‘स्त्री’ देती जीवन
अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** ‘स्त्री’,धरा समानकरना नहीं तिरस्कार,देती जीवनवरदान। ‘नारी’,जन्म संतानपालन-पोषण करती,भू समानअभिभावक। ‘औरत’,जगत पहचानकरती जीवन संघर्ष,चुप रहतीपुष्प। ‘महिला’,कोमल मनवक़्त पर मैदान,भिड़ जातीरक्षा। ‘वनिता’,दुर्गा, कालीनहीं निर्बल-अबला,कभी ‘कामिनी’जानकी। ‘रमणी’,संस्कृति वाहककरती सदा भला,सृजन धुरीसंवेदनशील। ‘भार्या’,साथ चलतीप्रधानमंत्री, वैज्ञानिक, अभियंता,उड़ाती विमानसफलता। ‘जननी’,करती भागीदारीनिभाती हर परम्परा,रूप शक्तिपरिवार। ‘कांता’,सौन्दर्य-लक्ष्मीलुटाती ममता अपार,दर्द सहतीमुस्कान। ‘अर्धांगिनी’,कहलाती माँपर रहती पीड़ित,अनेक भेदभावविडम्बना। ‘मानवी’,सम्भालती घरहै रूप शक्ति,रखती … Read more