‘जलेसं’ प्रतिवर्ष देगा ११ साहित्य सम्मान

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रतलाम (मप्र)। जनवादी लेखक संघ रतलाम प्रतिवर्ष ११ साहित्य सम्मान देगा। कविता, कहानी, आलोचना एवं ग़ज़ल के क्षेत्र में स्थानीय व देश के रचनाकारों को साहित्य साधना के लिए ये दिए जाएंगे। संघ के सचिव रणजीत सिंह राठौर ने बताया कि यह निर्णय जनवादी लेखक संघ के जिला सम्मेलन में लिया गया। इसके तहत हर … Read more

बाल कवियों ने किया उत्कृष्ट रचनाओं से सम्मेलन को सार्थक

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श्रीडूंगरगढ़ (राजस्थान)। सेवा कुंज छात्रवास में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के बैनर तले बाल कवि सम्मेलन किया गया। इसमें करीब २४ किशोरों ने देशभक्ति और संस्कृति के गौरव गान की कविताएं प्रस्तुत करके इसे सार्थक कर दिया।सम्मेलन में मुख्य अतिथि साहित्यकार शिवराज भारतीय शामिल हुए। आपने बाल्यावस्था से ही बच्चों में पुस्तकें पढ़ने की आदत … Read more

सुख का सागर ‘राम’

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** रामनवमी विशेष… ‘राम’,छवि मनोहारीसुख का सागर,करते कृपा‘राम’। ‘राम’,अपार धैर्यवानमर्यादा पुरुषोत्तम-त्यागी,जगत पिता‘राम’। ‘राम’कर्मशील मानवराजा मानव कल्याण,जग अभिलाषी‘राम’। ‘राम’प्रेम फैलायाझूठे बेर खाए,सिखाया धर्म‘राम’। ‘राम’सदा आज्ञाकारीहर पल मुस्कान,अद्भुत योद्धा‘राम’। ‘राम’सदमार्ग दिखायासदा कल्याण किया,निराली महिमा‘राम’। ‘राम’सबके प्रभुहृदय बसे हनुमानवचन पक्का‘राम’। ‘राम’महिमा निरालीकरे जो स्मरण,तर जाए‘राम’। ‘राम’सदा विनम्रचरण धोकर केवट,शरण पाए‘राम’। ‘राम’चरण रजपद पत्थर अहिल्याबना दिया‘राम’। … Read more

राम नाम की महिमा निराली

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* ‘रामनवमी’ (२६ मार्च) विशेष… राम नाम की ऐसी महिमा,मुझसे कही ना जाएजो राम की महिमा गाए,भव सागर तर जाए। राम के चरण धोकर केवट,राम शरण को पाएराम के पद पड़ते ही पत्थर,नारी अहिल्या बन जाए। राम नाम जपते-जपते,भक्ति में डूब जाएराम को जूठे बेर खिलाकर,शबरी परम पद पाए। राम नाम की ऐसी … Read more

मर्यादा, सुशासन और शांति के विश्वनायक श्रीराम

ललित गर्गदिल्ली*********************************** ‘रामनवमी’ (२६ मार्च) विशेष…. रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के नैतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पुण्य और पवित्र अवसर है। आज जब दुनिया युद्ध, हिंसा, आतंक, असहिष्णुता, पारिवारिक विघटन, राजनीतिक अविश्वास और नैतिक पतन जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रही है, तब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन-दर्शन केवल आस्था … Read more

राम अवध में आ गए

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* ‘रामनवमी’ विशेष (२६ मार्च)…. कौशल्या की गोद में, हैं बालक श्रीराम।जिनके सँग तो धर्म है, मर्यादा-आयाम॥सबके मन नर्तन करें, बहुत सुहाना पर्व।भक्त कर रहे आज सब, इस युग पर तो गर्व॥सकल विश्व को मिल गया, एक नवल उपहार।राम अवध में आ गए, फैला है उजियार॥ जन्म राम जी का हुआ, मंगल … Read more

राम है मुक्ति प्रदाता

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* ‘रामनवमी’ विशेष (२६ मार्च)… करना तुम विश्वास, राम है मुक्ति प्रदाता।जगती का आधार, सभी के भाग्य विधाता॥असुरों के हैं काल, भक्त की रक्षा करते।कण-कण में हैं व्याप्त, कष्ट सबका ये हरते।। करते हैं विश्वास, राम मर्यादा पालक।चलें न्याय की राह, यही हैं जग संचालक।।सबके हैं आराध्य, राम सबके मन में हैं।सूरत … Read more

हम जीते संस्कृति हर दिन

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ‘रामनवमी’ विशेष (२६ मार्च)… रामनवमी है मर्यादा पुरुषोत्तम,राम का जन्म दिवस महानदिखलाती है हमारी संस्कृति,की चमकती विरासत पहचान। लोग कहते हैं भारत,की संस्कृति अनमोल हैश्री राम, कृष्ण, बुद्ध और,गुरु नानक की जग जननी है। नवरात्रि के ये नव दिन,माता रानी देती आशीष हर दिनबुराइयों को दूर करती हैं,हम जीते संस्कृति हर … Read more

कृत्रिम मेधा:भारतीय भाषाओं के डाटा की कमी अत्यंत गंभीर मुद्दा

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) विश्व की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक बन चुकी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, मीडिया, प्रशासन और व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इस तकनीक की सफलता का एक महत्वपूर्ण आधार विशाल मात्रा में उपलब्ध … Read more

संवेदना, लय और संप्रेषणीयता से युक्त हो कविता-सिद्धेश्वर

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पटना (बिहार)। कवि यदि लिखें, तो वह सचमुच कविता हो-संवेदना, लय और संप्रेषणीयता से युक्त, न कि मात्र सपाट गद्य का विस्तार। इसी शून्य का लाभ आज गीत, ग़ज़ल, आज़ाद ग़ज़ल और दोहा लिखने वाले रचनाकार उठा रहे हैं। सच तो यह है कि इन्हीं विधाओं ने कविता को आमजन के बीच जीवित बनाए रखा … Read more