सार्थक चिंतन की ओर बढ़ें

राधा गोयलनई दिल्ली*************************************** यह तो हमें ही तय करना है, कि हम केवल चिंतन की चिंता करते रहें या उस पर कुछ अमल भी करें ? जो करना है, उसकी केवल चिंता करने से तो काम नहीं होगा। काम तो अमल करने से ही होगा। कुछ लोग ऐसे हैं, जो समस्या पर सिर्फ चिंता ही … Read more

अनुपम स्नेह और आत्मीयता का मिलन पर्व था वियतनाम अधिवेशन

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)******************************************** यात्रा वृत्तांत… यात्रा चाहे जीवन की हो या किसी स्थान की, अनन्य और अप्रतिम होती है। मानव एक जिज्ञासु प्राणी है और नए-नए स्थान को देखना, उसके सौंदर्य को परखना व्यक्ति को अनुपम सुख प्रदान करता है। जहाँ तक मेरा प्रश्न है, मैं एक पैर से निरन्तर यात्रा के लिए तैयार रहती … Read more

मन से अमीर रहिए

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)******************************************** सतरंगी दुनिया-३३… हमारे समाज को सब पता है कि कौन किसके साथ घूम रहा है, किसकी बहू, बेटी कहाँ जा रही है, और किसके बेटे का कहाँ लफड़ा है ?, लेकिन किसके घर आज खाना नहीं बना, ये समाज को नहीं पता और न ही जानना चाहते हैं। शेर … Read more

समय

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** सुशील ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था, तभी मोबाइल की घंटी बजी। स्क्रीन पर माँ का फोटो उभरा था। माँ को तो कोई काम नहीं है, वक्त बेवक्त फोन खटखटा देती हैं। काफी देर तक घंटी बजती रही, लेकिन वह आराम से तैयार होता रहा। वह जानता था, कि उनके पास … Read more

हाँ, मैंने भी अंग्रेजी के नेमप्लेटों पर कालिख पोती थी…

प्रो. सुभाष शर्मामेलबोर्न****************************** आज मैं ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर में रहता हूँ। एक इंजीनियर हूँ; और ऑस्ट्रेलिया की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी में पढ़ाता हूँ|  यहाँ रहते हुए हर काम अंग्रेजी मे करता हूँ। अंग्रेजी बोलता हूँ, अंग्रेजी पढ़ता हूँ और अंग्रेजी ही लिखता हूँ।आज यूँ ही बैठे-बैठे एक स्मृति-चित्र अचानक स्मृति पटल पर उभर … Read more

स्वप्रेरित प्रकटीकरण से होगा लोकतंत्र अधिक पारदर्शी

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** सूचना का अधिकार अधिनियम… भारतीय लोकतंत्र ने ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ २००५ के माध्यम से नागरिकों को शासन में भागीदारी का एक ऐसा संवैधानिक औजार प्रदान किया, जिसने पहली बार यह स्पष्ट किया कि सरकारी सूचनाएँ सरकार की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की धरोहर हैं। यह कानून केवल सूचना प्राप्त … Read more

माँ की यादें

राधा गोयलनई दिल्ली*************************************** मुझे अपनी माँ की बहुत-सी बातें याद हैं। प्यार, हुनर, अक्लमंदी और सीख बहुत याद आती है। आज उन्हीं की शिक्षा के कारण हम ससुराल में अपने दायित्व को पूरी तरह से निभा पा रहे हैं। हमारी माँ को अपने सास-ससुर का प्यार कभी नहीं मिला। हमें कभी याद नहीं आता, कि … Read more

युवाओं को को बचना होगा नशे के जाल से

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** आजकल युवाओं में धूम्रपान और अन्य तरह के नशे का आकर्षण चिंताजनक रूप से  बढ़ता जा रहा है। इन किशोर एवं युवा बच्चों को इस तरह की हर चीज एक क्लिक पर मिल जाती है। ऐसी स्थिति में उनके मन में धैर्य और संयम जैसे शब्दों का उनके शब्दकोष में कोई स्थान नहीं होता। जरा-सी निराशा … Read more

मूसलाधार बारिश

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** सारी रात मूसलाधार बारिश ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। बादल की भयंकर गर्जना और बिजली की चमक के कारण रात में कई बार चौंक कर मानसी उठ बैठी थी। सुबह ही उसको नींद लगी थी।   सुबह के ६ बजे थे। हल्का-हल्का उजियारा होना शुरू ही हुआ था।  मौसम थोड़ा ठंडा भी हो रहा था। … Read more

मंदिरों में हो सुशासन का सूत्रपात

ललित गर्गदिल्ली******************************* भारत की पहचान केवल उसकी प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक दर्शन से नहीं है, बल्कि उन मंदिरों से भी है जो करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और जीवन का आधार हैं। अयोध्या का श्रीराम मंदिर, बद्रीनाथ धाम, माता वैष्णोदेवी, तिरुपति, काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, सालासर बालाजी, खाटू श्यामजी जैसे मंदिर केवल धार्मिक स्थल … Read more