अहसास के पन्ने
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रवि को लिखने की आदत बचपन से थी। उसकी जेब में हमेशा एक छोटी-सी डायरी रहती, जिसके पन्नों पर वह अपने अहसासों को दर्ज करता। शहर की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में उसे अक्सर लगता-लोग बोलते बहुत हैं, सुनते कम; दिखते बहुत हैं, महसूस कम करते हैं।कॉलेज के आख़िरी साल … Read more