पूजा और पाखंड के बीच खड़ा मनुष्य
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मनुष्य की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वह पूजा को साधना कम, प्रदर्शन अधिक बना लेता है। मंदिर, मस्जिद, गिरजों और गुरुद्वारों में भीड़ बढ़ रही है, पर पड़ोस के भूखे की थाली खाली है। माथे पर तिलक, हाथों में माला, होंठों पर मंत्र और व्यवहार में छल, … Read more