डिजिटल धोखाधड़ी:ठोस व निर्णायक कदम जरूरी

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** डिजिटल युग ने भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं ने लेन-देन को सरल, त्वरित और पारदर्शी बनाया है। आज एक सामान्य नागरिक भी कुछ सेकंड में देश के किसी भी कोने में धन भेज सकता है, बिल जमा कर … Read more

क्या से क्या हो गया…

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** ‘वैलेंटाइन-डे’ विशेष (१४ फरवरी)…. हर वर्ष १४ फरवरी आते ही वातावरण में एक विशेष प्रकार की चहल-पहल दिखाई देने लगती है। बाजारों में लाल रंग की भरमार, दिल के आकार के गुब्बारे, कार्ड, चॉकलेट, फूल और उपहारों की सजी-धजी दुकानें; मोबाइल और सोशल मीडिया पर प्रेम-संदेशों की बाढ़;और युवाओं में एक … Read more

असहायता

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** नई-नई तहसील बनी थी, इसलिए कुछ स्थाई स्टॉफ आ गया था तथा शेष स्टॉफ की अस्थाई नियुक्ति होनी थी। उक्त पदों पर तहसील के एक प्रभावशाली नेता अपने परिचितों की नियुक्ति करना चाहते थे, पर कपूर साहब इसके लिए तैयार नहीं थे। कपूर साहब विज्ञापन देखकर बाकायदा इन पदों को … Read more

आतंक और अंधकार के बीच संतुलन यानी शिव प्रकाश

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** महाशिवरात्रि विशेष (१५ फरवरी)…. १५ फरवरी को जब समूचा भारत ‘महाशिवरात्रि’ का पावन पर्व मनाएगा, तब यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मजागरण का विराट अवसर होगा। महाशिवरात्रि वह रात्रि है, जब साधक अपने भीतर के अंधकार को पहचानकर शिवत्व के प्रकाश से उसे आलोकित करने का संकल्प लेता है। शिव … Read more

सम्मानित स्त्रीत्व है समाज की वास्तविक परीक्षा

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसके ऊँचे भवनों, तकनीकी प्रगति या आर्थिक विकास दर से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने सबसे संवेदनशील वर्ग-महिलाओं और बच्चों को कितना सुरक्षित, सम्मानजनक और अवसरपूर्ण जीवन दे पा रहा है। जब हम परिवार, समाज और राष्ट्र की बात … Read more

अपने फर्ज को कभी नहीं भूलें

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ धर्म की उस लौ को फिर जलाया जाना चाहिए, क्योंकि वर्तमान समय में रिश्तों में दरार है। रिश्तों में बढ़ती खटास को मिटाने के लिए हमारी अपनी वह भारतीय संस्कृति व परंपरा का दौर फिर लाने हेतु सामाजिक स्तर पर आगे आने की जरूरत आन पड़ी है, क्योंकि इस समय … Read more

पूजा और पाखंड के बीच खड़ा मनुष्य

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मनुष्य की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वह पूजा को साधना कम, प्रदर्शन अधिक बना लेता है। मंदिर, मस्जिद, गिरजों और गुरुद्वारों में भीड़ बढ़ रही है, पर पड़ोस के भूखे की थाली खाली है। माथे पर तिलक, हाथों में माला, होंठों पर मंत्र और व्यवहार में छल, … Read more

लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराएँ सत्ता व विपक्ष

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी लोकतंत्र के लिए चिन्ताजनक घटना है, क्योंकि लोकतंत्र केवल शासन की एक प्रणाली नहीं, बल्कि निरंतर संवाद, असहमति के सम्मान और संस्थागत विश्वास पर टिकी हुई जीवंत परंपरा है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में संसद इस लोकतंत्र का सर्वोच्च … Read more

समय का फेर

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** वह नगर की सबसे बड़ी पत्र- पत्रिकाओं की दुकान थी। पूरी दुकान पत्र-पत्रिकाओं और उपन्यासों से सजी हुई थी। अंदर, मालिक का केबिन बना था और उसके बाहर एक सोफा रखा था। केबिन के बाहर मालिक का निज सचिव बैठा था। साधारण-सी वेशभूषा में एक सज्जन आए।उन्होंने अपना नाम एक … Read more

संविधान ? हर कोई मांग रहा आरक्षण

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)…. मेरा मन बहुत उदास है। बहुत दुखी भी है। मन में बहुत क्षोभ और आक्रोश है। न जाने कितनी ही बातें जहन में कौंध रही हैं। हमारे संविधान निर्माताओं ने क्या सोचकर संविधान बनाया था। उस समय यह कहा गया था कि १० वर्ष … Read more