सिनेमा का वैश्विक उत्सव प्रारम्भ

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दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (मीडिया सेंटर) द्वारा आयोजित सिनेमा का वैश्विक उत्सव अपने पूरे वैभव के साथ शुरू हुआ। इस १५वें उत्सव का शुभारंभ ऐसे मंच के रूप में हुआ, जहाँ कला, संस्कृति और सिनेमा की सीमाएँ मिटती नजर आईं।    यह आयोजन ८ मई तक चलेगा, जिसमें १७० से अधिक फिल्मों की स्क्रीनिंग … Read more

‘भूमंडल की अनुपम रचना माँ’ लोकार्पित, किया मनोरम काव्य पाठ

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गाजियाबाद (उप्र)। देवप्रभा प्रकाशन ने लेखिका कुसुम लता पुंडोरा ‘कुसुम’ की नवीनतम पुस्तक ‘भूमंडल की अनुपम रचना माँ’ का लोकार्पण समारोह एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन निर्माण विहार स्थित एसएसएस स्टूडियो में किया। साहित्यकारों ने पुस्तक की विषयवस्तु और भाव-भूमि की मुक्तकंठ से सराहना की।      आयोजन की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सविता चड्ढा ने की। … Read more

नारी के विविध रूप

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ममता की गोद में सपनों का संसार है,आँचल में सिमट हर जीवन का विस्तार हैथामे हुए शिशु को मुस्कानों में ढालती,वो नारी ही है जो सृष्टि का आधार है। रसोई की आँच में तपकर जो खिलती है,थाली में प्रेम सजाकर हर दिन मिलती है,अपने ही हाथों से खुशियाँ परोसती,वो … Read more

आस लगाना बेवकूफी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ जगह-जगह बात बनाना भी बेवकूफी है,किसी से लगाव लगाना भी बेवकूफी है। काट-छांट हो शब्दों की अगर कहीं,ऐसे में बातचीत करना भी बेवकूफी है। जो किसी के दर्द को समझ ना सके,ऐसे रिश्तों से आस लगाना भी बेवकूफी है। जब मन हो साथ दे, जब चाहे छोड़ दे,फिर तो साथ बैठना भी … Read more

आदेश जैन को दिया राष्ट्रभाषा सम्मान

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नागपुर (महाराष्ट्र)। प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी व प्रदीप मिश्र ‘अजनबी’ (दिल्ली महासचिव) के मार्गदर्शन में नागपुर आकाशवाणी विभावरी के उद्घोषक, विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के संयोजक व साहित्यिक मंच के संस्थापक आदेश जैन को सम्मानित किया गया। प्रेरणा राष्ट्रभाषा सम्मान में स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र आदि आदेश जैन को मेघा अग्रवाल … Read more

मेरी प्यारी माँ

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** एक चिट्ठी अब, मेरी माँ के नाम,जो करती रहती, घर के पूरे काम। सुबह से लेकर, रात तक लगातार,फिर करती है, मेरी माँ तब आराम। माँ से आती है, ममता की खुशबू,मेरी माँ बस, तू ही तू होती हर सू। तेरे आँचल में है, अपना बसेरा,तेरे सिवा नहीं है, कोई अब मेरा। … Read more

अगर ये  पंछी न होते तो…

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* पूर्वांचल पर भोर की लालिमा धूमिल हुई, तब उजियारे की नई आभा लेकर सूरज की कोर उभरने लगी है। भीषण गर्मी के दिन हैं, फिर भी सुबह की ठंडी हवा के झोंके कुछ यूँ छू रहे हैं, जिससे तन-मन प्रसन्न हुआ जा रहा है।   सामने इमली के पेड़ों में छिपकर एक भरद्वाज का … Read more

बिन श्रमिक विकास नहीं

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… जग के सपने साकार करते,दिन-रात करके दौड़ा करतेछैनी-हथोड़ा-फावड़ा थामते,इतर, उज्जवल रस भरते। पत्थर तोड़ते राह बनाते,मेहनत करके पसीना बहातेमेहनतकश, वतन सजाते,फिर भी जग से उपेक्षित रहते। सुबह सवेरे खेत जोतते,भूख-प्यास अनायास त्यागतेजग की खातिर अनाज उगाते,मेहनत फल, अंश मात्र … Read more

केवल रोटी…

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… रचनाशिल्प:१०, ८, ८, ६ भूखा रहता है, दुख सहता है, केवल रोटी, पाना है।सुख से रहे स्वजन, शांत रहे मन, इसको जीवन, माना है॥ गिरता पड़ता है, फिर लड़ता है, श्रम से न कभी, वह थकता।रखता है हिम्मत, रही न … Read more

मजदूर नहीं, धरती की शान

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… मजदूर नहीं, धरती की शान हैं,मजदूर नहीं, हम भी धरती के इंसान हैं। माना अपनी ज़िंदगी के कहाँ मालिक हम हैं,खुश हो जाते कम में भी, पर बहुत गम हैं। माथे पर पसीना आँखों में सपने हजार हैं,मिट्टी लगी है मुठ्ठी … Read more