मनुज देह सौभाग्य

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************** पंच प्राण धारक जगत,पंचतत्व का देह।अहर्निशा सुख दुःख सम,परहित जग हो श्रेय॥ लावण्य रूप तनु चारुतम,जन्मा पूत कुलीन।कर्म शील विद्या गुणी,मृदुभाषी मदहीन॥ स्वच्छ रखो परिवेश को,लगता सबको कांत।स्वस्थ रहें काया सदा,मन रहता है शांत॥ कण-कण तन शोणित भरा,मिला देह अनमोल।क्षीर-नीर वात्सल्य रस,स्नेह सुधा रस घोल॥ श्वेत कृष्ण हो काया … Read more

पहली मुलाकात

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) **************************************** मुलाकात पहली बनी,बहुत बड़ा वरदान।तुझसे ही मुझको मिली,एक नई पहचान॥ तेरे मिलने से हुए,पूरे सब अरमान।तू ही अब है ज़िन्दगी,तू ही मेरी शान॥ मुलाकात पहली सदा,रक्खूँगा मैं याद।मैं था उजड़ा,व्यर्थ-सा,हुआ तभी आबाद॥ तू मुझसे जब आ मिली,बिखरा मोहक नूर।हर नीरसता मिट गई,मायूसी सब दूर॥ बनकर तू जलधार प्रिय,बुझा गई सब … Read more

मिलन ईश वरदान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *********************************** मिलन ईश वरदान है,है इक पावन भाव।जिसका मनचाहा मिलन,उसको नहीं अभाव॥ मिलन नहीं तो,है विरह,जो लगता अभिशाप।मिलन एक अहसास है,मिलन लिए नित ताप॥ मिलन बदल दे ज़िंदगी,मिलन प्रेम के नाम।मिलन खुशी है,वेग है,मिलन राधिका-श्याम॥ मिलन सदा है बंदगी,मिलन एक उत्कर्ष।मिलन मेलकर दो हृदय,जीते हर संघर्ष॥ मिलन कामना नेक है,मिलन रचे … Read more

है अबोध यह बालपन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************** है अबोध यह बालपन,निश्छल निर्मल चित्त।चपल प्रकृति कोमल सरल,मधुर स्नेह आवृत्त॥ खेलकूद कौतुक सहज,भावुक मन उद्गार।मेधावी नित अनुकरण,कौतूहल आचार॥ मनमौज़ी नित बालपन,लोक नीति अनजान।गंगाजल पावन प्रकृति,अधर कुसुम मुस्कान॥ राग द्वेष मन छल कपट,नहीं चित्त दुर्भाव।नवकिसलय पादप मृदुल,मुक्त सकल मन घाव॥ कुम्भकार घट मृत्तिका,होते बाल गोपाल।नित अबोध ढल साँच में,चारु … Read more

द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग स्तुति

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************** सोमनाथ सौराष्ट्र में,करुणाकर अवतार।चारु चन्द्र धर शिखर शिव,गंगाधर संसार॥ उच्च शिखर श्रीशैल पर,प्रमुदित देव निवास।पूज्य मल्लिकार्जुन सदा,बाघम्बर कैलाश॥ अकाल मृत्यु रक्षक प्रभु,मोक्ष प्रदाता सन्त।महाकाल उज्जैन में,महिमा नमन अनंत॥ कावेरी नर्मद मिलन,पावन निर्मल धार।ओंकारेश्वर शिव करे,भवसागर से पार॥ चिताभूमि पूर्वोत्तरी,सदा वास गिरिजेश।देवासुर पूजित मनुज,बैद्यनाथ परमेश॥ आभूषण सज्जित प्रभु,दक्षिण क्षेत्र सदंग।भक्ति … Read more

नारी तू नारायणी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************* महिला दिवस स्पर्धा विशेष…… नारी नारायणि शिवा,जगजननी अवतार।नीर-क्षीर पावन हृदय,जगमाया संसार॥ हाँ मैं नारी हूँ सुता,आन-मान कुल शान।शक्ति-भक्ति अपराजिता,नीति-रीति अभिधान॥ माँ-बेटी बूआ-बहन,नमन करो स्वीकार।वधू चारु सजनी प्रिये,ममता करुणाधार॥ तन मन धन अर्पण स्वयं,सन्तति पति परिवार।सीता-गीता अम्बिका,राधा मीरा प्यार॥ नवकिसलय कोमल हृदय,कामधेनु उर क्षीर।ममतांचल छाया सतत,स्नेह नैन भर नीर॥ नारी … Read more

मांग रही अधिकार

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** महिला दिवस स्पर्धा विशेष…… महिला दिवस बता रहा,नारी की पहचान।इच्छा पाले उड़ रही,ऊँची बहुत उड़ान॥ नारी को समझें नहीं,अबला या लाचार।शीश उठाये वह खड़ी,माँग रही अधिकार॥ हर समाज के क्षेत्र में,अब है भागीदार।नारी शक्ति तुझे नमन,जग करता हर बार॥ आँचल में ममता बसी,तुम हो पालनहार।अपने इस कर्तव्य को,आँसू भी स्वीकार॥ बनी … Read more

नयन

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)***************************************** नयन-नयन की जब हुई,आपस में टकरार।उठा ज्वार उर उदधि में,फूट पडे़ उद्गार॥ नयन नशीले मद भरे,लब ज्यों सुर्ख पलाश।कंचन काया पर चढ़ा,यौवन का मधुमास॥ नयन-नयन में हो गई,पिय की पिय से बात।तन-मन पुलकित हो उठा,मचल गये जज्बात॥ नयनों में उलझे नयन,उर खो बैठा होश।मचल उठे जज्बात फिर,यह यौवन का दोष॥ अधर-अधर … Read more

पिता की व्यथा

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ***************************************** पिता कह रहा है सुनो,पीर,दर्द की बात।जीवन उसका फर्ज़ है,नहिं कोई सौगात॥ संतति के प्रति कर्म कर,रचता नव परिवेश।धन-अर्जन का लक्ष्य ले,सहता अनगिन क्लेश॥ चाहत यह ऊँची उठे,उसकी हर संतान।पिता त्याग का नाम है,भावुकता का मान॥ निर्धन पितु भी चाहता,सुख पाए औलाद।वह ही घर की पौध को,हवा,नीर अरु खाद॥ भूखा … Read more

श्री कृष्ण चरित्र

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************** राधे-राधे बोल मन, मिल जायेंगे श्याम।श्री चरणों में शीश रख,पाओगे सुखधाम॥ श्री राधे गोपाल की,कर लो मन में ध्यान।आएँगे फिर साँवरे,कृपा सिंधु भगवान॥ कही राधिका श्याम से,जोड़े दोनों हाथ।इन नैनन में आ बसो,मेरे दीनानाथ॥ ब्रज गलियों में धूम है,आया माखनचोर।देख रही सब गोपियाँ,कान्हा नंदकिशोर॥ सुन मुरली धुन राधिका,दौड़ी-दौड़ी आय।सुध बिसरा … Read more