मजदूर, मशीन और मर्म का मंथन
डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** ‘मजदूर दिवस’ विशेष…. ‘मजदूर दिवस’ बीत गया—एक ऐसा दिन, जब मंचों पर श्रम की महत्ता के गीत गाए गए, भाषणों में गरीब, किसान और मजदूर वर्ग को राष्ट्र की रीढ़ बताया गया और संवेदनाओं के शब्दों से वातावरण भर दिया गया। सरकारी सभागारों से लेकर निजी संस्थानों तक, हर जगह श्रम … Read more