१९८४ का वो खौफनाक मंजर

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** “उफ्फ कितना भयानक मंजर था वह।”“किसकी बात कर रही हो आंटी ?”सुधा एकदम जैसे सपनों से जागी और बोली कि बस उस दिन को याद कर रही हूँ।“किस दिन को ?”“३१ अक्टूबर सन् १९८६ का दिन था बेटा। उसी दिन तेरे अंकल की पदोन्नति हुई थी। इंदिरा गांधी की हत्या कर दी … Read more

नव वर्ष का उपहार

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ सुमित्रा की आँखों से अश्रुधारा निरंतर बह रही थी, आज वह बेसहारा हो गई थी। नीरा आंटी आज अचानक रात में सोईं तो सोती रह गई। उसके सिर के ऊपर से छत छिन गई थी। उसकी पालनहार आज दुनिया से विदा हो गईं थीं। वह उसे बेटी की तरह मानती थीं, कई … Read more

वेनेज़ुएला संकटःकार्रवाई में नियंत्रण की साम्राज्यवादी सोच

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** वेनेज़ुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है, कि क्या अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था वास्तव में नियम-कानूनों से संचालित होती है या फिर ताकतवर राष्ट्रों की इच्छा ही वैश्विक न्याय का नया मानदंड बन चुकी है। निश्चित तौर पर वेनेज़ुएला पर … Read more

नया साल नया उत्साह लाया

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… हर कोई ज़िन्दगी में सफ़र करता है, क्योंकि जीवन की कहानी भी यही है। चलना ही सच की निशानी है। समय-चक्र भी दिन, महीने, साल के बीत गए। नई उमंग, नए विचार नया-नया लगता है यहाँ संसार। “दादा भाई चलते हैं” कहीं … Read more

सुख-शांति के लिए लें संकल्प

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… २०२५ बीत गया…। कैलेण्डर बदल जाता है, साथ में हर दिन कुछ खट्टी-मीठी यादों को देकर जाता है… क्योंकि कालचक्र तो अनवरत् गतिमान रहता है….वर्ष २०२६ का आगमन हो चुका है… नववर्ष अपने साथ बहुत सारी उम्मीदें और सपने लेकर आता है, इसी लिए … Read more

अवसर है अनुत्तरित सवालों से ईमानदारी से जूझने का

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… एक और वर्ष इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। वर्ष २०२५ केवल कैलेंडर का एक अंक नहीं था, बल्कि वह घटनाओं, चेतावनियों, उपलब्धियों और विडंबनाओं का ऐसा संगम रहा, जिसने समाज, राजनीति और विकास की हमारी समूची अवधारणाओं को कठघरे में खड़ा … Read more

नीला रूमाल

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सुबह की धुंध में लिपटा छोटा-सा कस्बा था। चौक पर तिरंगा फहराने की तैयारी हो रही थी। बच्चे लाइन में खड़े अभ्यास कर रहे थे। उसी भीड़ में खड़ा था १२ वर्ष का रवि, जिसकी आँखों में आज कुछ अलग चमक थी। उसके पास विद्यालय की पुरानी नीली वर्दी … Read more

संवेदनशीलता नहीं, अब दिखावा

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* कितनी अजीब बात है न… कि दु:ख प्रदर्शित करने के लिए सच्ची संवेदना नहीं, आपकी उपस्थिति आवश्यक है… भले ही जीते जी आपने किसी रिश्तेदार को कभी वक्त न दिया हो…, कभी फोन पर हालचाल न पूछा हो…, कभी कोई जरूरी मदद न की हो, किंतु… किसी व्यक्ति के दुनिया से … Read more

प्रतिदिन हो संकल्प का अभिनंदन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)…. नववर्ष का स्वागत हम प्रायः एक तिथि, एक रात, कुछ शुभकामनाओं और उत्सवों तक सीमित कर देते हैं, परंतु क्या परिवर्तन सचमुच केवल कैलेंडर के पलटने से होता है ? वास्तविक नववर्ष तब जन्म लेता है, जब हमारी चेतना हर श्वांस … Read more

कुरीतियों के जाल में वर्तमान युग

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* विकास के शीर्ष पर खड़े होकर जब नज़र घुमाती हूँ तो चमचमाते अनेक प्रशंसनीय पायदानों के नीचे कहीं, अंधेरी… कालिख पुती हुई कुरीतियाँ दृष्टिगोचर होती है। कुछ तो इतनी अविश्वसनीय और हेय होती है कि, आज की उपलब्धियों, सफलताओं पर यक़ीन करना, प्रसन्न होना मुश्किल हो जाता है। मन इतना उचट … Read more