हे जगत जननी
शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )*********************************************** हे, जगत जननी!चंद्रघंटा, माँ कुष्मांडा,जगत की पालनहारीसंसार में तेरा ही बाजे डंका। हे अम्बे!, हे दुर्गे!जपे है नाम तुम्हारा,चारों ओर फैले, पापियों कानाश कर, तुमने संहारा। हे माँ, कालरात्रि, चामुंडा!चंड-मुंड संहारने वाली,निर्बलों की रक्षक, राक्षसों की भक्षकसिंह पे बैठ, हुंकार भरो। हे माँ, नवदुर्गे!अवगुण का नाश करो,नवघट स्थापना से,प्रकृति में … Read more