भागलपुर के साहित्यिक अध्याय को समाहित किया है डॉ. तुषार कांत ने
भागलपुर (बिहार)। ‘पारस’ पारस ही हो सकता है, दूसरा कोई पत्थर पारस नहीं हो सकता है। डॉ. तुषारकांत ने भागलपुर के एक साहित्यिक अध्याय को इस पुस्तक के माध्यम से समाहित किया है।परमहंस स्वामी श्री आगमानंद महाराज ने करतल ध्वनि के बीच वरिष्ठ पत्रकार-लघुकथाकार पारस कुंज के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित पुस्तक यूँ ही … Read more