पांडेय जी और दिल की दिल्लगी
लालित्य ललितदिल्ली*********************************** हुआ क्या चुनांचे! दिल है मांगे कुछ, सोचे कुछ। पांडेय जी ने कई दिनों से अपनी गाड़ी सड़क पर नहीं निकाली, जब से मेट्रो से दिल लगा बैठे। फिर क्या हुआ, वह बता दें आपको।सड़क पर पांडेय जी थे और उनकी गाड़ी। आज उनका मन गाड़ी में नहीं लगा, क्योंकि डैश बोर्ड पर … Read more