मधुर शुभ रात्रि
डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* कभी-कभी मुझे ख्याल आता है,कि करती रहूं तुमसे बातें अभीसुनाती रहूं दास्तां नई पुरानी,बुनती रहूं शब्दों के जाल रुहानी। शायद तुम भी कुछ सुनाओ,किस्से कही-अनकहीमैं सुनती रहूं मुग्ध-सी,बिन सोचें-क्या है गलत और सही। यूँ ही चलती रहे हमारी,रातभर बातों की खुमारीतुम्हें नींद सताए तो मैं क्यों,रातभर तुम्हें लफ्ज़ों से बैचेन करूँ … Read more