गुरु युगबोध
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* चमन जैसा,शिथिल कैसा,दूर पैसा,नव काम।गुरु सुहाये,ख़ूब भाये,जग जगाये,है धाम॥दोष मारे,गुण बुहारेे,दे सहारे,नव ज्ञान।है सुधा-सा,नित सधा-सा,जयघोष है,प्रतिमान॥ गुरु है फूल,हारे शूल,वह तो ईश,प्रवहमान।रच दे नया,नहिं बद रहा,जीवंत सब,नव शान॥गुरु गीतिका,संगीतिका,अनुराग वह,संवेग।आलोक गुरु,नव लोक गुरु,अंदाज़ नव,शुभ नेग॥ तिमिर हरता,भाव भरता,मांगलिक गुरु,आसान।विजय धरता,शिष्य बढ़ता,गुरु गतिशील,सम्मान॥गुरु विहँसता,जगत रचता,सृजनकारी,नव प्रीति।गुरु भगवान,नवल विहान,युग का सार,नव नीति॥ … Read more