नेता जी और जनता जनार्दन की अमर प्रेम कथा…

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** नेता जी और जनता जनार्दन की अमर प्रेम कथा का किस्सा बड़ा पुराना है। इस देश में २ चीजें कभी खत्म नहीं होतीं, एक तो हमारी उम्मीद और दूसरे नेता जी के वादे। दोनों अमर हैं, दोनों अविनाशी हैं, दोनों हर ५ साल में नया अवतार लेकर आ जाते हैं।   हमारे … Read more

समझें कृष्ण का प्रकृति प्रेम

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** जलवायु परिवर्तन, तापमान में वृद्धि, अनियमित मानसून, सूखते जलस्त्रोत और लुप्त होती  जैव-विविधता के रूप में पर्यावरण की मुश्किलें आज हमारी चर्चा का मुख्य विषय बन चुकी हैं। ऐसी स्थिति में भगवान् कृष्ण का जीवन दर्शन हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ संतुलन बना कर जीवन जीना किसी तरह का त्याग नहीं है, … Read more

राखी का कर्ज़

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रक्षाबंधन की सुबह थी। आँगन में तुलसी के पास दीपक जल रहा था। सिया ने थाली सजाई—रोली, अक्षत, दीप और वर्षों पुरानी वह राखी, जिसे उसने इस बार बहुत सँभालकर रखा था।   उसका छोटा भाई मोहन शहर में दिहाड़ी मजदूरी करता था। पिता के निधन के बाद घर की … Read more

शिक्षा नियुक्ति ही नहीं, मुक्ति का माध्यम बने

ललित गर्गदिल्ली***************************** शिक्षक दिवस (५ सितम्बर) विशेष… शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों के सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा-दृष्टि, शिक्षक की भूमिका और भावी पीढ़ी के निर्माण पर गंभीर आत्ममंथन का दिन है। किसी राष्ट्र का भविष्य केवल उसके विद्यालयों की संख्या, भवनों की भव्यता, पुस्तकों की उपलब्धता या परीक्षाओं के परिणामों से निर्धारित … Read more

काले कानूनों से कब मिलेगी पूरी मुक्ति ?

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** अंग्रेज चले गए, भारत स्वतंत्र हो गया, लेकिन औपनिवेशिक दौर के अनेक कानून आज भी किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। १५ अगस्त १९४७ को भारत ने राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त की, पर स्वतंत्रता के बाद अनेक पुराने कानून जारी रहे और समय-समय पर उनमें संशोधन हुए। समस्या तब पैदा होती … Read more

प्राकृतिक असंतुलन है ज्यादा बादल फटने की वजह

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** जब किसी इलाके में एक निश्चित अवधि में अधिक बारिश होती है, तो उसे बादल फटना कहते हैं।       आईएमडी के अनुसार यदि २० या ३० वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में १०० मिलीमीटर बारिश होती है तो उसे बादल फटने की घटना कहा जाता है। उत्तराखंड में बादल फटना एक बेहद खतरनाक और … Read more

नेपाल त्रासदी:भारत को सबक लेने की जरूरत

ललित गर्गदिल्ली***************************** नेपाल में २६ अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और हिमस्खलन ने एक बार फिर यह कठोर सत्य सामने ला दिया है, कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ और पहाड़ों की संवेदनशीलता की अनदेखी मानव सभ्यता के लिए कितनी भारी पड़ सकती है। भोटेकोशी नदी तंत्र में हिम खंड (ग्लेशियर) के बड़े हिस्से के टूटने, … Read more

सांख्य दर्शन:बाह्य जगत् के साथ सूक्ष्म विश्लेषण भी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भारतीय दार्शनिक परम्परा में सांख्य दर्शन को अत्यन्त प्राचीन, तर्कप्रधान और विश्लेषणात्मक दर्शन माना जाता है। ‘सांख्य’ का सामान्य अर्थ है—तत्त्वों का सम्यक् ज्ञान अथवा गणना। महर्षि कपिल को इसका आदि प्रवर्तक माना जाता है। सांख्य का मूल प्रयोजन केवल जगत् की व्याख्या करना नहीं, बल्कि मनुष्य को दुःखत्रय … Read more

ए.आई.:बुद्धिहीन बुद्धिमत्ता का व्यापार

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) के बारे में अक्सर यह कहा जाता है, कि यह भविष्य की तकनीक है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की हालिया चेतावनियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि इसे जान-बूझकर सुधारा नहीं गया तो यह भविष्य नहीं, बल्कि अतीत के भेदभाव को ही नई गति दे देगी। यह … Read more

नारी की रक्षा नहीं, सामर्थ्य का सम्मान हो

ललित गर्गदिल्ली****************************** रिश्तों का रक्षा-बंधन (रक्षाबंधन विशेष)… रक्षाबंधन केवल कलाई पर बंधा हुआ एक धागा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस विराट चेतना का प्रतीक है जिसमें प्रेम, विश्वास, दायित्व, आत्मीयता और संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लेकिन बदलते समय में इस पर्व के अर्थ को भी नए सिरे से समझने की जरूरत है। … Read more