ईर्ष्या कभी न धारें
आशा आजाद`कृतिकोरबा (छत्तीसगढ़)**************************** ईष्या का निज भाव, कभी न मन में धारें।विमुख करे पथ नित्य, काज होवे न विचारें॥यह करता अलगाव, अहं मन भीतर आता।निर्मल मन व्यवहार, देह से हटता जाता॥ घटता मेल-मिलाप, चाह आगे ही जाना।मित्र संग जब द्वेष, खेल फिर नाना नाना॥उचित लगे जो कार्य, धार्य कर चलते जाता।कल का क्या अंजाम, मनुज … Read more