भारत की नई डिजिटल नीति की असली परीक्षा

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** डिजिटल मीडिया का युग मूलतः ‘गति’ का युग है-खबरें सेकंडों में फैलती हैं, प्रतिक्रियाएँ मिनटों में बनती हैं, और जनमत कई बार घंटे भर में दिशा बदल लेता है। इसी तेज़ रफ्तार के बीच अब एक नई शक्ति निर्णायक बनकर उभरी है-कृत्रिम मेधा के सहारे बनी सामग्री, खासकर ‘डीपफेक’ और सिंथेटिक … Read more

एक अधूरा आदमी

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** आज सुबह से ही उसे लक्ष्मी याद आ गई। उस समय एक चोका था, सबसे पहले वह खाने का भोग ठाकुर जी को लगाती थी… उसकी घंटी की आवाज सुन कर सभी अनुमान लगा लेते थे, कि ठाकुर जी को भोग लग गया, अब खाना मिलेगा !जब वह पूजा करने … Read more

चाईनीज माल

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** राकेश एक प्रतिभाशाली छात्र था। हर कक्षा में मेरिट में आता था।कॉलेज की पढ़ाई में भी उसका नाम प्रावीण्य सूची में आया और उसको अपनी पढ़ाई विदेश में करने के लिए छात्रवृति मिली। राकेश पढ़ाई के लिए चीन चला गया। शिजू नामक एक चायनीज छात्रा भी उसके साथ पढ़ती … Read more

‘छू लिया आसमां’ अपराध, प्रेम और विश्वासघात का जटिल ताना-बाना

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** समीक्षा…. साहित्य की दुनिया में कुछ लेखक ऐसे होते हैं जो मनोरंजन ही नहीं करते, बल्कि पाठकों को सामाजिक हकीकत से भी रूबरू कराते हैं। लियाकत मंसूरी एक ऐसा ही नाम बन चुके हैं, जिन्होंने रोमांचक लेखन शैली से हिंदी क्राइम थ्रिलर पाठकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई … Read more

भारत की सामाजिक चेतना पर बढ़ता संकट ‘आर्थिक असमानता’

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** भारत विविधता में एकता का संदेश देने वाला देश है, लेकिन यही देश वर्तमान में आर्थिक असमानता जैसी चुनौती से जूझ रहा है जो सामाजिक न्याय, अवसरों की बराबरी और समावेशी विकास को चुनौती दे रही है। ‘विश्व असमानता रिपोर्ट २०२६’ के ताज़ा निष्कर्षों के अनुसार भारत में संपत्ति और आय … Read more

बंगाल:भविष्य धर्म की लहर या प्रगति की राह ?

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, पर राजनीतिक रणभेरी बज चुकी है। इस बार संकेत साफ हैं-चुनाव विकास बनाम विकास के दावे पर नहीं, बल्कि पहचान, अस्मिता और धर्म की ध्वजा के इर्द-गिर्द घूम सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर … Read more

शाकाहारी भोजन ही श्रेष्ठ

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ शाकाहारी भोजन हमारे शरीर की मूलभूत आवश्यकता है। स्वस्थ शरीर के लिए शाकाहारी भोजन अमृत के समान है। आज विश्व में बढ़ते अत्याचार, मार-काट, हिंसा की इस एक लहर-सी चल पड़ी है, वहीं मनुष्य में दया, प्रेम, मानवता के खत्म होने का मुख्य कारण मांसाहार और मदिरापान है। भारतीय संस्कृति … Read more

उम्र को हावी न होने दें

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ आजकल अनेक महिलाएं अपने घर की दहलीज पार कर नौकरी या व्यवसाय में व्यस्त हैं, परंतु अभी भी बहुत-सी महिलाओं की बड़ी आबादी ऐसी है, जो गृहिणी कहलाती है। यह सुबह से रात तक घरेलू कामों में लगी रहती हैं। झाड़ू पोंछा, बर्तन, खाना आदि कामों में व्यस्त रहने के कारण उन्हें … Read more

मिलकर रचनी होगी संवेदना की संस्कृति

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बेटियाँ किसी समाज की संवेदना का दर्पण होती हैं। जहाँ बेटियाँ सुरक्षित, शिक्षित और स्वायत्त हैं-वहाँ सभ्यता की जड़ें गहरी होती हैं, पर विडंबना यह है कि आधुनिक प्रगति के दावों के बीच आज भी अनेक बेटियाँ असमानता, हिंसा और अवसर-वंचना का भार ढो रही हैं। ‘बेटी बचाओ’ जैसे … Read more

एआई:नवाचार की गति और नियंत्रण के बीच संतुलन की चुनौती

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** कृत्रिम मेधा (एआई) का विकास इक्कीसवीं सदी की सबसे तेज़ और प्रभावशाली तकनीकी प्रक्रियाओं में से एक है। कुछ ही वर्षों में एआई ने उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त, रक्षा और मीडिया-हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह तकनीक उत्पादकता बढ़ा रही है, जटिल समस्याओं का समाधान सुझा रही है … Read more