श्रीकृष्ण की भावामृत धारा में अवगाहित हुई कल्पकथा काव्य गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)। हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा २४३वीं साप्ताहिक पौराणिक एवं भक्ति प्रसंग आधारित काव्यगोष्ठी का आयोजन माधव स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण विषय पर अत्यंत श्रद्धा एवं भावमाधुर्य के साथ हुआ। इस अनुपम आयोजन में भक्ति, दर्शन और काव्य का अद्वितीय समन्वय दृष्टिगोचर हुआ, जहाँ प्रत्येक रचना … Read more

पानी बचाइए

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* नीला अम्बर धरती प्यारी,सबकी जीवन डोर है पानीयह जीवन का आधार है,पानी बचाइए। नदी, तालाब कुएं और झरने,जल से ही तो जीवित हैंसुख न जाए यह जलधारा,पानी बचाइए। पानी की हर बूँद कीमती,व्यर्थ इसे न बहने दोजल है तो कल है इसलिए,पानी बचाइए। पानी को रखें सुरक्षित,अपनाएं जल संरक्षण हम।भावी पीढ़ियों के … Read more

बी.एल. गौड़ एवं डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा रचित ‘भविष्य की अयोध्या’ लोकार्पित

नई दिल्ली। जनपथ स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में श्री अयोध्या न्यास द्वारा ‘अयोध्या पर्व’ का भव्य आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक उत्सव के प्रथम सत्र में सुप्रसिद्ध उद्यमी एवं वरिष्ठ साहित्यकार-कवि बी.एल. गौड़ और वरिष्ठ कवि-लेखक एवं पत्रकार डॉ. शैलेश शुक्ला की कृति ‘भविष्य की अयोध्या’ का लोकार्पण पद्मभूषण राम बहादुर राय ने … Read more

गर्मी आई, चली लू की रेल

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** ठंडा-ठंडा, कूल-कूल,सब बातों को जाओ भूल। गर्मी आई, प्यास बढ़ाई,पियो शर्बत, कुल्फी आई। तरबूजा-खरबूजा, खीरा-ककड़ी,धनिया, पुदीना लाते ठंडाई। नींबू पानी, दही और लस्सी,कोकाकोला, माजा, पेप्सी। सबमें आए है बड़ा मजा,जब मिलकर पीते रूह-आफजा। कोई पीता शर्बत बेल और गन्ना,कोई पीता आम का पन्ना। नीता, रीता, सीता, शीला,पिकनिक जाते कश्मीर ठंडीला। बर्फ की … Read more

कहाँ छुपे रहते हो

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* निरख मेरे नैनों को,तुम कहाँ छुपे रहते होकभी आँसू बन कर छलकते,कभी मोती बन कर हँसते हो। नित दिन मेरे नयनों में,पलकों में तुम बसते होमैं मिलती रुबरु तुमसे,सपनों में आकर रहते हो। पलकों को मूंद कर,रक्षक बन कर रहतेये बरौनी मेरे,तुम कहाँ छुपे रहते हो। जब आँखें खुलती है,मदमस्त मदहोशी-सीमादकता … Read more

यथार्थ को स्वीकार करने वाली कहानी है ‘लेमिनार फ्लो’

hindi-bhashaa

भोपाल (मप्र)। यह संवेदनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक यथार्थ को स्वीकार करने वाली कहानी है। कथानक बुज़ुर्गों की विडम्बना पर आधारित है। कहानी में जीवन का दर्शन है। ठहरे हुए समय में जीवन कठिन हो जाता है, इसे बहने दो। यही भौतिकी में द्रव्य यांत्रिकी का सिद्धांत भी है।मुख्य अतिथि डॉ. पद्मा शर्मा ने शिरीन भावसार … Read more

शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया और गिरता स्तर

डॉ. रामवृक्ष सिंहलखनऊ (उप्र)******************************* मेरे अनुभव और मतानुसार शिक्षकों, विशेषकर महाविद्यालयीन शिक्षा के स्तर में गिरावट का मुख्य कारण है – शिक्षकों के चयन में धाँधली, भाई-भतीजावाद, प्रतिभा एवं योग्यता की अनदेखी करके केवल अपने चहेतों की नियुक्ति करने का व्यापक प्रचलन। हालांकि, स्नातक स्तर के संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए राष्ट्रीय स्तर … Read more

शान्ति का शुभदीप जलाओ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… शांति का शुभदीप जलाओ, प्रेम का संदेश जगाओ,मानवता की राहों पर फिर से साहस कदम बढ़ाओ।युद्ध विषम विभीषिका से यही सीख मिलती है दुनिया-नफरत की ज्वाला त्यागकर, करुणा का सागर बहाओ॥ जलते घरों की राख में तुम सिसकियाँ फिर से जगाओ,टूटी छत के नीचे … Read more

दुनिया चाहती अमन

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… पूरी दुनिया चाहती अमन, चैन व शांति,लडा़ई, झगड़ा, युद्ध बिखेरता है अशांतिजो खुद को समझते बादशाह, उनमें ही भ्रांति,स्वाभिमान हर किसी का होता जो लाए क्रांति। हम भारत वंशी जहाँ बुद्ध, जैन, गाँधी का पैग़ाम है शांति,न युद्ध न जंग, न कोई दबाव लक्ष्य … Read more

कन्या पूजन

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* “डॉक्टर साब! क्या पाँच तारीख के पहले आपरेशन नहीं हो सकता ?”“नहीं माताजी नहीं! उसके पहले की मेरी सारी डेट्स बुक हैं। पर आपको पाँच तारीख के बाद क्या प्रॉब्लम है ?”“दरअसल, डॉक्टर साब! पाँच तारीख से नवरात्रि शुरु हो रही है, और मेरे घर में बहुत श्रद्धा से नवरात्रि मनाई … Read more