रोज़-डे
पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ललिता अपनी बॉलकनी में खड़ी हुई थी, तभी निगाह अपने घर के सामने रहने वाली धरा के कमरे में पड़ गई। वहाँ आज ‘रोज़-डे’ के अवसर पर शिशिर, धरा को रोज़ का बुके देने के बाद पत्नी को आलिंगनबद्ध करते देख कर वह स्वयं भी अपने प्रियतम से रोज़ के बुके लेकर … Read more