ठंड का अनुभव

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** ठंड का अनुभव मिला-जुला अनुभव,बहुत ही मुश्किल है इसका प्रभाव। हाथ-पैरों में कंपकंपी दिल चाहे गरमी,काम तो काम है, चाहे हो कितनी सर्दी। वक़्त पर कार्यालय, वक़्त पर विद्यालय,वक्त पर आवासीय, वक्त पर पुस्तकालय। कार्य न रूके, आस न टूटे, साथ न छूटे,सबका साथ जब मिले, आस संग न छूटे। चाय के … Read more

ठंड झूमकर आई

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** प्रखर सूरज नहीं उगतानिकलता देर से बाहर,अँधेरा हो रहा जल्दीठंड अब झूमकर आई। घूमने का मजा दिन भरउठाते लोग जाड़े में,चलो सब घूम कर आएँठंड अब झूमकर आई। पुष्प हर रंग के प्यारेखिले हैं आज बगिया में,धूम अब सब्ज़ियों की हैठंड अब झूमकर आई। स्वाद की बात जाड़े मेंबनाओ हलवा गाजर का,साग … Read more

सुख-शांति के लिए लें संकल्प

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… २०२५ बीत गया…। कैलेण्डर बदल जाता है, साथ में हर दिन कुछ खट्टी-मीठी यादों को देकर जाता है… क्योंकि कालचक्र तो अनवरत् गतिमान रहता है….वर्ष २०२६ का आगमन हो चुका है… नववर्ष अपने साथ बहुत सारी उम्मीदें और सपने लेकर आता है, इसी लिए … Read more

नव वर्ष का संचरण

डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… कैलेंडर के आखिरी पन्ने के साथ,वह अपनी थकान का, एक और अध्याय मोड़ देती हैवह उन रातों को विदा कर, स्वागत करती है नूतन वर्ष का…सुबह की सुनहरी किरणों का,करती है अभिनंदन… शत-शत वंदन। नया वर्ष उसके लिए कोई शोर नहीं,एक गहरी, … Read more

लो जनम इस धरा पर यही

जी.एल. जैनजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* श्रीरामजी की मर्यादा के रामराज्य की आराधना,श्रीकृष्णजी के अर्जुन के युद्ध की सार्थक साधनाशिखर पुरुष सुशासन की गंगा बहाने वाले,तुम लो जनम इस धरा पर यही हमारी मनोकामना। जिन्होंने मौत को भी, दूर से ललकारा,उनकी मुट्ठी में कैद, वक़्त भी हारामरने की फुर्सत ही कहाँ थी अटल जी को,काम था, भारत के … Read more

हिन्दी क्यों नहीं सिखाई

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ कलम बिना स्याही अधूरी है,ठीक वैसे ही स्याही बिन कलम सूखीअपने बच्चों से बड़ी दुश्मनी की,किस लिए मैंने अंग्रेजी स्कूल में रख दिया। अपने बच्चों को संस्कृति से दूर किया,अपने बुढ़ापे का सहारा छिन गयाबेसहारा मुझे कर दियाजो बच्चे दिल के बहुत करीब थे,अंग्रेजी भाषा के कारण मुझे बेसहारा कर गए। हिंदी … Read more

हैदराबाद में १० को त्रिभाषा सम्मेलन, काव्य पाठ भी

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जबलपुर (मप्र)। प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा व एसएचएमवी फाउंडेशन (हैदराबाद) के संयुक्त तत्वावधान में ‘विश्व हिंदी दिवस’ (१० जनवरी) को हैदराबाद में त्रिभाषा सम्मेलन व सम्मान समारोह रखा गया है। मुख्य अतिथि डॉ. धर्म प्रकाश वाजपेयी (दिल्ली) व अतिथि डॉ. रावी नूतला शशिधर हैं।फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. विजय कुमार के अनुसार सम्मेलन में तेलुगु वक्ता … Read more

हकीकत हर शहर की

वंदना जैनमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ यह शहर जागता सोता-सा है,ट्रेनें दौड़ लगा रही हैंलाइटें जाग रही हैं,बसें थकी-थकी सी लड़खड़ा रही हैंकारखानों में नाईट ड्यूटी अपना पेट पाल रही हैं,दवा की दुकानें खुली हैं। मुलायम गद्दों पर कुछ लोग करवटें ले रहे हैं,फुटपाथ पर सोने वालेमच्छरों से खुद को कटवाकर,कुत्तों संग चैन से सो रहे हैं। कुछ … Read more

नववर्ष का स्वागत

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… भूलकर सभी पुराने ग़म,चलो सजाएं सपने नएहर दिल में प्रेम का दीप जलाकर,नववर्ष का करें स्वागत। नई उम्मीदों की रोशनी में,मंजिल की ओर कदम बढ़ाएंइक-दूजे का बनें सहारा,खुशियों से जीवन सजाएं। जो सपने रह गए अधूरे,अब उनको पूरे करना हैमन में ले विश्वास नया,जीवन … Read more

संगीत है जीवन

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** जीवन एक संगीत है,और यही मेरा मीत हैऔर यह मेरीज़िंदगी का गीत है। जिस प्रकार संगीत,के स्वर हैं सातहमारी ज़िंदगी में सच होती है ये बात। संगीत से हमें,खुशी मिलती हैज़िंदगी की उदासीदूर रहती है। हमारी साँसों में,हमारी बातों में संगीत हैमधुर है ये,ज़िंदगी का गीत है। संगीत हमारी ज़िंदगी में,आनंद भर देता हैग़म से … Read more