संतुलन बनाएं, ताकि विवाह संस्था सुरक्षित रहे और व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी

ललित गर्गदिल्ली*********************************** आधुनिकता के संक्रमणकालीन दौर में सबसे अधिक यदि कोई संस्था प्रश्नों के घेरे में है, तो वह विवाह और रिश्तों की पारंपरिक अवधारणा है। बदलती जीवन शैली, आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीक, वैश्वीकरण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती चेतना ने रिश्तों की परिभाषा, अपेक्षाएँ और संरचना-सब कुछ बदल दिया है। यही कारण है, कि आज … Read more

मिथकों को तोड़कर देशभक्ति मजबूत करती है ‘धुरंधर २’

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** समकालीन हिंदी सिनेमा में देशभक्ति का विषय हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है, लेकिन इसके चित्रण का तरीका समय के साथ बदलता रहा है। लम्बे समय तक मुख्यधारा के सिनेमा में देशभक्ति को एक सीमित, भावनात्मक और कई बार रूढ़ छवि के रूप में प्रस्तुत किया गया, जहाँ नायक अकेले … Read more

धर्म-सुपथ पर बढ़ चले

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अन्यायों के सामने, जब उठती हुंकार।धर्म-सुपथ पर बढ़ चले, वीरों की यलगार॥ मन की सच्ची भावना, प्रेम सजे श्रृंगार।अल्प प्रेम भी जो दिया, बन जाता उपहार॥ नीति सिखाना ज़िंदगी, धैर्य धरें हर बार।ठोकर भी सिखला रही, बनती जीवन धार॥ अंतर के सब द्वेष को, प्रेम जला दे आज।घृणा मिटाना … Read more

जुनून और बलिदान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* साहस, जुनून और बलिदान इंकलाब बना,देश की आज़ादी का तूफ़ानी सैलाब बनादेश में छा गया मौसम-ए-आज़ादी,ब्रिटानिया हुक़ूमत की हार,एक बदलाव बना। भारत माँ का लाल हूँ, दे सकता मैं जान,गाता हूँ मन-प्राण से, मैं इसका यशगानआर्यभूमि जगमग धरा, बाँट रही उजियार,इसकी गरिमा, शान पर, मैं हर पल क़ुर्बान। भगतसिंह, आज़ाद का, … Read more

राष्ट्रीय संगोष्ठी और पुरस्कार वितरण समारोह २९ मई को

hindi-bhashaa

अहिल्यानगर (महाराष्ट्र)। शुक्रवार २९ मई को स्नेहालय, आडकर ट्रस्ट, हिंदी सृजन सभा तथा आचार्य जगदीश चंद्र मिश्र लघुकथा सम्मान समिति (अहिल्यानगर) के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इसका विषय ‘इक्कीसवीं सदी के प्रथम रजत-खंड में चेतना के नवीन स्वर (समकालीन हिंदी लघुकथा के सन्दर्भ में)’ है।समिति की ओर से … Read more

ललामभूत मिट्टी

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* अभी-अभी गेहूँ की फसल कट गई है। कितनी रौनक थी खेतों में, अचानक रौनक चले जाने से मिट्टी उदास, हताश हो गई है। मिट्टी को लहराती बालियों की रह-रहकर याद आ रही है। बालियों का झूमना, हवाओं से बातें करना, अपनी ही मस्ती में अठखेलियाँ करना, मिट्टी से कुछ-कुछ बतियाना, हवाओं … Read more

स्वयं से प्रेम जरूरी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** ‘स्वयं प्रेम स्वार्थ है या जरूरी’, यह विषय हमें सोचने के लिए मज़बूत करता है, कि क्या हम मशीन बनते जा रहे हैं। कई तो अपने काम में इतने व्यस्त हैं, कि उनके पास अन्य किसी काम के लिए समय नहीं, पर इसका प्रभाव परोक्ष रूप से उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है … Read more

हिंदी के लिए ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार

नई दिल्ली। साहित्य अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त २४ भारतीय भाषाओं में वार्षिक साहित्य अकादमी पुरस्कार २०२५ की घोषणा की गई। इनमें ८ कविता संग्रह, ४ उपन्यास, ६ कहानी संग्रह, २ निबंध, १ साहित्यिक आलोचना, १ आत्मकथा और २ संस्मरण की पुस्तकें शामिल हैं। पुरस्कार स्वरूप १ उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और १ लाख रुपए की राशि … Read more

‘बाल रचना पाठ एवं लेखन प्रतियोगिता’ एक अनुकरणीय पहल

गाजियाबाद (उप्र)। ‘पेड़ों की छाँव तले रचना पाठ’ की साहित्यिक गोष्ठियों में मैं कई वर्षों से शामिल हूँ और हरे-भरे पार्क के अंदर प्राकृतिक वातावरण में घास के ऊपर भूमि पर बैठ कर काव्य पाठ का आनंद लिया है। बच्चों को साहित्य के प्रति उनकी रुचि और उत्साह को बढ़ाने वाले ‘बाल रचना पाठ एवं … Read more

मारुत-नंदन

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** ‘हनुमान जयंती’ विशेष… मारुत नंदन आपको, वंदन शीश नवाय।सदा साथ मेरे रहें, कहिए सरल उपाय॥ भक्ति करूँ मैं केहि विधि , कैसे उतरूँ पार।राम सहायक आपके, करते हैं उपकार॥ मैं आई हूँ द्वार पर, रखिए मेरी लाज।जो कुछ मेरे पास है, अर्पित करती आज॥ तन, मन, धन से है सदा, वंदन बारम्बार।आज … Read more