पुस्तक ‘हिन्द से हिंदी’ का विमोचन किया प्रहलाद पटेल ने

hindi-bhashaa

सेंधवा (मप्र)। विश्व संवाद केंद्र मालवा प्रान्त और पत्रकारिता एवं जनसंवाद अध्ययनशाला (देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर) द्वारा संस्कृति विभाग (मप्र शासन) के सहयोग से आयोजित ‘भारत उदय’ (नर्मदा साहित्य मंथन) साहित्योत्सव में सेंधवा निवासी शिक्षक विजय पाटिल की पुस्तक ‘हिंद से हिंदी’ का विमोचन प्रहलाद पटेल (कैबिनेट मंत्री, मप्र) ने किया। तक्षशिला परिसर में हुए … Read more

प्रो. नामवर सिंह अपने समय के सबसे महान आलोचक-अरुण कमल

hindi-bhashaa

दिल्ली। आलोचक सर्वश्रेष्ठ को पहचान कर रेखांकित करता है, जो यह नहीं कर सकता, वह आलोचक नहीं हो सकता। कविता के नए प्रतिमान इस बात का सर्वोतम उदाहरण हैं कि अच्छी कविता को किस तरह पहचाना जाए। नामवर जी अपनी आलोचना में साहित्य और समाज को इसी तरह जोड़‌कर देखते थे, इसलिए वे अपने समय … Read more

संग्रह ‘गंगांजलि’ लोकार्पित, रचनाओं में महकी बसंत ऋतु

बिलासपुर (छग)। संकेत साहित्य संस्था बिलासपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा ६ फरवरी को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में साहित्य मनीषियों ने अपनी रचनाओं से माहौल को साहित्यमय कर दिया। इस अवसर पर साझा काव्य संग्रह ‘गंगांजलि’ का लोकार्पण किया गया। गोष्ठी में रचनाकारों ने बसंत ऋतु का बखूबी चित्रण किया तो गीत, ग़ज़ल और … Read more

अनिश्चित विश्व का विलाप

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** अंधियारे में डूबा दिख रहा है सम्पूर्ण संसार,भविष्य में दिख रहा हर ओर बस अंधकारकहीं है महामारी तो कहीं है युद्ध की आग,सुख-शांति की चाह में, हर ओर दौड़-भाग। जलवायु बदल रही, धरती है देखो रोती,नदी-तालाब सूख रहे, धरा हरियाली खोतीतकनीक बढ़ रही लेकिन प्रकृति पीछे छूट रही,लोभ की दौड़ में … Read more

‘छोटी चादर’ में बड़ी सोच ही असली ताकत

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** “जिन्हें घुटने मोड़ कर सोना आ गया, उनकी ज़िंदगी में कोई भी चादर छोटी नहीं पड़ सकती।” यह पंक्ति केवल नींद की मुद्रा नहीं बताती, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा दर्शन समझाती है। यह उन लोगों की कहानी है, जिन्होंने हालातों से लड़ना नहीं, उनके बीच जीना सीख लिया। जिन्होंने शिकायत … Read more

कर्तव्य करते जाना

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** कर्तव्य करते जाना है, दिल में सुकून लाना है,कर्तव्य अपना पूर्ण करूँ, ऐसा मन में ठाना है। कर्तव्य कार्य मिलता है, सिर्फ मानवों को ही,भाग्य मिले पशुओं को, क्या किसी ने जाना है ? कर्तव्य सभी अपना, ईमानदारी से करें परिपूर्ण,ईश्वर से डरें सब, क्यों किसी को नर्क में जाना है ? … Read more

सारी दुनिया छोड़कर

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* सारी दुनिया छोड़कर,मैंने तुमको चुन लियादुनिया के इस मेले में,सच्चा सुकून पा लिया।सारी दुनिया छोड़कर… न नाम की चाह रही,न दिल पर रिश्तों का बोझबेफिक्री का आलम है,जबसे नाता तुमसे जोड़ लिया।सारी दुनिया छोड़कर… न वैभव न यश की चाह,न ही कोई कामना अबजो छूटा वो तेरी माया,तेरा तुझको अर्पण कर दिया।सारी … Read more

शिव चंदन का वृक्ष

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** शिव चंदन का वृक्ष है जग में, मैं हूँ विष की बेली।बन भुजंग लिपटत हूँ उनसे तड़पत फिरूं अकेली॥ शिव अति शीतल मन माया अगन भरी,विषय-भोग अटखेली नित-नित विषय-भोग अटखेली॥ भजन को रस जागा भगति में मन लागा,शरणागत‌ मैं चेली गुरु शिव ‌ शरणागत मैं चेली॥ नाम स्वाद चख … Read more

मुँह पर थप्पड़

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* यह जानते ही मानसी ने जयंत को फोन किया। पहले तो जयंत ने मानसी का फोन अटैंड नहीं किया, और जब फोन उठाया तो सीधे जवाब देने की बजाय टाल-मटोली करता रहा, और जब मानसी ने सीधे सीधे सवाल किया कि,”जयंत तुम यह बताओ कि वह तुम्हारे जो चाचाजी दहेज की … Read more

मतभेद

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भीड़ में सच अकेला पड़े, तालियों में बस शोर मचे,भाषा पर भी झगड़े यहाँ, मुख शब्दों में तलवार बसेसंस्कृति के नाम पर टोले, रचते सभी अपनी दीवार,मतभेदों की धूप जले पथ, मात्र रिश्तों में दरार बसे। नारे बनें विचार यहाँ पर, मंचों पर मिथ व्यापार खिले,वादों की फसल लहलहातीं, … Read more