‘माँ’ एक पवित्र तस्वीर

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माँ का मतलब,सिर्फ़ रसोई में खड़ीचूल्हे की आँच पररोटियाँ सेंकती हुई स्त्री नहीं होता, न ही-वह केवलत्योहारों पर चरण छू लेने भर कीएक पवित्र तस्वीर है।  माँ,दरअसल वह अदृश्य संसार हैजिसके भीतर,पूरे परिवार की धड़कनें पलती हैं…जिस दिनघर के सब लोग सो जाते हैं, उस दिन भीमाँ पूरी तरह … Read more

सीप उदर माँ का

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… सीप उदर माँ का, मोती बनमैं उसकी पहचान बनी,माँ से ही यह जग पाया हैवह मेरा अभिमान बनी। जीने की वह राह बतातीवह मेरा आधार बनी,थाप हृदय पर उसके धुन कीवह मेरा अधिकार बनी। ममता, प्रेम, दया, करुणा कीमाँ प्यारी झंकार बनी,शीतल प्राण-वायु जीवन कीवह मेरा … Read more

जिसने सब-कुछ दिया…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… हर समय जो साथ रहती है,जो अपने बच्चों के लिए सब कुछ सहती है वो ‘माँ’ है। ममता का बंधनजो कभी खत्म नहीं होता,हम चाहे कितने बड़े हो जाएं,पर माँ के लिए हम बच्चे ही रहते हैं। नौ महीने ‘कोख’ में रखजिसने अपने जीवन का सब-कुछ … Read more

काव्य एवं लेख संग्रह लोकार्पित

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मुम्बई (महाराष्ट्र)। मीरा रोड (पूर्व) स्थित विरंगुला केंद्र में शनिवार को हुए समारोह में लेखिका रीता दास राम की कृति (काव्य संग्रह) ‘अर्थबोध के सान्निध्य में’ और लेख संग्रह ‘हमारा समाज और हम’ (वैभव प्रकाशन) का लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि विजय कुमार ने की।  जनवादी लेखक संघ, ‘अनभै’ पत्रिका और … Read more

माहभर किया कल्पकथा साहित्य संस्था ने सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)। सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा मई माह में २०२६ सम्मान समारोह एवं २४८वीं कल्पकथा काव्य गोष्ठी के आयोजन किए गए। साहित्यकार डॉ. गजेंद्र हरिहरनों ‘दीप’ की अध्यक्षता एवं समाजसेवी पत्रकार रघुवंशमणि सिंह के मुख्य आतिथ्य में यह आयोजन किया गया।    संस्था की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति सिंह ने … Read more

मेहनत का मोल कहाँ ?

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* हथेलियों की रेखाओं में इतिहास लिखे जाते हैं,ईंटों के बीच पसीने से सपने सजते  जाते हैंजो भूख-प्यास से लड़कर भी श्रम को पूजा मानता, वही धरती पर स्वर्णिम जीवन के दीपक जलाते हैं। नन्हें कोमल हाथों में अक्सर बोझ  बड़े होते हैं,दो जून रोटी की खातिर बचपन मज़ूर बन जाते हैंये सत्य है—विकास की चमक इन्हीं से है नित होती, हर ऊँची इमारत में सम्मान स्वेद जड़े … Read more

बंगाल : बवाल, बगावत और बदलाव की बड़ी चुनौती

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** पश्चिम बंगाल की राजनीति ने ९ मई २०२६ को एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ देखा, जिसकी कल्पना कुछ वर्ष पहले तक कठिन मानी जाती थी। लंबे समय तक वामपंथी शासन और फिर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के बाद अब राज्य की सत्ता भारतीय जनता पार्टी के हाथों में … Read more

तेरे ही चरणों में है स्वर्ग

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माँ तेरी प्यारी-सी जादू की झप्पी,तेरे हाथों की थपकीसोते समय तेरा लोरी गाना,मेरे जोर से रोने परघबराकर भाग के आना,बहुत याद आता है माँतेरा मुस्कुराना। माँ सुबह-सुबह उठकर,अदरक वाली चाय बनानासमय पर नाश्ता लगाना,मेरे स्कूल ना जाने का बहानातेरे गोद में आकर छिप जाना,बहुत याद आता … Read more

इनके नहीं जैसी दूजी

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माता तो बस माता होती है,इनके जैसी नहीं दूजी होती है। ये बच्चों की परवाह करती है,ममता स्नेह की मूरत होती है। मेरे बच्चे सारे जग से अच्छे,ये उसको बड़ा गुमान होता है। खुद की तो अब उसे चिंता नहीं,बच्चे ही उसकी दुनिया होती है। पहले … Read more

‘लेखकों का बचपन’ पुस्तक हेतु ३० तक अवसर

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सिरसा (हरियाणा)। न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन (८७५०६८८०५३) इस बार ‘लेखकों का बचपन’ नामक पुस्तक प्रकाशित कर रहा है। इसके ३ खण्ड तैयार हो चुके हैं, यदि आप भी लेखक होने से पहले अपना बचपन रेखांकित करना चाहते हैं तो अपना आलेख ३० मई (शब्द सीमा १०००-३०००) तक मेल (Editornwp@g mail.com) पर भेज सकते हैं।