यूजीसी:देश पराया
सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* मेरी सब्र की उम्मीद का पैमाना, धीरे-धीरे टूट रहा है,नक्कारखाने में आवाज़ तूती की, कोई भी न सुन रहा हैनहीं जरूरत देश को मेरी, ऐसा मुझको लग रहा है,चला जाऊंगा परदेस एक दिन, ख्याल दिल में उठ रहा है। सवर्ण होना गुनाह है मेरा, मुझे देश समझा रहा है,अज्ञानी को दे … Read more