नई ताजगी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** धूप गर्मी की अब तो पसरने लगी,खेत की सारी फसलें भी पकने लगींमस्त ख़ुशबू अमलतास गुड़हल की अब,फ़िज़ाओं में रह-रह बिखरने लगी। अपने साज़ों हुनर से धरा भी यहाँ,नित नए चित्र में रंग भरने लगीहर तरफ़ हर दिशा में खुशी ही खुशी,सारी अमराइयाँ भी महकने लगी। अब पहाड़ों से झरने उतरने लगे,तरु … Read more

समय की मांग-प्रश्न पूछें और समाधान भी खोजें

ललित गर्गदिल्ली*********************************** कॉकरोच राजनीति…. भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह केवल मतदान की व्यवस्था नहीं, बल्कि संवाद, सहमति, असहमति, संवैधानिक मर्यादाओं और सामाजिक उत्तरदायित्वों का एक सशक्त तंत्र है। लोकतंत्र की शक्ति विरोध में निहित है, लेकिन उसकी गरिमा विरोध की शैली, उद्देश्य और मर्यादा से निर्धारित होती है। हाल के दिनों में … Read more

ज़िंदगी बदल देता है काला बोर्ड

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** सतरंगी दुनिया -२६…    अजीब बात है, कि वो इंजीनियर नहीं है, फिर भी तारीफ के पुल बाँध लेता है। हँसना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है, पर दूसरों पर हँसना हमारे लिए हानिकारक है। उम्र बढ़ने के साथ हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हम ओल्ड हो गए हैं, … Read more

चुनौतियों को लेखनी के माध्यम से ही मिलती है सच्ची आवाज

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गोष्ठी… इंदौर (मप्र)। सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ने के लिए लगन, अनुशासन, सहनशक्ति और एकाग्रता बेहद जरूरी है। पारिवारिक सहयोग से ही महिलाएं अपनी सेहत और लेखन को सहेज सकती हैं, क्योंकि खेल और लेखन दोनों ही विधाओं की चुनौतियों को लेखनी के माध्यम से ही सच्ची आवाज मिलती है।    यह बात कही मुख्य … Read more

सच कागज़  पर आना चाहिए

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* उगते सूरज की बात कहूँ, कैसे बीती रात कहूँ,सच कागज पर आना चाहिये, काली रातों की बात कहूँ। डोली चढ़कर जाती दुल्हन, अपनी किस्मत साथ लिये,अनगिनत सपने देखे हैं, उन सपनों की सौगात कहूँ। आसमान पर चाँद खिला है, तारों की बारात वहाँ,टिम-टिम तारों से जगमग, रोशन होती रात … Read more

सूरज देवता, कुछ तो समझाइए

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ हे सूरज देव !कुछ तो बता जाइएइतनी क्यों है जलन आपमें, कुछ तो समझ जाइए। अपने हैं कौन जग में, अब तो बता जाइए,प्रेम की बातें कैसे समझूँ, कुछ तो समझ जाइएजग में जीने के लिए खुद को कैसे समझाऊं, समझाइए। इस घोर कलयुग में, कलह कैसे खत्म हो बता जाइए,साधना मेरी … Read more

सूचना प्रौद्योगिकी ने नागरी लिपि और हिंदी भाषा को विस्तारित किया-डॉ. पाल

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नई दिल्ली। भारत सरकार के कार्यालयों में प्रायः देखा जाता है कि सरकारी कामकाज क्लिष्ट भाषा में किया जाता है, जिससे कर्मियों में हिंदी के प्रति अरुचि पैदा होने लगती है। यदि सरकारी कामकाज आम बोलचाल की भाषा में होने लगे तो इससे हिंदी भाषा और नागरी लिपि की लोकप्रियता बढ़ने लगेगी। सूचना प्रौद्योगिकी ने … Read more

वार्षिकोत्सव में रचनाकार सम्मानित

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रांची (झारखण्ड)। साहित्य संगम संस्थान का वार्षिकोत्सव एवं रचनाकार सम्मान समारोह प्रेस क्लब रांची में हुआ। शुभारंभ दिनेश कुमार मिश्रा द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं शंखनाद से किया गया।  सरस्वती वंदना के पश्चात समारोह में देश-विदेश के साहित्यकारों ने सहभागिता की। कवि सम्मेलन एवं सम्मान सहित रूपमाला की पुस्तक ‘बस दो कदम’ तथा स्वाति मानधन्या की … Read more

गोष्ठी में गूंजी साहित्य संवेदनाओं की स्वर लहरियाँ

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कोलकाता (पश्चिम बंगाल)। नवल विहान साहित्य कला सांस्कृतिक मंच (पश्चिम बंगाल इकाई) की आभासी मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन श्रीमती अंजलि किशोर कृति की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आशा लता पुष्प रहीं।  गोष्ठी का शुभारंभ सोनी बरनवाल द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया। दिवंगत शायर डॉ. बशीर बद्र को मौन श्रद्धांजलि … Read more

क्यों काटे हरे-भरे पेड़

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)… करुण पुकार सुनो,पेड़ आज आँसू बहा रहे हैंलोगों को समझाते-समझाते थक गए,फिर भी क्यों काटे जा रहे हरे-भरे पेड़ ? कब ‘जागोगे’ नींद में सोने वालों,पर्यावरण को ‘बचाओ’ नहीं तो कुछ भी नहीं रहेगाजीवन का पर्याय हरियाली, पेड़-पौधे हैं,फिर क्यों ‘काटे’ जा … Read more