करना मत भेद

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* करना मत तुम भेद अब, बेटा-बेटी एक।बेटी प्रति यदि हेयता, वह बंदा नहिं नेक॥वह बंदा नहिं नेक, करे दुर्गुण को पोषित।बेटी हो मायूस, व्यर्थ ही होती शोषित॥दूषित हो संसार, पड़ेगा हमको भरना।संतानों में भेद, बुरा होता है करना॥ बेटा कुल का नूर है, तो बेटी है लाज।बेटा है संगीत तो, बेटी … Read more

आज तो सावन आया

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सावन आया मन रहा, बूंदों का त्योहार।मौसम को तो मिल गया, क़ुदरत का उपहार॥क़ुदरत का उपहार, दादुरों में खुशहाली।खेतों में मुस्कान, सिंचाई है मतवाली॥मेघों का उपकार, धरा पर जल है आया।स्वर गूंजें चहुंओर, आज तो सावन आया॥ सावन आया द्वार पर, करने सबसे प्यार।मेघों द्वारा हो रहा, वर्षा का सत्कार॥वर्षा का … Read more

धरा की पीड़ा

आशा आजाद`कृतिकोरबा (छत्तीसगढ़)**************************** धरती माता रो रही, सबसे करे गुहार।बिगड़ रहा है नित्य ही, धरती का श्रृंगार॥धरती का श्रृंगार, बिगाड़े मानव हरपल।वृक्ष कटे नित जान, उजड़ता प्रतिपल जंगल॥प्राणयुक्त आधार, धरा दे सेवा करती।कटती बनकर मूक, पीर नित सहती धरती॥ धरती रखती गर्भ पर, अनुपम खनिज अपार।मानव करता खोखला, जगती का आधार॥जगती का आधार, संतुलन नित्य … Read more

व्यर्थ दिखावा

आशा आजाद`कृतिकोरबा (छत्तीसगढ़)**************************** चादर छोटी पड़ रही, किया खर्च जो व्यर्थ।मनुज भूलता जा रहा, जीवन का क्या अर्थ॥जीवन का क्या अर्थ, दिखावा से क्या हासिल।धरें सदा संतोष, हृदय यह होवे शामिल॥आशा कहती नित्य, करें सबका नित आदर।उतना होवे खर्च, आपकी जितनी चादर॥ चादर होवे आपकी, उतनी रखिए चाह।संयमता के पथ चलें, मिलती तब है राह॥मिलती … Read more

धर्म भूल रहा इंसान

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* जग में अपना धर्म ही, भूल रहा इंसान।करता आज अधर्म वह, त्याग रहा ईमान॥त्याग रहा ईमान, स्वार्थ में डूबा जाता।करता वह अन्याय, झूठ को ही अपनाता॥काम क्रोध मद लोभ, भरे उसकी रग-रग में।भूल रहा है धर्म, आज मानव इस जग में॥ त्यागें सभी अधर्म को, अपनाएं निज धर्म।गीता भी कहती यही, … Read more

कल किसने देखा यहाँ

डॉ.सरला सिंह`स्निग्धा`दिल्ली************************************** रहना सत्पथ पर सदा, परहित हो हर काम।कल किसने देखा यहाँ, कब हो देख विराम॥कब हो देख विराम, छोड़कर चल दें मेला।सबका छूटे साथ, सभी माया का खेला॥कहती ‘सरला’ बात, सभी का है ये कहना।जीवन के दिन चार, सफल करके ही रहना॥ परिचय-आप वर्तमान में वरिष्ठ अध्यापिका (हिन्दी) के तौर पर राजकीय उच्च … Read more

करना सत्काम

डॉ.सरला सिंह`स्निग्धा`दिल्ली************************************** जब तक तन में साँस है, करना तुम सत्काम।मिलती मन को शान्ति है, और जगत में नाम॥और जगत में नाम, भलाई सबकी करना।झरता जैसे नीर, बिना स्वारथ के झरना॥कहती ‘सरला’ बात, किया हो जो भी अब तक।करना पर उपकार, प्राण काया में तब तक॥ परिचय-आप वर्तमान में वरिष्ठ अध्यापिका (हिन्दी) के तौर पर … Read more

रोटी से जीवन

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रोटी कपड़ों के बिना, जीवन है लाचार।जीवनभर करता मनुज, सही-गलत व्यापार॥सही-गलत व्यापार, काम निशि दिन वह करता।रहता भूखे पेट, ध्यान वह सबका रखता॥करता मन से द्वेष, रखे जो नीयत खोटी।पाय नहीं सुख-चैन, बिना कपड़े अरु रोटी॥ रोटी से जीवन मिले, तन-मन भरता जोश।जिनको मिलती खूब है, वे खो देते होश॥वे खो … Read more

बाल श्रम को रोकें

आशा आजाद`कृतिकोरबा (छत्तीसगढ़)**************************** रोकें मिलकर बाल श्रम, समझे मनुज सुजान।बच्चों के इस कार्य से, बाधित है उत्थान॥बाधित है उत्थान, बालपन कोमल होता।शिक्षा से रह दूर, नित्य ही सबकुछ खोता॥धर लें उत्तम मार्ग, बढ़ें वे नित पढ़-लिखकर।होवे पूर्ण निषेध, इसे सब रोकें मिलकर॥ उत्तम जीवन हम गढ़ें, यही हमारा फर्ज।शिक्षा के शुभ मार्ग में, नाम करायें … Read more

तपस्या

डॉ.सरला सिंह`स्निग्धा`दिल्ली************************************** कहते जग में लोग हैं, माँ हैं बहुत महान।पापी भी तरते यहाँ, पूजे सकल जहान॥पूजे सकल जहान, जगत जयकारा करता।आता जो दरबार, उसी की झोली भरता॥पाते दया महान, शरण में जो हैं रहते।दया सिंधु है मात, जगत में सब हैं कहते॥ परिचय-आप वर्तमान में वरिष्ठ अध्यापिका (हिन्दी) के तौर पर राजकीय उच्च मा.विद्यालय … Read more