ईर्ष्या कभी न धारें

आशा आजाद`कृतिकोरबा (छत्तीसगढ़)**************************** ईष्या का निज भाव, कभी न मन में धारें।विमुख करे पथ नित्य, काज होवे न विचारें॥यह करता अलगाव, अहं मन भीतर आता।निर्मल मन व्यवहार, देह से हटता जाता॥ घटता मेल-मिलाप, चाह आगे ही जाना।मित्र संग जब द्वेष, खेल फिर नाना नाना॥उचित लगे जो कार्य, धार्य कर चलते जाता।कल का क्या अंजाम, मनुज … Read more

रिमझिम बदरा

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* रिमझिम बदरा बरस रहे हैं, सावन आया अब आओ।आकुल है मन तुमसे मिलने, मधुर सलिल रस बरसाओ॥ छमछम करती बूँदें बरसे, नृत्य धरा पर दिखलाएं।गर्जन करते मेघ साथ में, जैसे पावक दहकाये‌‌॥आ जाओ अब प्रियतम प्यारे, प्रीत व रीत सिखा जाओ।रिमझिम बदरा…॥ झूला झूलें आमा डाली, कोयल गीत सुनाती है।रंग-बिरंगी तितली आकर, … Read more

स्वस्थ देहयुक्त योग

आशा आजाद`कृतिकोरबा (छत्तीसगढ़)**************************** हे मानव नित भोर भये सब, कर लें योग।कभी देह को नहीं धरेगा, कोई रोग॥ भिन्न-भिन्न योगा के गुण को, जानें आप।मानव नित पदचार करें तन, सहता ताप॥ संग योग फिर खान-पान का, रख लें ध्यान।नित्य भोर पर जल पीना है, हो संज्ञान॥ सुबह सैर को निसदिन जाएँ, मानें बात।शुद्ध वायु जो … Read more

पिता सिखाते

आशा आजाद`कृतिकोरबा (छत्तीसगढ़)**************************** जीना जैसे पिता… पापा मेरे सबसे प्यारे।लगते मुझको सबसे न्यारे॥रोज सवेरे मुझे उठाते।संग चलें अरु दौड़ लगाते॥ रोज ज्ञान की बात बताते।कैसे जीवन चले सिखाते॥घर से मिलती शिक्षा अनुपम।बाद पाठशाला है उत्तम॥ अगर चाहिए उत्तम शिक्षा।गुरुवर देगें तुमको दीक्षा॥सदा चरण रज उनके जाओ।गुण सर्वोत्तम उनसे पाओ॥ गुण संस्कार सिखाये माता।सर्वगुणों की वह … Read more

धरती का श्रृंगार करें हम

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************************ स्वच्छ जमीन स्वच्छ आसमान…. आओ हम सब मिलकर साथी, पर्यावरण बचाएँगे।मुक्त प्रदूषण स्वच्छ धरा को, सुन्दर स्वर्ग बनाएँगे॥ धरती का श्रृंगार करें हम, दुल्हन की जैसी दमके।झूमें यहाँ बसंत बहारें, फूलों की कलियाँ महके॥वृक्ष बिना जीवन है मुश्किल, आओ वृक्ष लगाएँगे।आओ हम सब मिलकर साथी,… स्वच्छ हवा ऑक्सीजन वाली, बहती … Read more

कवि

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** जल अनल बनाये जो,आग पिये जातेजग हलचल लाये वो…। धुएँ में तैराते,कहते कवि जिनकोभावों से नहलाते…। पल महल बना अम्बर,मेघ से ले छतरीये सपनों के पथकर…। कवि दीप जला जल से,उजियारा बिखराजगमग धो मन मल दे…। सुलझा जीवन उलझन,लिखकर दिखलातेकवि जीवन का दर्पण…। कवि प्रेम अलख लख कर,कविवर कहलाते,lदुर्भाव द्वेष तजकर…। रह … Read more

दिव्यांग जन

आशा आजाद`कृतिकोरबा (छत्तीसगढ़)**************************** नेक व्यवहार-तन से होय भले ही, जो दिव्यांग।नहीं जानते लेकिन, करना स्वांग॥ पावन रहे भावना, सुंदर नेक।कोई दिव्यांग रहे, पर हम एक॥ हृदय भाव में रखते, सुंदर भाव।जीत सदा लेते हैं, नेक स्वभाव॥ खुद का पालन पोषण, भरते पेट।अपनी दु:ख-पीड़ा को, रखें समेट॥ नमन करौ सब दे दो,ये सम्मान।गर्व करो सब भारत, … Read more

लापरवाही

आशा आजाद`कृतिकोरबा (छत्तीसगढ़)**************************** लापरवाही देख लें, अनहोनी हो जाय। सब बच्चों को आज तो, वाहन ही है भाय॥ वाहन ही है, भाय जोश में, तेज चलाते। नियम बने जो, नित्य तोड़ते, मजे उड़ाते॥ ‘आशा’ कहती, अपनाते हैं, तानाशाही। घटती घटना, करते हैं जो, लापरवाही॥ जीवन तो अनमोल है, जीवन के दिन चार। है जो यातायात … Read more

नया सवेरा आया है

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** नया सवेरा आया है।सुखदायी आभा लाया है॥ चिड़िया चहके पेड़ों पर,भंवरे गुन-गुन फूलों परनव विहान की नई उमंग,लेकर सूरज आया है। पूरब दिशि लाली छायी,धरती ने सुंदर छवि पायीहरित तृणों में ओसबिंदु,मोती भर कर के लाया है। हरियाली चहुँओर भरी,फूलों की मुस्कान बढ़ीखिले कुसुम सौंदर्य भरे,सुषमा अतुलित लाया है। कोमल-सी कलियाँ … Read more

संचित कर लें भूजल

आशा आजाद`कृतिकोरबा (छत्तीसगढ़)**************************** भूजल घटता जा रहा, लोग न देते ध्यान।खर्च करें है जल अधिक,रखते नहिं यह ज्ञान॥रखते नहिं यह- ज्ञान नीर है, हमें बचाना।रखें बचाकर, छोड़े जल को, व्यर्थ गँवाना॥आशा कहती, जिम्मेदारी, समझें प्रतिपल।वर्षा का जल, नित्य निरंतर, पहुँचे भूजल॥ भूजल का स्तर घटा, मनुज न लेते भान।लापरवाही कर रहे, भूले सुंदर ज्ञान॥भूले सुंदर- … Read more