जीना सिखाती है दोस्ती

ललित गर्गदिल्ली************************************** मित्रता और जीवन…. मैत्री (मित्रता) दिवस के पीछे की भावना हर जगह एक ही है-मित्रता एवं दोस्ती का सम्मान। मैत्री का दर्शन बहुत विराट है, स्वस्थ निमित्तों की श्रृंखला में यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। बिना किसी आग्रह एवं स्वार्थ के जो मैत्री स्थापित करता है, वह सबके कल्याण का आकांक्षी रहता है, सबके … Read more

ईश्वरीय देन

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************* मित्रता और जीवन… जगत की रचना करके ईश्वर ने जीवन को रचा।जीवन के सुचारु निर्वहन के लिए जीवन को अनन्य रिश्तों से जोड़ा। इन रिश्तों को लहू के नाते-रिश्तों का रूप दिया, लेकिन फिर भी शायद जीवन के कुछ अभिन्न अंग छूट गए। जो शेष रह गए, उन्हें कालांतर … Read more

सच हमेशा कटु, असहनीय भी

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** महाराष्ट्र-राज्यपाल…. सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक व साहित्यिक के साथ राजनीति में जो जितना बोलता है, वह उतना सफल माना जाता है, पर कभी व्यर्थ भाषण ‘जी का जंजाल’ बन जाता है। संसद में नित्य हर पल शब्दों के प्रहार हो रहे हैं, जिसका परिणाम किसी को अपमानित करना और किसी की प्रशंसा करना हो … Read more

माले-मुफ्त:पक्के मानदंड कायम करना ही होंगे संसद को

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* एक कहावत है कि ‘माले-मुफ़्त और दिले-बेरहम!’ इसे हमारे सभी राजनीतिक दल चरितार्थ कर रहे हैं याने चुनाव जीतने और सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए वे मतदाताओं को मुफ्त की चूसनियाँ पकड़ाते रहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘रेवड़ी संस्कृति’ कहा है, जो बहुत सही शब्द है। असली कहावत तो … Read more

हिन्दी का विरोध शुद्ध राजनीतिक

प्रेम चन्द अग्रवाल*************************************** पी.टी. उषा ने अपनी राज्य सभा सदस्यता की शपथ संघ की राजभाषा हिन्दी में ली है। यह बात इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि, पी.टी. उषा दक्षिण भारत के राज्य केरल से आती है। कुछ नेताओं की नेतागिरी हिन्दी विरोध से चलती है या हिन्दी विरोध के चलते वे लोगों के बीच … Read more

अब जरूरत तो मीडिया को आत्मावलोकन की…!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** अमूमन न्यायालय और खासकर उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देने और उनकी मीमांसा करने वाले मीडिया ने हाल में देश के प्रधान न्यायाधीश एन.वी.रमणा द्वारा मीडिया और विशेष रूप से इलेक्ट्राॅनिक मीडिया पर की गई तल्ख टिप्पणी पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं आई। ऐसा क्यों ? क्या इसलिए … Read more

प्रेमचंद का भाषा चिन्तन:सुझावों पर ध्यान नहीं

प्रो. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)******************************************** हिन्दी के योद्धा-जन्मदिन विशेष…. आज भी प्रेमचंद (३१ जुलाई १८८०-८ अक्टूबर १९३६) सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले हिन्दी के लेखकों में हैं। बड़े विद्वानों के निजी पुस्तकालयों से लेकर रेलवे स्टेशनों के बुक स्टाल तक प्रेमचंद की किताबें मिल जाती है। प्रेमचंद की इस लोकप्रियता का एक कारण उनकी सहज सरल … Read more

भ्रष्टाचार का दलदल एवं कीचड़ की राजनीति

ललित गर्गदिल्ली************************************** भ्रष्टाचार के खेल ने दुनिया के सारे लोकतंत्रों को खोखला कर दिया है। भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इसलिए इसकी साफ-सफाई ज्यादा जरूरी है। इन दिनों गैर भाजपा प्रांतों में भ्रष्टाचार के मामले बड़ी संख्या में उजागर हो रहे हैं। पहले दिल्ली में आम आदमी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सतेन्द्र … Read more

सामर्थ्य के विमर्श में मातृभाषा की भूमिका

डॉ. गिरीश्वर मिश्र, गाजियाबाद(उत्तरप्रदेश)********************************************* मनुष्य इस अर्थ में भाषाजीवी कहा जा सकता है कि, उसका सारा जीवन व्यापार भाषा के माध्यम से ही होता है। उसका मानस भाषा में ही बसता है और उसी से रचा जाता है। दुनिया के साथ हमारा रिश्ता भाषा की मध्यस्थता के बिना अकल्पनीय है। इसलिए भाषा सामाजिक सशक्तिकरण के … Read more

चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी में

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* आजादी के ७५ वें साल में मैकाले की गुलामगिरी वाली शिक्षा पद्धति बदलने की शुरुआत अब मध्यप्रदेश से हो रही है। इसका श्रेय मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान और चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. विश्वास सारंग को है। मप्र की वर्तमान सरकार भारत की ऐसी पहली सरकार है, भारत की शिक्षा के इतिहास … Read more