‘परफेक्ट बहू’ का भूत

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)********************************** राधिका की तबियत खराब थी, इसलिए निशा अपनी सहेली का हाल-चाल लेने आई थी। राधिका उससे फोन पर अपनी बहू नैना की बहुत तारीफ किया करती थी।हर समय यही कहती, कि मेरी बहू तो परफेक्ट बहू है।जब नीरज की शादी हुई थी, तब वह इंडिया में नहीं थी। अब तो उसकी शादी … Read more

जल संकट: असंतुलित प्रबंधन से अस्तित्व पर मंडराता खतरा

ललित गर्गदिल्ली******************************* जल केवल प्रकृति का उपहार नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व का आधार है। पृथ्वी पर जीवन की कल्पना जल के बिना असंभव है, फिर भी विडंबना यह है कि जिस जल को हमारी संस्कृति ने देवत्व प्रदान किया, उसी के प्रति हमारा व्यवहार सबसे अधिक लापरवाह है। आज देश और दुनिया की … Read more

कमियाँ मिटाकर लौटाना होगा विश्वास

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)**************************************** ‘नीट’ विवाद-आंदोलन…    भारत के लिए कहा जाता है कि यहाँ युवा ही भविष्य है, पर ‘नीट’,  पेपर लीक और आंदोलनों के बीच सबसे बड़ा सवाल है कि – “क्या मेहनत अब भी सबसे बड़ा आधार है ?” यह कहना तर्कसंगत है, कि भारत में प्रतियोगी परीक्षाएं केवल एक परीक्षा नहीं, … Read more

स्वतंत्रता और मर्यादा का संतुलन आवश्यक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रत्येक लोकतांत्रिक राष्ट्र की आधारशिला है। यह प्रत्येक नागरिक को अपने विचार, भावनाएँ, मत तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति को निर्भय होकर व्यक्त करने का अधिकार प्रदान करती है। इसी स्वतंत्रता के कारण समाज में नवीन विचारों का आदान-प्रदान होता है, लोकतंत्र सशक्त बनता है तथा सामाजिक, सांस्कृतिक … Read more

सार्थक चिंतन की ओर बढ़ें

राधा गोयलनई दिल्ली*************************************** यह तो हमें ही तय करना है, कि हम केवल चिंतन की चिंता करते रहें या उस पर कुछ अमल भी करें ? जो करना है, उसकी केवल चिंता करने से तो काम नहीं होगा। काम तो अमल करने से ही होगा। कुछ लोग ऐसे हैं, जो समस्या पर सिर्फ चिंता ही … Read more

अनुपम स्नेह और आत्मीयता का मिलन पर्व था वियतनाम अधिवेशन

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)******************************************** यात्रा वृत्तांत… यात्रा चाहे जीवन की हो या किसी स्थान की, अनन्य और अप्रतिम होती है। मानव एक जिज्ञासु प्राणी है और नए-नए स्थान को देखना, उसके सौंदर्य को परखना व्यक्ति को अनुपम सुख प्रदान करता है। जहाँ तक मेरा प्रश्न है, मैं एक पैर से निरन्तर यात्रा के लिए तैयार रहती … Read more

मन से अमीर रहिए

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)******************************************** सतरंगी दुनिया-३३… हमारे समाज को सब पता है कि कौन किसके साथ घूम रहा है, किसकी बहू, बेटी कहाँ जा रही है, और किसके बेटे का कहाँ लफड़ा है ?, लेकिन किसके घर आज खाना नहीं बना, ये समाज को नहीं पता और न ही जानना चाहते हैं। शेर … Read more

समय

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** सुशील ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था, तभी मोबाइल की घंटी बजी। स्क्रीन पर माँ का फोटो उभरा था। माँ को तो कोई काम नहीं है, वक्त बेवक्त फोन खटखटा देती हैं। काफी देर तक घंटी बजती रही, लेकिन वह आराम से तैयार होता रहा। वह जानता था, कि उनके पास … Read more

हाँ, मैंने भी अंग्रेजी के नेमप्लेटों पर कालिख पोती थी…

प्रो. सुभाष शर्मामेलबोर्न****************************** आज मैं ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर में रहता हूँ। एक इंजीनियर हूँ; और ऑस्ट्रेलिया की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी में पढ़ाता हूँ|  यहाँ रहते हुए हर काम अंग्रेजी मे करता हूँ। अंग्रेजी बोलता हूँ, अंग्रेजी पढ़ता हूँ और अंग्रेजी ही लिखता हूँ।आज यूँ ही बैठे-बैठे एक स्मृति-चित्र अचानक स्मृति पटल पर उभर … Read more

स्वप्रेरित प्रकटीकरण से होगा लोकतंत्र अधिक पारदर्शी

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** सूचना का अधिकार अधिनियम… भारतीय लोकतंत्र ने ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ २००५ के माध्यम से नागरिकों को शासन में भागीदारी का एक ऐसा संवैधानिक औजार प्रदान किया, जिसने पहली बार यह स्पष्ट किया कि सरकारी सूचनाएँ सरकार की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की धरोहर हैं। यह कानून केवल सूचना प्राप्त … Read more