जीत का नशा…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** मि. गुप्ता ने अपने इकलौते बेटे आरव को बचपन से ही एक ही बात घुट्टी की तरह पिलाई थी, कि जीवन में तुम्हें सदा प्रथम आना है। जीत का नशा मीठा ज़हर होता है। और मिस्टर गुप्ता ने यही अपने लाल को घोल कर पिलाया था।    साइंस एक्जिबिशन के कॉम्पीटिशन में आरव का प्रोजेक्ट … Read more

बहन की पहचान

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ झारखंड की एक छोटी-सी बस्ती में एक टूटा-फूटा घर था। उस घर में २ छोटे-छोटे बच्चे रहते थे — गगन और तावारी। ‘गगन’ छोटा भाई था, ‘तावारी’ बड़ी बहन।  अचानक एक हादसे ने दोनों के सिर से माँ-बाप का साया छीन लिया। दोनों अनाथ हो गए।       तावारी बचपन से ही घर-घर जाकर … Read more

आँचल की छाँव

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)….            आज सुबह-सुबह उसे फिर माँ की याद आ गई।       …लगता है जैसे घर का सूरज ही अस्त हो गया। घर के सौन्दर्य के अभाव को तुम ही तो पूरा करती थी माँ! सुबह ६ से शुरू होने वाली तुम्हारी दिनचर्या रात ११ बजे … Read more

पत्नी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** रात के ११ बज गए थे। गायत्री किचन में बर्तन धो रही थी, महिम अपने बिस्तर पर लेटा हुआ करवटें बदल रहा था।   वह मन ही मन में सोच रहा था, कि मेरी पत्नी को कितनी मेहनत करनी पड़ती है। सुबह के ५ बजे की उठी हुई अभी भी लगी हुई है। बेचारी … Read more

अहसास के पन्ने

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रवि को लिखने की आदत बचपन से थी। उसकी जेब में हमेशा एक छोटी-सी डायरी रहती, जिसके पन्नों पर वह अपने अहसासों को दर्ज करता। शहर की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में उसे अक्सर लगता-लोग बोलते बहुत हैं, सुनते कम; दिखते बहुत हैं, महसूस कम करते हैं।कॉलेज के आख़िरी साल … Read more

इश्क़

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ “हैलो, प्रिटी गर्ल।”“यंगमैन आई एम गीत।”“ओह व्हाट्स ए म्यूजिकल नेम।““आई एम प्रत्यूष।”लगभग एक हफ्ते से मॉर्निंग वॉक के समय दोनों एक-दूसरे को देख मुस्कुरा पड़ते थे। प्रत्यूष २५-२६ साल का आकर्षक युवा था, जिसे देखते ही गीत के मन में घंटियाँ-सी बज उठतीं और वह उसके आकर्षण में बंधती जा रही थी। … Read more

रोज़-डे

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ललिता अपनी बॉलकनी में खड़ी हुई थी, तभी निगाह अपने घर के सामने रहने वाली धरा के कमरे में पड़ गई। वहाँ आज ‘रोज़-डे’ के अवसर पर शिशिर, धरा को रोज़ का बुके देने के बाद पत्नी को आलिंगनबद्ध करते देख कर वह स्वयं भी अपने प्रियतम से रोज़ के बुके लेकर … Read more

मुँह पर थप्पड़

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* यह जानते ही मानसी ने जयंत को फोन किया। पहले तो जयंत ने मानसी का फोन अटैंड नहीं किया, और जब फोन उठाया तो सीधे जवाब देने की बजाय टाल-मटोली करता रहा, और जब मानसी ने सीधे सीधे सवाल किया कि,”जयंत तुम यह बताओ कि वह तुम्हारे जो चाचाजी दहेज की … Read more

कीमती आजादी

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** “हमें बोलने की आजादी है। जीने की आजादी है।” कुछ बिगड़ैल लोग बोले।एक छात्र- “किसने कहा, कि तुम्हें बोलने की आजादी नहीं है ? हमारे देश में संविधान में ही सभी को अभिव्यक्ति की आजादी है। सभी को जीने की आजादी है।”“मानते हो ना इस बात को ?”“बिल्कुल, लेकिन अभी मेरी बात … Read more

एक रंग ऐसा भी…।

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ वसंत की पुरवाई में सतरंगी छटा में देशभक्ति के मधुर तराने व गीत-संगीत का दृश्य टेलीविजन पर चल रहा था। “मेरा रंग दे बसंती चोला”…, जिसे घर में बैठी बूढ़ी माँ सुन रही थी, क्योंकि उसका बेटा फौज में गया था। देशभक्ति के गाने जब भी सुनती थी, तो उस … Read more