वसंत की बयार
अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** ऋतुराज,फिर आयामन को लुभाता,फूल खिलेमनभावन। मन,अपना झूमेलपक लूँ ख़ुशी,छूटे नहींसाथ। प्रेम,हास-उल्लासहर कोई गुलज़ार,मौसम हसींमनमोहन। यादें,खजाना खुलास्मृति ढेर सारी,हमराह कौन ?आज। नवयौवन,खिला चेहरावसंत की बयार,उड़ना चाहेप्यार। तितलियाँ,लुभाती रंगीनप्रकृति की चित्रकारी,बड़ी हसीनमनमोहिनी। धरा,महक उठीओढ़ी पीली चादर,किसान चहकेजनउत्सव। कोयल,बनी कोकिलापंछी झूमे डाल,करें सुस्वागतमसबका। अभिलाषा,माँ शारदेकृपा बनी रहे,वर मिलेंअनेक। बाँसुरी,मन मोहतीछिड़ी सुरीली तान,इठलाए गोरियाचहके॥