एक पीड़ा..

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)…. स्वर्ग की वादियों मेंहिंदू की कहानी लिखी गई,खुशियों की बारातों मेंआँखों से खून की नदी बही। पहलगाम में जबसिंदूर उजड़ गया,चेतावनी नहीं थी वोसनातन पर हमला था। “सनातनी हैं हम” —सुनते ही आतंकी टूट पड़ेआँखों के सामने खुशीमातम में बदल गई,रोम-रोम पर अत्याचार हुआये कैसा कहर … Read more

काश! तुम समझ सकते

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तुम थक कर सो गए थे न,फिर मध्य रात्रि मेंउनींदी अखियों से,क्यों झांका वॉट्सएप में!मेरा शेर, कभी मेरी कवितापढ़ने के लिए या फिर सिर्फ,ये देखने कि मैंने क्या लिखा है ? तुम जान-बूझ कर,इसका जवाब नहीं दोगेरात और सुबह तन्हा रहकर,उन पंक्तियों को दुबारा पढ़कर भीतुम खामोशी की परत चढ़ाकर,मेरी लेखनी … Read more

भारतीय सेना की सटीक रणनीति का जश्न है ‘आपरेशन सिंदूर’

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)…. जब कश्मीर में अमन-चैन की इबादत लिखी जा रही थी, सभी भाई-बंधु मिलजुलकर एकजुटता की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल प्रस्तुत कर रहे थे; ऐसे में दुश्मन पाकिस्तान के आतंकवादियों ने अमन-चैन को खत्म करने का दुस्साहस किया। वह भी तब, जबकि माँ भारती की … Read more

साहस की कहानी था ‘सिंदूर’

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)…. देश तभी होता सुरक्षित है,जब त्याग घर-घर जलता हैएक सैनिक सीमा पर रहता है,पीछे पिघलता पूरा परिवार है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ केवल,सीमा का अभियान नहीं थायह नारी के साहस की कहानी,मौन और गंभीर गीत था। सीमा पर जब उड़ी थी धूल,आकाश में बारूद भरा थाधरती ने सुना … Read more

अपना धर्म निभाते हैं…

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. मेहनत की रोटी खाते हैं,हम पसीना खूब बहाते हैंसबका साथ निभाते हैं,हम गीत खुशी के गाते हैं‘मजदूर दिवस’ हम मनाते हैं…। मकानों की नींव हमसे है,बालू-सीमेंट के गारे हमसे हैहम ही तो ताजमहल बनाते हैं,हाथों में छाले पड़ जाते हैं‘मजदूर दिवस’ … Read more

सम्मान के अधिकारी हैं, दो

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. संघर्ष रात-दिन किया, मगर वो मौन रहा,अपनी पीड़ा को कभी किसी से नहीं कहापरिवार का पालन करने को, दिन- रात काम में जुटा रहा,तपती हुई भीषण गर्मी में वो ईंट और गारा ढोता रहा। भीषण शीत-ताप सह, भवन बनाने में संलग्न … Read more

मासूम का करुण क्रंदन

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** यूक्रेन और रूस के बीच छिड़े युद्ध में राजधानी कीव में फंसी जूही अपने ३ महीने के बच्चे को अपनी छाती से चिपकाए हुए बैठी हुई थी। गरजती-बरसती मिसाइल और बम के धमाकों की आवाजों से वहाँ बैठे सभी लोगों के चेहरे पर भय और खौफ का आतंक छाया हुआ था। तभी धमाके की … Read more

कैसा ये इंसान ?

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* सिसकती मानवता,दम तोड़ती संवेदनाएंहृदय हीन मानव,इन्हें कैसे इंसान कहें ? आँखों में हवस,दिल में हैवानियतदरिंदगी का आलम,इन्हें कैसे इंसान कहें ? पहचान इंसान की इंसानियत,मानव की मानवता से,ये भी जो भूल बैठा आज,इन्हें कैसे इंसान कहें ? जानवर अवाक हैं,आँखों में प्रश्न हैं।क्या अंतर है हम दोनों में,इन्हें कैसे इंसान कहें ??

छालों की चुप्पी — सम्मान की पुकार

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. धूप जली, तन जला, फिर भी चला — वो चला,राह कठिन, पग थके, मन न डरा — वो चला। हाथों में छाले लिए, स्वप्न पाले लिए,दर्द छिपा, हँस पड़ा, अश्रु टाले लिए। ईंट पर ईंट रख, जग सँवारा सदा,खुद … Read more

कहानी प्रतियोगिता के पुरस्कार बाँटे 

hindi-bhashaa

दिल्ली। २ मई को दिल्ली के मंडी हाउस स्थित रबीन्द्र भवन में साहित्य अकादमी के सभागार में विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के तत्वावधान में अनीता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता–२०२५ के तृतीय संस्करण के अंतर्गत ‘पुरस्कार वितरण समारोह एवं कहानी पर चर्चा’ का आयोजन किया गया। अध्यक्षता अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ … Read more