जीत से उभरी नई उम्मीदें और गहरी चुनौतियाँ

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** बिहार का यह चुनाव केवल एक राजनीतिक मुकाबला नहीं था, बल्कि लोकतंत्र की चेतना, जनता के विश्वास और नेतृत्व की विश्वसनीयता को परखने का अवसर भी था। परिणाम जिस तरह सामने आए, उन्होंने न केवल बिहार;बल्कि पूरे देश एवं दुनिया को चौका दिया। यह जीत केवल गठबंधन की सामूहिक ताकत की नहीं, … Read more

सीमा सड़क संगठन द्वारा राष्ट्रपति के आदेशों का सतत उल्लंघन

प्रति, माननीय संयुक्त सचिव,राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय,भारत सरकार, नई दिल्ली-११०००१ विषय:-सीमा सड़क संगठन द्वारा राजभाषा अधिनियम १९६३, राजभाषा नियम १९७६ तथा राष्ट्रपति के आदेशों का सतत उल्लंघन। महोदय, सविनय निवेदन है, कि सीमा सड़क संगठन (रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख विभाग) द्वारा राजभाषा अधिनियम १९६३ की धारा ३(३), राजभाषा नियम १९७६ के नियम ५, … Read more

प्राधिकरण द्वारा संघ की राजभाषा नीति का खुला उल्लंघन

सेवा में,संयुक्त सचिवराजभाषा विभाग, गृह मंत्रालयएनडीसीसी-II भवन, ‘बी’ विंग, चौथा तल, जय सिंह रोड, नई दिल्ली – ११०००१ई-मेल : jsol@nic.in विषय:-पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा राजभाषा हिंदी के अनुपालन में विफलता की शिकायत। महोदय, सादर निवेदन है कि मैं पत्र के माध्यम से पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा राजभाषा नीति और … Read more

संवेदना

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ आरवी और गर्व दोनों में दोस्ती थी। उन दोनों के बीच क्लास में प्रथम पोजीशन के लिए हमेशा कॉम्पीटिशन रहता था। इधर, कुछ दिनों से गर्व को बार-बार बुखार आ जाता था। वह कमजोर भी होता जा रहा था। जब उसके पापा ने उसको दिल्ली ले जाकर सब टेस्ट कराए तो मालूम … Read more

फिर से मनुष्य बनें, करुणा जगाएं

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘विश्व दयालुता दिवस’ (१३ नवम्बर) विशेष… आज का मनुष्य जितनी तीव्रता से भौतिक प्रगति कर रहा है, उतनी ही तेजी से मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं से दूर होता जा रहा है। विज्ञान ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, परंतु उसने मनुष्य को आत्मकेंद्रित भी कर दिया है। प्रतिस्पर्धा, उपभोगवाद, स्वार्थ और सत्ता … Read more

आत्मघाती होती शिक्षा प्रणाली

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** भारत की शिक्षा प्रणाली को लेकर समय-समय पर प्रश्न खड़े होते रहे हैं। शिक्षा की विसंगतियों एवं दबावों के चलते भी अनेक सवाल खड़े हैं। इन्हीं से जुड़ा यह एक बेहद हृदय विदारक और चिंताजनक तथ्य है कि एक वर्ष देश में लगभग १४ हजार शालेय बच्चों ने आत्महत्या कर ली। इस … Read more

‘रेवड़ी संस्कृति’ लोकतंत्र का आधार नहीं

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** बिहार की राजनीति एक बार फिर चुनावी रंग में रंग चुकी है। हर चुनावी सभा में, गली-मोहल्ले से लेकर सोशल मीडिया तक मुफ्त रेवड़ियों की घोषणाओं और वादों की बाढ़ आई हुई है। यह चुनावी मौसम पहले की तरह इस बार भी ‘रेवड़ी संस्कृति’ से सराबोर है। महागठबंधन हो या एनडीए-दोनों गठबंधन … Read more

वृद्धाश्रम… ५० करोड़…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ट्रि.ट्रि.ट्रि…“अरे, सुयश आज इतने दिनों बाद मेरी याद कैसे आ गई ?’सौम्या कैसी हो तुम ?’’“मैं तो ठीक हूँ, सीधे-सीधे काम की बात करो।‘’“एक प्लान है, उसके लिए मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत है।‘’“साफ-साफ बोलो, भूमिका न बनाओ।‘’“मेरे पास एक बिल्डर आया था। वह अपनी कोठी और बगीचे को तोड़ कर उस … Read more

आखिर क्यों ? स्त्री को कम आँकते…

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** हमारे समाज में ‘स्त्री’ शब्द जितना कोमल है, उसकी स्थिति उतनी ही जटिल रही है। युगों से स्त्री ने हर क्षेत्र में अपनी योग्यता, संवेदना और शक्ति का परिचय दिया है-फिर भी उसे अक्सर ‘कमतर’ समझा जाता है। प्रश्न उठता है-आखिर क्यों ? लंबे समय तक स्त्रियों की आर्थिक निर्भरता ने उन्हें … Read more

घोषणा-पत्रःलोकतंत्र का सशक्त हथियार या चुनावी छलावा ?

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** बिहार विधानसभा चुनाव में दोनों ही गठबंधनों ने बढ़-चढ़कर लोक-लुभावनी और जनता को आकर्षित या गुमराह करने वाली घोषणाओं से जुड़े चुनावी घोषणा पत्र जारी किए हैं। जिस तरह की घोषणाएं की गई हैं, वे निश्चित रूप से अतिशयोक्तिपूर्ण हैं। यह प्रश्न अब गंभीर हो गया है कि क्या घोषणा पत्र लोकतंत्र … Read more