‘कृत्रिम मेधा’ और मानवीय रिश्ते
डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** समय की संध्या और सुबह के संगम पर खड़ा आधुनिक मनुष्य एक ऐसे युग का साक्षी है, जहाँ संवाद की सरिता अब शब्दों से अधिक संकेतों, स्पर्शों से अधिक पर्दे (स्क्रीन) और संवेदनाओं से अधिक सॉफ्टवेयर के सहारे बह रही है। ‘कृत्रिम मेधा’ ने न केवल कार्य और व्यापार की दुनिया … Read more