पत्तों की सरसराहट
संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** ये कौन-सी आवाज है,जो जानी-पहचानी सी लगती। हवा से पेड़ों के पत्ते की सरसराहट,कोयल की कूक मेंदब-सी जाती वो आवाज,जो जानी-पहचानी सी लगती। तालाब में खिले कमल,लगते ऐसे जैसे किसी नेपैरों में महावर लगाई होसूरज के उदय होने की लालिमा,जैसे बादल ने अपना रंग बदला हो। मैं इन फिजाओं में तुम्हें … Read more