पूजा और पाखंड के बीच खड़ा मनुष्य

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मनुष्य की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वह पूजा को साधना कम, प्रदर्शन अधिक बना लेता है। मंदिर, मस्जिद, गिरजों और गुरुद्वारों में भीड़ बढ़ रही है, पर पड़ोस के भूखे की थाली खाली है। माथे पर तिलक, हाथों में माला, होंठों पर मंत्र और व्यवहार में छल, … Read more

रोज़-डे

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ललिता अपनी बॉलकनी में खड़ी हुई थी, तभी निगाह अपने घर के सामने रहने वाली धरा के कमरे में पड़ गई। वहाँ आज ‘रोज़-डे’ के अवसर पर शिशिर, धरा को रोज़ का बुके देने के बाद पत्नी को आलिंगनबद्ध करते देख कर वह स्वयं भी अपने प्रियतम से रोज़ के बुके लेकर … Read more

विजय प्राप्त करें

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* विजय प्राप्त करें,आओ विजय प्राप्त करें। शील का पालन करके,शरीर पर विजय प्राप्त करेंवाणी व्याप्त स्थूल विकारों पर,मौन रखकरविजय प्राप्त करें।आओ विजय प्राप्त करें… मन में उत्पन्न होने वाले,विकारों पर एकाग्रता सेविजय प्राप्त करें,आओ विजय प्राप्त करें। सुख-दु:ख और प्रेम-घृणा पर,ध्यान लगाकर, चिंतन करकेविजय प्राप्त करें,आओ विजय प्राप्त करें। गलत ज्ञान … Read more

महर्षि दयानंद थे चेतना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* दयानंद जी श्रेष्ठ थे, मानवता के सार।फैलाकर के जो गए, एक नया उजियार॥ दयानंद प्रभुतामयी, थे समता के रूप।अपने युग को दे गए, जो सूरज की धूप॥ आर्य धर्म की श्रेष्ठता, धारण करके खूब।रीति-नीति की दे गए, हमको पावन दूब॥ दयानंद जी दिव्य थे, गाकर के मृदु गीत।बने मनुज की चेतना, … Read more

समय किसी का नहीं होता

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** ना होता समय किसी का,न राजा का होता, ना ही होता रंक का। कौन है जो इसे बाँध सके मुट्ठी में,था कौन ऐसा इतिहास में ? कल तक जो थे सिंहासन पर,आज रह गए बस स्मृति में, बताया घड़ी की टिक-टिक ने,वैभव क्षणिक धाम रह गए। जो आज गर्व में हँसता है,कल … Read more

काव्य गोष्ठी बनी प्रेम-सद्भावना की मिसाल

hindi-bhashaa

दिल्ली। साहित्य उपवन रचनाकार की काव्य गोष्ठी न्यू आर्टस कॉलेज (शक्ति नगर, दिल्ली) में आपसी प्रेम और सद्भावना की मिसाल बन गई। अध्यक्षता प्रो. महासिंह पूनिया (हिंदी विभागाध्यक्ष, इस्टीट्‌यूट ऑफ इन्टीग्रेटिड एण्ड ऑनर्स स्टडीज, कुरुक्षेत्र विवि) ने की। मुख्य अतिथि मकबूल शायरा कृष्णा दामिनी शर्मा रहीं।आयोजन में विशिष्ट अतिथि देवीप्रसाद मिश्र (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विश्व हिंदी … Read more

‘उम्मीदों के पंख’, ‘महकते पल’ और ‘वृक्ष, चेतना के मौन स्वर’ विमोचित

hindi-bhashaa

दिल्ली। ‘विश्व पुस्तक मेला’ के सारस्वत वातावरण में प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. कविता सिंह ‘प्रभा’ रचित पुस्तक ‘महकते पल’, ‘उम्मीदों के पंख’ तथा संपादित साझा काव्य संग्रह ‘वृक्ष, चेतना के मौन स्वर’ का विमोचन कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर ‘प्रभा’ ने तीनों पुस्तकों के मर्म, औचित्य और भाव को विस्तार से रखा, साथ ही संग्रह के … Read more

सम्मान समारोह संग हुआ पुस्तक का विमोचन

hindi-bhashaa

दिल्ली। मंडी हाउस में १४ जनवरी को साहित्य अकादमी के सभागार में पं. तिलकराज शर्मा स्मृति न्यास व संयुक्त राज्य अमेरिका के तत्वावधान में ‘सम्मान समारोह एवं पुस्तक लोकार्पण-२०२६’ का आयोजन किया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार बी.एल. गौड़ ने की। मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ उपस्थित रहे।विशिष्ट अतिथियों में भोपाल विश्व रंग के … Read more

विक्रमोत्सव-२०२६:लोकार्पण, कवि सम्मेलन और संगोष्ठी

hindi-bhashaa

भोपाल (मप्र)। महादेव के भव्य-दिव्य महाशिवरात्रि उत्सव से १५ फरवरी को विक्रमोत्सव-२०२६ का भव्य औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। इस महोत्सव में ४१ से अधिक बहुआयामी गतिविधियाँ संचालित होंगी। शिव रात्रि मेले सहित संगीत, विक्रम नाट्य समोराह, संगीत का उद्भव और विकास पर केंद्रित अनहद वैचारिक समागम, प्रदर्शनियाँ, संगोष्ठी, भारतीय इतिहास समागम, प्रकाशन-लोकार्पण, बोलियों एवं हिन्दी … Read more

माया में फँसता अज्ञानी

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:१०, ८, ८, ६…. माया में फॅंसता, ईश्वर भी हँसता कैसा मानव, अज्ञानी।जीवन भर रोता, कभी न सोता,करता है वह, नादानी।प्रभु से विरत रहे, पापरत रहे,करता रहता, मनमानी।माया है ठगिनी, जीवनहरिणी,कर देती ये, हैरानी॥ माया का बंधन, दिखता चंदन,अंत बड़ा ही, दुःख भरा।मन को भटकाता, रूप दिखाता,लगता है सब, हरा-हरा।नश्वर है … Read more