राह दिखाती गीता

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:मापनी-१२२२ १२२२ १२२२ १२२२ विधाता का बड़ा अद्भुत सुसर्जन कार्य है गीता।जगत को राह दिखलाती हमें ये मात सुपुनीता॥दिया था ज्ञान अर्जुन को मनोहर कृष्ण गोविंदा।भजा जिसने कन्हैया को वही संसार में जीता॥ जगत में जिस किसी ने भी इसे मन माहि अपनाया।सुगीता ज्ञान को पाकर पृथा-सुत मोह हट पाया॥इसी जीवन … Read more

मानवता मरती

पायल अग्रवालमुजफ्फरपुर (बिहार) ******************************* कब तक अबला बनती श्रद्धा, टुकड़े में कटती।जाग-जाग सोये अब तुम सब, मानवता मरती॥ तोड़े विश्वास प्यार पल में, क्या तुमको मिलता।शोभा होती तेरे घर की, आँगन है खिलता॥तब प्रकोप कलयुग का दिखता, बहुत डरी रहती।जाग-जाग सोये अब तुम सब, मानवता मरती॥ था अरमान बहुत जीने का, माँ रो-रो कहती।हश्र अगर … Read more

मानव बनो

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मानव बनो, संसार है।करुणा रखो, अभिसार है॥सजाओ पथ, अब नीति हो।बनाओ मन, अब प्रीति हो॥ धर्म साधो, जो सार है।कर्म मानो, जो प्यार है॥मर्म जानो, उपहार है।धर्म मानो, उजियार है॥ उदार रहो, सबने कहा।जो बिगाड़ा, सबने सहा॥पर अब सोच, नहिं पीर हो।यही विचार, हर धीर हो॥ जीवनी अब, नित गीत हो।कोय … Read more

मन से मन जोड़ें

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** रचनाशिल्प:मात्रिक छंद, त्रिपद=१२-१०-१२;प्रथम, तृतीय=समतुकांत सब भेद-भाव छोड़ें,देंखें कोशिश करमन से मन को जोड़ें। न काम करिए ऐसा,मिल जाये न कहींजैसे को भी तैसा। अनपढ़ भाषण देता,जब वो बन जायेचुनाव जीता नेता। जीवन के पहर गये,जाने किस की हीचाहत में गुजर गये। बजते मेरे बारह,बेवकूफ बना करजब वह नौ दो ग्यारह। न … Read more

जीवन-संदेश

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सँवरो आज, संचार है।जप लो ईश, सिन्गार है॥कर लो काम, तब बात हो।कुछ हो वाह, सौगात हो॥ दुर्लभ जनम, अब तू बचा।पाया जनम, सुख को रचा॥सोच हो सद्, आचार हो।मानव सोच, सुविचार हो॥ काम तो कुछ, अब शेष है।सभी के दिल, अब क्लेश है॥हमें ख़ुद को, है तारना।बुरे विकार, है मारना॥ … Read more

द्वंद में मन

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** रचनाशिल्प २१२२ २१२२ २१२२ २… वह पथिक क्यों है व्यथित तर ओस से भीगा,यामिनी से कर रहा अठखेलियाँ धींगा।हो रहा उर्वर मृदा मन कुछ तो बोया है,अंकुरित होने लगा जो-युग से सोया है। कौन हो मधुमास का आभास देते तुम,मृत हृदय उपवन सुधामय साँस देते तुम।कौन मानस देहरी थम द्वार बैठा है,तप्त … Read more

जीरा गुणकारी

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************************** रचना शिल्प:१६/१२….. आयुर्वेदिक है ये जीरा,स्वास्थ्य लाभ गुणकारी।सब्जी में भी है उपयोगी,समझे दुनिया सारी॥ पाचन शक्ति बढ़ाने वाला,जल-जीरा उपयोगी।जो भी औषधि माने खाये,रोग भगाये रोगी॥नीबू साथ मिलाकर सेवन,करते हैं नर-नारी।आयुर्वेदिक है ये जीरा,… एंटीआक्सीडेंट बहुत है,सूजन को कम करता।माँसपेशियों का रखवाला,दर्द सभी कुछ हरता॥बहुत आयरन और फाइबर,मैगनीज भी भारी।आयुर्वेदिक है … Read more

दाता जो देन करें

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************* १२ मात्रा प्रति चरण… जीवन है इक नदिया, सुख-दु:ख दो तट इसके,नदिया के साथ रहें, पर अलग-अलग बहते। संसार सुनहरा है, जीवन प्रभु की रचना,नदियों से सृष्टि सजे,खूबी का क्या कहना। रे मन तू कर्म सजा, भगवान इशारा दें,बस देख ले सृष्टि को, तट पर ही घाट सजें। भवसागर … Read more

शान हमारी हिंदी

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* हिंदी और हमारी जिंदगी… भारत सुंदर देश, मातृभाषा है हिंदी।मस्तक शोभित श्रेष्ठ, लगे हो जैसे बिंदी॥भारत माता मान, यही है शान हमारी।मृदुवाणी शुभ बोल, सभी को लगती प्यारी॥ हृदय जगत की शान, भावना सुंदर देती।मृदुवाणी शुभ सार, द्वेष नित यह हर लेती॥सुन मिलता आनंद, भावना अमिट समाए।कलम गढ़ें शुभ छंद, सृजन … Read more

माता रानी

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)********************************************************* माता रानी तुम ही मेरा,बेड़ा पार लगाना।कब से बैठा हूँ दर पे माँ,थोड़ा प्यार बहाना।। मैं तो खाया हूँ माँ अम्बे,बहुत जहां में ठोकर।अब मैं सदा रहूँगा तेरे,दर पे सेवक होकर॥अपने ही चरणों में माता,रखना भूल न जाना।माता रानी तुम ही मेरा… भक्ति नहीं औ शक्ति नहीं माँ,कुछ भी यहाँ … Read more