सिर्फ कहने भर का साथ

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** भीड़ में खड़े लोग,अक्सर भरोसे की बातें करते हैंवे कहते हैं—“हम तुम्हारे साथ हैं।” लेकिन यह साथ,सिर्फ शब्दों की सतह पर ठहरा रहता हैजब जीवन की सड़क,अचानक पत्थरों से भर जाती है। जब भीतर का साहस,धीरे-धीरे टूटने लगता हैतब वही लोग,अपनी आँखें दूसरी ओर मोड़ लेते हैं। दु:ख के समय,सबसे अधिक सुनाई … Read more

प्रेम की पराकाष्ठा ‘राधा-कृष्ण’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राधा अन्तर्मन में दीप जलाकर श्याम सुधा बरसाती है,मुरली की मधुरिम तानों में नित प्राण-पुष्प महकाती हैवृन्दावन की रज में डूबा हर कण प्रेम-पुजारी बनता,कृष्ण नयन की चंचल छाया जग में नेह जगाती है। यमुना तट पर रास रचाकर मधुबन सुगीत सुनाता है,राधिका का अनुराग सलोना कान्हा हृदय लुभाता … Read more

बहन की पहचान

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ झारखंड की एक छोटी-सी बस्ती में एक टूटा-फूटा घर था। उस घर में २ छोटे-छोटे बच्चे रहते थे — गगन और तावारी। ‘गगन’ छोटा भाई था, ‘तावारी’ बड़ी बहन।  अचानक एक हादसे ने दोनों के सिर से माँ-बाप का साया छीन लिया। दोनों अनाथ हो गए।       तावारी बचपन से ही घर-घर जाकर … Read more

हूँ माँ की लिखावट

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माँ एक छोटा-सा, प्यारा-सा अंश निराला,जिसमें समाया अनुपम ब्रह्मांड निरालामाँ को अपनी ममता-प्रेम लुटाने में नहीं होती थकावट,मैं माँ के लिए क्या लिखूँ, मैं हूँ माँ की लिखावट…। माँ भोली है, अद्भुत छवि वाली है,माँ की मूरत जैसे दूसरी कोई नहीं होने वाली हैसजल नयनों … Read more

करती उजाला पुस्तक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पुस्तक दीप-सी हर मन में उजाला करती है,ज्ञान का सूरज जीवन में सवेरा भरता हैपन्नों में छुपा है चतुर्युगों का गू़ढ़ अनुभव,पाठक का हर संशय पल में दूर करती है। हर किताब ज्ञान नया संसार खड़ा करती है,सूखी सोच में भी भावों पुण्य जल भरती हैशब्दों में रचा हुआ … Read more

करना नहीं पाखंड

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* असली बनकर ही रहो, करना नहीं पाखंड।वे ही पाखंडी बनें, जिनके संग घमंड॥ मत करना पाखंड तुम, वरना हो अवसान।विनत भाव धारण करो, होगा तब उत्थान॥ मूर्ख करे पाखंड नित, ऐंठ दिखाए ख़ूब।आने वाले काल में, वह जाएगा डूब॥ बनो संत सच्चे सदा, नहीं करो पाखंड।वरना गिरना जान लो, कोई नहीं … Read more

रोशनी अपनों से है

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* अंधियारे में रोशनी चिरागों से होती है,ज़िंदगी में रोशनी सच्चे अपनों से होती है। माना झूठा, फरेबी, भ्रष्ट, बेईमान है संसार,पर कुछ तो सच्चे-अच्छे दोस्त भी हैं यार। बुझा दो उन चिरागों को,जो स्वार्थ, द्वेष और कपट से जलते हैं। जोत से जोत जलाओ उन चिरागों की,जो सद्भावना, वफादारी, कर्तव्य के … Read more

ममता से प्यारी इज्ज़त

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ अपने ही खून से सींचा था, माँ ने उस भ्रूण को जिया थानौ महीने हाथों से पेट सहलाया था, प्यार किया, दुलार दिया, पूरा ध्यान दिया था। पर जब माँ ने नवजात किन्नर को जन्म दिया, किसे पता था कि कोख से एक ‘किन्नर’ जन्मामाँ की ममता वहीं बिखर गई, असहाय होकर ममता भी मजबूर हो … Read more

उड़नछल्लो

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ये उड़नछल्लो बनकर कहाँ चल दी ? कुछ अता-पता बता कर जाएगी ? पूछूँगी तो कहोगी- क्या अता-पता बताऊँ ?तुम्हारा जमाना गया,अब हमारा जमाना है हम लड़कियाँ क्या किसी से कम हैं ?  हाँ, हाँ, मानते हैं,तुम लड़कियाँ किसी से कम नहीं होअब तो तुम लड़कों के भी कान कतरने लगी होकिसी से कम नहीं…तो इसका … Read more

अम्मा तुम बहुत याद आती हो…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)…. अम्मा तुम बहुत याद आती हो,एक साल बीत गया…लगता है जैसे कल ही,तो तुमसे बात करी थीकितनी शांत और चैन कीनींद सो रही थीं,मानों कोई तपस्विनीमस्तक पर चंदन का टीका लगा कर,योगनिद्रा में ध्यान लगा रही होअम्मा तुम मुक्त हो गई,सांसारिक बंधनों से, शारीरिक कष्टों सेमृत्यु तो जीवन का शाश्वत … Read more