बुद्धम् शरणम् गच्छामि

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ****************************************** मानवता की सीख से,जगा दिया संसार।हे गौतम! तुमने दिया,हमको जीवन-सार॥ सामाजिक नवचेतना,का बाँटा उजियार।प्रेम-नेह के दीप से,दूर किया अँधियार॥ कपिलवस्तु के थे कुँवर,किया सभी पर त्याग।ज्ञान-खोज में लग गए,गाया सत् का राग॥ संन्यासी बन तेज का,दिया दिव्य उपहार।बुद्ध ज्ञान के पुंज थे,परम मोक्ष का सार॥ धम्मं शरणम् ले गए,सारे जग … Read more

श्री राधे घनश्याम

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************* देखूँ नित मैं छवि युगल,श्री राधे घनश्याम।मन मंदिर हिय में बसो,कर दो पूरण काम॥ राधा बिन मुरली नहीं,बजे न कोई साज।सूना आँगन प्रेम बिन,आओ हे ब्रजराज॥ भज प्यारे गोविन्द को,मुरलीधर गोपाल।जग के तारणहार वो,मातु यशोदा लाल॥ कंबल औ लाठी लिए,चले विपिन की ओर।ग्वाल सखा के साथ में,दाऊ नंदकिशोर॥ अधरों पर … Read more

रखना उर उम्मीद

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ************************************* रखना उर उम्मीद तू,तब पाएगा जीत।अगर निराशा पाल ली,तो हारोगे मीत॥ जीवन इक संघर्ष है,लड़ता जा तू यार।उम्मीदों को ले बना,विजयश्री उपहार॥ उम्मीदें पतवार हैं,कर देती हैं पार।वरना इंसां डूबता,सदा बीच मझधार॥ उम्मीदों से आत्मबल,उम्मीदों से वेग।उम्मीदों से ही मिले,नित खुशियों का नेग॥ उम्मीदें उजियार हैं,परे करें अँधियार।उम्मीदों को थाम … Read more

वाणी

जबरा राम कंडाराजालौर (राजस्थान)**************************** वाणी से पहचान है,वाणी ही व्यवहार।सोच-समझ कर बोलिये,सार सार कर सार॥ वाणी लखे चरित्र से,वाणी लखे विचार।वाणी से ही जीत है,वाणी से ही हार॥ वाणी से झगड़े मिटे,वाणी छैड़े जंग।वाणी से नफरत करे,वाणी से ही रंग॥ वाणी प्रेम बढात है,वाणी फैले द्वेष।वाणी साधारण रखे,वाणी करे विशेष॥ वाणी से ऊंचा बने,वाणी से … Read more

राजनीति का खेल

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* राजनीति के खेल में,पिसते सदा गरीब।वोट माँगकर दीन का,जाते नहीं करीब॥ सत्ता पाना है हमें,एक यही बस लोभ।मरते नित्य गरीब पर,कभी न करते क्षोभ॥ दौलत की भरमार है,फिर भी चूसें खून।खून-खराबा हो रहा,सत्ता बना जुनून॥ जात-पात की आड़ में,लूटें छल से वोट।सत्य कर्म से दूर है,मन में बसता खोट॥ बिना काम … Read more

विनती

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ************************************ विनती करती मैं सदा,जोड़ूँ दोनों हाथ।विद्या दो माँ शारदे,चरण झुकाऊँ माथ॥ विनती मेरी आपसे,मुझको दो वरदान।मैं छोटी-सी लेखिका,मिले कलम को मान॥ जय माँ वीणा वादिनी,स्वप्न करो साकार।आयी हूँ मैं द्वार पर,कर दो बेड़ा पार॥ सत्य राह पर मैं चलूँ,सिर पर रखना हाथ।भूल-चूक माफी मिले,रहना मेरे साथ॥ चले कलम मेरी … Read more

लगाएँ वृक्ष हम

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************** विश्व पर्यावरण दिवस हुआ विषम पर्यावरण,ग्रस्त रोग समाज।वृक्ष लगाओ मिल पुनः,देश बचाओ आज॥ खुद जीवन का रिपु मनुज,खड़े मौत आगाज।बिन मौसम छायी घटा,वायु प्रदूषित आज॥ भागमभागी जिंदगी,बढ़ते चाहत बोझ।सड़क सिसकती जिंदगी,वाहन बढ़ते रोज॥ चकाचौंध उद्यौगिकी,नभ में फैला धूम।जले पराली खेत में,मौत प्रदूषण चूम॥ चहुँदिक् है फैला तिमिर,भेद मिटा निशि … Read more

तम्बाकू जीवन ज़हर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************** लत तम्बाकू जिंदगी,नशा बहुत विकराल।पी बीड़ी सिगरेट को,खा ख़ैनी बदहाल॥ तम्बाकू की आदतें,करे मौत आगाज़।कैंसर टी.बी. का जनक,दुश्मन मनुज समाज॥ तम्बाकू गांजा चरस,द्रग अफ़ीम ये रोग।शराबी कामी नशा,समझ मूल दुर्योग॥ तम्बाकू सेवन बना,हेतु शान सम्मान।दे न्यौता ख़ुद मौत को,नशाब़ाज शमशान॥ तम्बाकू युवजन वतन,बना आज यह प्रीत।करे नाश ख़ुद जिंदगी,माने … Read more

सपनों की उड़ान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************************* उच्च रहे हरदम यहाँ,सपनों भरी उड़ान।पर कर्मठता संग हो,तो सपनों में जान॥ उड़ना ऊँचा श्रेष्ठ है,पर रखना विश्वास।बिना आत्मबल के यहाँ,सदा टूटती आस॥ सपनों को हिमगिरि बना,दे ऊँचा आकाश।चूमेेगी पग जय सदा,हों बाधाएँ नाश॥ सपने जब तक नहिं बनें,सत्य भरा अहसास।तब तक थोथी ज़िंदगी,व्यर्थ दिवस अरु मास॥ श्रम के संग … Read more

कब आओगे मोहना

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************* कब से राह निहारती,बैठी यमुना पार।कब आओगे मोहना,छलके आँसू धार॥ माधव तुमसे दूर रह,हुई बावरी आज।मन मेरा लागे नहीं,दर्शन दो ब्रजराज॥ गैया तुझ बिन दीन है,ग्वाले सब बेहाल।सूना सूना वन यहाँ,आओ यशुमति लाल॥ जै हो कृष्ण मुरार की,जै हो श्री घनश्याम।करता हूँ वंदन तुम्हें,माधव आठो याम॥ कान्हा मेरे साँवरा,नटखट नंदकिशोर।चित्त … Read more