समय है, समझ जा
राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** बेदर्दी से पेड़ काटने एक शिकारी आया,पंछी का घोंसला बना था उसने उसे गिरायानन्हें-नन्हें चूज़े उसमें डरे और सहमे से,किसे पुकारें, मात-पिता दाने लाने निकले थे। एक कबूतर देख रहा था दृश्य ये सारा,उन बच्चों को आकर उसने दिया सहाराबारिश की बूँदों से चूज़े काँप रहे थे,तान घरौंदे पर पत्ते का छाता … Read more