बचपन और आम का स्वाद

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बचपन की गर्मियाँ आज भी मन में मीठी स्मृतियों की तरह बसी हुई हैं। जैसे ही विद्यालय की छुट्टियाँ होतीं, मन खुशी से झूम उठता था। तपती दोपहरी में भी हमें कोई थकान नहीं होती थी, क्योंकि आम के बागों की सैर हमारा इंतज़ार कर रही होती थी।गाँव के … Read more

परिवर्तन नियम

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** गर्मी, सर्दी और ये बारिशक्रम से सब परिवर्तन होते,नियम प्रकृति का सत्य यही है,जिस पर सब विधिवत चलते। परिवर्तन है सत्य यहाँ परकुछ तो रोज-रोज होता,इनके बीच झूलता जीवनअनुभव से अनुभव बढ़ता। बीते वर्ष सुहाने क्षण वोहृदय पटल पर एक-एक छाए,तोड़ पुराने बंधन सारेआगे को सब बढ़ते जाएँ। रखना सौम्य भाव सब … Read more

सेहत दौलत है बड़ी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** अच्छी सेहत है अगर, तो मिलता आनंद।ताक़त मिले शरीर को, सुस्ती सारी बंद॥ सेहत दौलत है बड़ी, रखना इसे सँभाल।लापरवाही जो करें, उनके संग बवाल॥ सेहत तो वरदान है, धारण कर संकल्प।नहीं बिगड़ने दो कभी, जीवन है अति अल्प॥ अच्छी सेहत तब बने, जब अच्छा आहार।योग और कसरत करो, तो जय-जय-जयकार॥ … Read more

निशा भास्कर की रचनाओं में समकालीन कविता का नया तेवर-सिद्धेश्वर

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पटना (बिहार)। महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा प्रवर्तित मुक्त छंद का मूल उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करना था, न कि काव्यात्मकता का लोप करना। जब नई पीढ़ी के रचनाकार पुनः छंद और लय की ओर उन्मुख होते दिखाई दे रहे हैं, तो यह हिंदी कविता के उज्ज्वल भविष्य का सकारात्मक संकेत है।इसी सकारात्मक … Read more

कोरियन नाटक: भारतीय मनोरंजन की दिशा पर पुनर्विचार आवश्यक

ललित गर्गदिल्ली*********************************** विश्व के मनोरंजन जगत में पिछले कुछ वर्षों में यदि किसी देश ने टेलीविजन और वेब सीरिज के माध्यम से पूरी दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित किया है, तो वह दक्षिण कोरिया है। कोरियन नाटक (ड्रामा) केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रभाव, सामाजिक शिक्षा, भावनात्मक परिपक्वता और जीवन मूल्यों के प्रस्तुतिकरण का सशक्त … Read more

नहीं समझा मेरे त्याग को

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** अब तक तो सबकी खुशियों की खातिर जीती आई थी,सबकी खुशियों की खातिर अपनी खुशी मारती आई थी। किंतु किसी ने कभी नहीं समझा मेरे इस त्याग को,सोच लिया अब स्वयं बनाना होगा अपने भाग्य को। जब मैंने अपनी इच्छा से जीने की कुछ कोशिश की,बर्दाश्त ना हुआ लोगों को, कानों में … Read more

श्रीकृष्ण की भावामृत धारा में अवगाहित हुई कल्पकथा काव्य गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)। हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा २४३वीं साप्ताहिक पौराणिक एवं भक्ति प्रसंग आधारित काव्यगोष्ठी का आयोजन माधव स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण विषय पर अत्यंत श्रद्धा एवं भावमाधुर्य के साथ हुआ। इस अनुपम आयोजन में भक्ति, दर्शन और काव्य का अद्वितीय समन्वय दृष्टिगोचर हुआ, जहाँ प्रत्येक रचना … Read more

पानी बचाइए

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* नीला अम्बर धरती प्यारी,सबकी जीवन डोर है पानीयह जीवन का आधार है,पानी बचाइए। नदी, तालाब कुएं और झरने,जल से ही तो जीवित हैंसुख न जाए यह जलधारा,पानी बचाइए। पानी की हर बूँद कीमती,व्यर्थ इसे न बहने दोजल है तो कल है इसलिए,पानी बचाइए। पानी को रखें सुरक्षित,अपनाएं जल संरक्षण हम।भावी पीढ़ियों के … Read more

बी.एल. गौड़ एवं डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा रचित ‘भविष्य की अयोध्या’ लोकार्पित

नई दिल्ली। जनपथ स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में श्री अयोध्या न्यास द्वारा ‘अयोध्या पर्व’ का भव्य आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक उत्सव के प्रथम सत्र में सुप्रसिद्ध उद्यमी एवं वरिष्ठ साहित्यकार-कवि बी.एल. गौड़ और वरिष्ठ कवि-लेखक एवं पत्रकार डॉ. शैलेश शुक्ला की कृति ‘भविष्य की अयोध्या’ का लोकार्पण पद्मभूषण राम बहादुर राय ने … Read more

गर्मी आई, चली लू की रेल

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** ठंडा-ठंडा, कूल-कूल,सब बातों को जाओ भूल। गर्मी आई, प्यास बढ़ाई,पियो शर्बत, कुल्फी आई। तरबूजा-खरबूजा, खीरा-ककड़ी,धनिया, पुदीना लाते ठंडाई। नींबू पानी, दही और लस्सी,कोकाकोला, माजा, पेप्सी। सबमें आए है बड़ा मजा,जब मिलकर पीते रूह-आफजा। कोई पीता शर्बत बेल और गन्ना,कोई पीता आम का पन्ना। नीता, रीता, सीता, शीला,पिकनिक जाते कश्मीर ठंडीला। बर्फ की … Read more