प्रकृति के उपहार
सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** धरती नदियाँ और पहाड़देते हमको निशदिन ज्ञान,सहनशीलता धरती जैसीअडिग रहो पर्वत के जैसे,नदियों सी तुम बना के राहचलो सोच कर जहाँ हो चाह। वृक्ष सिखाते ले लो ज्ञानसदा नम्र हो तव व्यवहार,बिन माँगे तुम देना सीखोमधुर-मधुर वाणी उच्चार,खिल-खिल कर फूल ये कहतेहँस कर सह लो शूल का वार। दिनकर की देखो तुम … Read more