तथ्यों की यात्रा को सत्य की परिणति तक पहुँचाना ही शोध-प्रो. अरोड़ा

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दिल्ली। तथ्य अनंत हो सकते हैं, किंतु वास्तविक तथ्यों की यात्रा को सत्य की परिणति तक पहुँचाना ही शोध का अभीष्ट है। तथ्यों की यात्रा को सत्य की परिणति तक पहुँचाना ही शोध है।यह विचार ‘वाङ्मय विमर्श’ द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला श्रृंखला की पाँचवीं कड़ी में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रख्यात विद्वान प्रो. हरीश अरोड़ा ने ‘शोध … Read more

फणीश्वरनाथ रेणु, महादेवी वर्मा एवं ‘अज्ञेय’ की जयंती मनाई

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पटना (बिहार)। मंत्रिमंडल सचिवालय के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में छज्जूबाग स्थित फणीश्वरनाथ रेणु सभागार (हिंदी भवन) में सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, महादेवी वर्मा एवं फणीश्वरनाथ रेणु की जयंती के अवसर पर समारोह आयोजित किया गया। अध्यक्षता विभागीय अपर सचिव सह निदेशक एम.एस. परवेज आलम ने की।प्रारम्भ में आमंत्रित विद्वानों द्वारा दीप प्रज्वलित कर समारोह … Read more

बाल साहित्य द्वारा कर सकते हैं प्राकृ‌तिक चेतना की रक्षा

◾आयोजन में हुआ अनेक पुस्तकों का विमोचन.. भोपाल (मप्र)। यह बाल साहित्य को संवर्द्धित करने का अवसर है।बालकों को हम जैसा वातावरण देंगे, सांस्कृतिक, पारिवारिक, सामाजिक, जो हमारा है, वो उनको श्रेष्ठ बनाता है। प्राकृ‌तिक चेतना की रक्षा बाल साहित्य द्वारा कर सकते हैं। उपदेश से परहेज क्यों ? बच्चे को दिशा-निर्देश दें। रोकना-टोकना करें, … Read more

हमें दूर कर न पाए कोई

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई,मेरे दिल में तुम बसे हो और नहीं कोई। साँवली-सी सूरत मनभावनी-सी मूरत,उस पर हँसी तेरी दिल को लुभाए कोई। जबसे तुम मिले हो जान ही न बच पायी,तन तो मेरे पास है, मन ले गया है कोई। वो तो इक छलिया है, छल ही कर … Read more

मानसिक जकड़-बंदी

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मेरे मित्र के मन की रंगभूमि परमानसिक जकड़-बंदी है,यह समाज का पहरा भी नहीं,फिर भी न जाने कैसे बंदी है। अपने विचारों को जाहिर करनाएक द्वंद्व-युद्ध के समान है,यह एक ऐसा अँधेरा फैलाता है-जहाँ अच्छी विचारधारा का प्रवाह भी बंद है। मानसिक जकड़-बंदी से ऊपर उठकरआगे बढ़ना हर मानव चाहता है,लेकिन … Read more

मातम

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** चारों ओर सिर्फ सन्नाटा नहीं,बल्कि एक ऐसा मातम पसरा हैजो चीखता है, रोता हैअपनों को खो देने के ग़म से बेहाल।जले हुए शरीर,पहचान के इंतज़ार में है उनके अपनेकांपते हाथों और डरे हुए दिलों के साथ,डीएनए सैंपलिंग के लिए आ रहे हैं। हर एक चेहरे पर बस एक ही सवाल-“आख़िर हमारे अपनों … Read more

एक अकेला तारा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* तम की भीड़ों झिलमिल करता, सदैव एक अकेला तारा,ज्यों सच्चाई कही, भीड़ में है कोई सज्जन बेचारा। झूठों की महफ़िल में अक्सर, जो सत्य सुपथ ही ठुकराया,फिर भी राह दिखाता जग को, होता दीपक-सा उजियारा। घोर अमावस में भी जिसने दिल आशा का गीत सँवारा,वह अम्बर में टँगा हुआ-सा … Read more

अनुपम अनुराग हो गया

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* बागों की बयार से, अनुपम अनुराग हो गया,इस जगत की उलझनोंं से, अजब विराग हो गया। कभी छाया मिलती है, कभी धूप कड़ी लगती,मधुबन की घनी छाँव से, तो अनुराग हो गया। कभी फूल खिलते हैं, कभी काँटे हैं बेशुमार,फूलों वाली नगरी से, तो मन पराग हो गया। कभी … Read more

धर्म और पर्यावरण संरक्षण

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता जिन २ स्तंभों पर टिकी है, उनमें से एक है – मनुष्य की आस्था और दूसरा है प्रकृति का संतुलन। जब तक ये दोनों एक-दूसरे के पूरक रहे, तब तक मानव सभ्यता फलती-फूलती रही, किंतु जैसे-जैसे आधुनिकता के नाम पर मनुष्य ने प्रकृति को उपभोग की … Read more

तेरी सुनहरी यादों को लिए…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* कोई दिन नहीं जब मैं रोई नहीं,कितनी रातों से मैं सोई नहीं। थक गई हूँ तुम्हारी राह तकते-तकते,पता है कि तुम फिर कभी आ नहीं सकते. दिन तो निकल जाता है काम के बोझ से,शामें गुज़रती नहीं चाय या कॉफ़ी की दौर से। यूँ तो सब है मेरे आस-पास,तुम्हारे बिना न … Read more