‘माँ’ एक पवित्र तस्वीर
बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माँ का मतलब,सिर्फ़ रसोई में खड़ीचूल्हे की आँच पररोटियाँ सेंकती हुई स्त्री नहीं होता, न ही-वह केवलत्योहारों पर चरण छू लेने भर कीएक पवित्र तस्वीर है। माँ,दरअसल वह अदृश्य संसार हैजिसके भीतर,पूरे परिवार की धड़कनें पलती हैं…जिस दिनघर के सब लोग सो जाते हैं, उस दिन भीमाँ पूरी तरह … Read more