राष्ट्रप्रेम के ओजस्वी स्वरों से गुंजायमान हुई काव्य गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)। हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार ने भारत माता के प्रति समर्पित भावनाओं से ओत-प्रोत २४०वीं साप्ताहिक काव्य गोष्ठी का आयोजन ‘देशभक्ति- राष्ट्रप्रेम’ विषय पर अत्यंत गरिमामय वातावरण में किया। इसमें विविध प्रांतों से जुड़े प्रबुद्ध साहित्यकारों ने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण और राष्ट्रनिष्ठ रचनाओं से … Read more

सरकारी प्राथमिक शिक्षा प्रणाली में सुधार की महती आवश्यकता

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** भारत की शिक्षा व्यवस्था की सबसे मजबूत और सबसे संवेदनशील कड़ी प्राथमिक शिक्षा है। यहीं से किसी भी बच्चे के बौद्धिक, सामाजिक और नैतिक विकास की नींव रखी जाती है। यदि यह आधार मजबूत हो, तो आगे की शिक्षा और जीवन की चुनौतियाँ अपेक्षाकृत सरल हो जाती हैं; यदि यह आधार … Read more

लूट रहे प्रबंधन संग ठेकेदार

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं, देखो यह संसार,एम.टेक. डिग्री लिए भी हैं युवक लाचारपाँच हजार के वेतन पर नौकरी को तैयार,सरकारी आदेश का हो रहा है बंटाधार। सरकारी नौकरी अब कहाँ ? ठेके की बहार,ठेकदारी में काम को अब तरस रहे हैं यारउद्योगों को ही बेच रही राज्य की सरकार,कोयला, स्टील … Read more

‘अंत्योदय के स्वर’ पुस्तक विमोचित

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पानीपत (हरियाणा)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अ.भा. प्रतिनिधि सभा की महत्वपूर्ण बैठक (१३-१५ मार्च) समालखा में आयोजित की गई। बैठक के दौरान सेवा विभाग एवं संघ के जयपुर प्रांत की ओर से प्रकाशित पुस्तक ‘अंत्योदय के स्वर’ का विमोचन अ.भा. सह प्रचारक प्रमुख अरुण कुमार, राजस्थान क्षेत्र के संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल व क्षेत्र कार्यवाह … Read more

कृत्रिम बुद्धिमत्ता:नियमन की दौड़ और भारत की स्थिति

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक के मध्य तक आते-आते ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ केवल एक तकनीकी नवाचार भर नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, कूटनीति और सामाजिक संरचना को पुनर्परिभाषित करने वाली निर्णायक शक्ति बन चुकी है। २०२६ का वर्ष इस परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, … Read more

प्यारी तितली रानी

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** बड़ी ही प्यारी लगती है रानी तितली,उड़ती-फिरती, करे मनमानी तितली। लाल, गुलाबी, पीले पंख की सुंदर तितली,कहीं ना रूकती, रंग-बिरंगी तितली। फूलों पर है हरदम मंडराती तितली,कभी यहाँ-कभी वहाँ जाती तितली। फूलों का मीठा रस पी जाती तितली,बागों में सुंदरता फैलाती तितली। छोटे-छोटे पंख हिलाती तितली,सबके मन को खूब लुभाए तितली। … Read more

चंद उदासियाँ

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ज़िन्दगी में उदासियाँ आती ही रहती हैं,कभी किसी से मतभेद भी होते हैंमन में उदासी हो ही जाती है,मन बेचैन होकर उदासी में खो जाता है। अब हर समय यही उदासी दिल पर छाई रहती है,किसी भी काम को करने की इच्छा नहीं होतीदुश्वार हो जाता है समय काटना भी,मन की … Read more

नारी शक्ति, शिवा स्वरूपा

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…. नारी सृष्टि का संचार, नारी सृष्टि का आधारनारी सब रिश्तों का भण्डार, नारी बिन सूना संसारनारी जननी नारी धरणी, नारी से सब शोभायमान,नारी मूर्त प्रेम व्यवहार, नारी धरती का श्रृंगार। नारी करूणा नारी अपर्णा, नारी धूप, ठंडी छाँव,नारी माँ नारी भगिनी, नारी कोमल, घाव सहलावसहचरी … Read more

‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ का हुआ विमोचन और चर्चा

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दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (नई दिल्ली) के कलानिधि विभाग द्वारा ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ (३ खंड) पुस्तक का लोकार्पण एवं परिचर्चा कार्यक्रम गरिमामय वतावरण में आयोजित किया गया। विजयदत्त श्रीधर की यह कृति भारतीय पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा (पहली सदी : १७८०-१८८०, तिलक युग : १८८१-१९२० और गांधी युग : १९२१-१९४८) का गंभीर एवं … Read more

संवेदनाओं का टूटता घरौंदा…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ अब जीवन का हर एक पल ‘मुश्किलों’ से भरा हुआ है,रिश्तों में ‘दूरियाँ’ बढ़ती जा रही है,कोई किसी का नहीं होता, इस जहान में,तभी तो सामने आ ही जाता है संवेदनाओं का टूटता घरौंदा..। आज ‘भावात्मक’ अभिव्यक्ति शून्य ही हो गई है,कोई किसी का नहीं;मतलबी लोग ‘ज्यादा’ नजर आते हैंआपसी … Read more