सूचना प्रौद्योगिकी ने नागरी लिपि और हिंदी भाषा को विस्तारित किया-डॉ. पाल

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नई दिल्ली। भारत सरकार के कार्यालयों में प्रायः देखा जाता है कि सरकारी कामकाज क्लिष्ट भाषा में किया जाता है, जिससे कर्मियों में हिंदी के प्रति अरुचि पैदा होने लगती है। यदि सरकारी कामकाज आम बोलचाल की भाषा में होने लगे तो इससे हिंदी भाषा और नागरी लिपि की लोकप्रियता बढ़ने लगेगी। सूचना प्रौद्योगिकी ने … Read more

वार्षिकोत्सव में रचनाकार सम्मानित

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रांची (झारखण्ड)। साहित्य संगम संस्थान का वार्षिकोत्सव एवं रचनाकार सम्मान समारोह प्रेस क्लब रांची में हुआ। शुभारंभ दिनेश कुमार मिश्रा द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं शंखनाद से किया गया।  सरस्वती वंदना के पश्चात समारोह में देश-विदेश के साहित्यकारों ने सहभागिता की। कवि सम्मेलन एवं सम्मान सहित रूपमाला की पुस्तक ‘बस दो कदम’ तथा स्वाति मानधन्या की … Read more

गोष्ठी में गूंजी साहित्य संवेदनाओं की स्वर लहरियाँ

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कोलकाता (पश्चिम बंगाल)। नवल विहान साहित्य कला सांस्कृतिक मंच (पश्चिम बंगाल इकाई) की आभासी मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन श्रीमती अंजलि किशोर कृति की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आशा लता पुष्प रहीं।  गोष्ठी का शुभारंभ सोनी बरनवाल द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया। दिवंगत शायर डॉ. बशीर बद्र को मौन श्रद्धांजलि … Read more

क्यों काटे हरे-भरे पेड़

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)… करुण पुकार सुनो,पेड़ आज आँसू बहा रहे हैंलोगों को समझाते-समझाते थक गए,फिर भी क्यों काटे जा रहे हरे-भरे पेड़ ? कब ‘जागोगे’ नींद में सोने वालों,पर्यावरण को ‘बचाओ’ नहीं तो कुछ भी नहीं रहेगाजीवन का पर्याय हरियाली, पेड़-पौधे हैं,फिर क्यों ‘काटे’ जा … Read more

करें प्रकृति श्रृंगार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)… पुरखों से मिली थी हमेंमुस्कुराती हरी-भरी धरती,निर्मल वातावरण और प्राकृतिक संपदा से हमें संपन्न करती। प्रकृति के असीम उपवन कोस्वार्थवश हमने क्षीण किया,हरितिमा की करुण पुकार कोनीरवता में परिवर्तित किया। विकास के उन्मत्त रथ परविनाश का ध्वज लहराया,कौन समझे यह मौन वेदना ?स्वार्थ ने … Read more

प्रकृति बिन जीवन कहाँ ?

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)… गीत प्रीत वनमीत बन, रखें श्वाँस  का ध्यान। एक वृक्ष माँ नाम पर, पर्यावरण सुहान॥ गौरवगाथा प्रकृति की, धरती मंगल  गान। बचे विश्व प्राणी जगत, जागे मनु  सन्तान॥ सुख वैभव ऐश्वर्य सब, सफल प्रकृति मुस्कान। गिरि कानन निर्झर सरित, मत काटो इन्सान॥ हरियाली धरती शुभे, प्राणी सकल जहान। प्राणवायु निर्मल बहे, रोपें तरु उद्यान॥ पालक तरुवर सम्पदा, वाहक जीवन लोक। निर्मल चहुँ वातावरण, … Read more

राजभाषा अधिनियम-नियम का उल्लंघन तथा घोर भाषाई भेदभाव के विरुद्ध शिकायत

सेवा में,माननीय संयुक्त सचिव,राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय,भारत सरकार, नई दिल्ली। विषय: बौद्धिक संपदा महानियंत्रक कार्यालय द्वारा राजभाषा अधिनियम, १९६३ की धारा ३(३) एवं राजभाषा नियम, १९७६ के नियम ११ का खुलेआम उल्लंघन, नवीन वेबसाइट पर त्रुटिपूर्ण स्वचालित अनुवाद (भाषिणी टूल) तथा जनता के साथ घोर भाषाई भेदभाव के विरुद्ध शिकायत। महोदय,    मैं इस शिकायत … Read more

स्वास्थ्य सबका अधिकार, तो ‘इलाज’ क्यों ‘बीमार’ ?

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* आज स्वास्थ्य पर सभी का अधिकार है, पर सबको अपार सुविधा नहीं मिलती है, जबकि यह मौलिक अधिकार है एवं सभी को सदाबहार सुविधा मिलनी चाहिए।    आज किसी गरीब को यदि बीमारी हो जाए, तो जीवन उसका नरक बन जाता है। पैसे की चिंता जीते-जी उसके प्राण हरती है। बड़े-बड़े लोग … Read more

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ज़िंदगी ने कदम-कदम पर इम्तिहान लिया। इतने कठिन इम्तिहान लिए, कि आज सोचती हूँ तो आश्चर्य होता है कि किस तरह से उन सब पर विजय प्राप्त की। कदम-कदम पर चुनौतियाँ आईं।    एक ऐसी लड़की… जिसके मायके में हर तरह की सुविधाएँ थीं… खाने-पीने की कोई तंगी नहीं थी। बहुत बड़ा … Read more

ताप कहूँ या सूर्यदेव संताप!

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** नौ तपा को ताप कहूँ, या सूर्यदेव संताप कहूँभीषण गर्मी, लू कहूँ, या आग-शोला कहूँ! झुलसे सारे पेड़-जंगल, इष्टदेव का खेल अमंगलसूख गए नदी-तालाब, कौन देगा यह जवाब ? नौ तपा की तपिश भीषण, ज्येष्ठ माह मे गर्म व उष्णअजब तेज हो वाष्पीकरण, सीधी पड़े सूरज की किरण। सूर्य रोहनी नक्षत्र के निकट, ताप तपिश हो भारी विकटलू, … Read more