अब अन्तरिक्ष भ्रमण करती हैं बेटियाँ
कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ टुकड़ों-टुकड़ों में कभी जीती थी बेटियाँ,किसी कोने में चुपचाप रोटियाँ बेलती थी बेटियाँ। अपनी आँसुओं को चुपचाप पीती थी बेटियाँ,अनजाने रिश्तों में बांध दी जाती थी बेटियाँ। जमाना बदल गया है, अब तो साइकिल से,खिलखिलाते हर गली-मुहल्लों से निकल स्कूल-कालेज जाती है बेटियाँ। कभी गुमसुम, आँचल में डरी रहने वाली,अब अन्तरिक्ष भेद … Read more