मेरे अस्तित्व का रूप
डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* इस अनिश्चित जग में,मैं ठहर जाती हूँकुछ अनजान भय से। निरंतर काम करने,के बाद मैं दौड़ जाती हूँसुनसान पड़े खाली घर में। उस भरी महफ़िल में,रिश्तेदारों और दोस्तों से भरीअपने-आपको अकेला पाती हूँ। खूबसूरत-सी जगह पर,हँसी-मजाक के बीचखुशी को ढूंढती हूँ आस-पास। कठिन परिश्रम, निष्ठा और त्याग,के बावजूद मेरी परछाई हैमेरे … Read more