हरियाली तीज, रीत-प्रीत मनुहार
बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** हरियाली हर हार में, पावस की मनुहार।प्रीत मिलन उपहार है, झूलों का त्योहार॥झूलों का त्योहार, सखी सब संगत झूले।पिय हिय की विज्ञात, मोद मन ही मन फूले॥कहे ‘विज्ञ’ कविराय, बसे हिय में वनमाली।सखियाँ समझें और, बसे हरि मन हरियाली॥ सावन की शुभ तीज है, आए हैं भरतार।मन चाही मन की हुई, रीत प्रीत … Read more