तीसगढ़)**************************************** इस महान देशभक्त का निधन ७ अगस्त १८४१ को हो गया। वे विश्व शांति तथा विश्व एकता के प्रबल पक्षधर थे। गुरुदेव महान दार्शनिक,रहस्यवादी तथा मानवतावादी थे। जीवन के अंतिम समय में उन्होंने लिखा था,-भाग्य चक्र के परिवर्तन से १ दिन अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना ही होगा,किंतु वह किस भारत को … Read more

स्वभाषाओं का स्वागत लेकिन….?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* यह खुश खबर है कि देश के ८ राज्यों के १४ अभियांत्रिकी महाविद्यालयों इंजीनियरिंग में अब पढ़ाई का माध्यम उनकी अपनी भाषाएँ होंगी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की पहली वर्षगांठ पर इस क्रांतिकारी कदम का कौन स्वागत नहीं करेगा ? अब बी.टेक. की परीक्षाओं में छात्रगण हिंदी,मराठी, तमिल,तेलुगु, कन्नड़, गुजराती, मलयालम और … Read more

बाढ़,सामाजिक संचार और उम्मीदों का ‘एयरलिफ्ट’ होना…!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** इसे कहते हैं कुदरत की मार। आज से करीब १५ दिन पहले तक तमाम मप्र वासी इंद्र देवता को रिझाने के लिए पूजा-पाठ और टोने-टोटके में लग गए थे कि अचानक मौसम ने करवट बदली। राजनीतिक सरगर्मी और टोक्यो ओलिम्पिक में खुशियों के उतार-चढ़ाव के बीच आसमान में कुछ पानी भरे तंत्र … Read more

पूर्वोत्तर राज्यों में गृह युद्ध की आशंका!

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)************************************** भाई जैसा दोस्त नहीं और भाई जैसा दुश्मन नहीं,इसके जीते-जागते उदाहरण रामायण काल,महाभारत काल से लेकर यह नियति निश्चित है। हमारे देश में विभाजन के बाद जो स्थिति बनी है,वह भी आज दुश्मनों से कम नहीं। आज ७३ साल हो गए,पर दुश्मनी की दरार नहीं पट पाई। यह टूटन आजादी के पूर्व से … Read more

मित्रता

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* मित्रता की अजब कहानी है,थोड़ी-सी भी आहट पाकर दुख की घड़ी में मित्र तुरन्त चले जाते हैं।‘मित्र’ शब्द केवल नाम का नहीं है,मित्र ही तो हैं जो दु:ख की घड़ी में कहते हैं-मत घबराओ मित्र मैं हूॅ॑ ना,और हरदम रहूॅ॑गा साथ में,अपने-आपको अकेला मत समझना।मित्रता में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। … Read more

विश्व-संस्था में भारत को नया मौका

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ऐसी संस्था है, जो सबसे शक्तिशाली है। इसके ५ सदस्य स्थायी हैं-अमेरिका,ब्रिटेन,फ्रांस,रूस और चीन। इन पांचों सदस्यों को ‘वीटो’ का अधिकार है। अर्थात यदि इनमें से १ भी किसी प्रस्ताव का विरोध कर दे तो वह पारित नहीं हो सकता। इन ५ के अलावा १० साधारण … Read more

सबके दाता राम

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** यदि आपकी सर्वशक्तिमान प्रभु के प्रति अटूट आस्था है और आप समर्पित हैं तो आप यह मान कर चलें कि आपको मनोवांछित फल वे अवश्यमेव प्रदान करेंगे। इस तरह की अनेक सत्य घटनाओं से इतिहास भरा पड़ा है। मैं स्वयं इसका साक्षी हूँ। इसी कड़ी में परमश्रद्धेय स्वामीजी श्री रामसुखदासजी महाराज … Read more

जातिगत आरक्षण का खेल घातक

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** आज जहां देश को ‘सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास’ वाली राजनीतिक व्यवस्था की महती आवश्यकता है,एवं जाति,पंथ,मजहब आधारित चली आ रही पद्धति के खात्मे की जरूरत है,वहीं जातिगत आरक्षण का खेल निश्चित ही देश के लिए घातक है। ऐसी स्थिति में पिछड़ा वर्ग को इसकी गंभीरता को समझना होगा। ये संख्या,ज्ञान,बुद्धि,धन,देशभक्ति,बाहुबल … Read more

स्वार्थ से विरत होकर ही सुखमय जीवन की कल्पना संभव

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************** आज के भौतिकवादी जिजीविषा के दलदल में फंसी भागम-भाग की जिंदगी में एक यह यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा है कि ‘पारिवारिक जीवन कैसे सुखमय हो ?’परिवार का अर्थ वह गोवर्धन पर्वत सम छत्र है जिसमें सभी परस्पर प्रेम,सौहार्द,सहयोग,सुख-दुःख के साथी,सहानुभूति,सहनशीलता,और संवेदनशील और एक-दूसरे की चहुँमुखी प्रगति,विकास,उत्थान और अनवरत संघर्ष … Read more