भारत में हिन्दी को स्थान-सम्मान अपेक्षित

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘विश्व हिंदी दिवस (१० जनवरी) विशेष…. हर वर्ष १० जनवरी को मनाया जाने वाला ‘विश्व हिंदी दिवस’ केवल एक औपचारिक या प्रतीकात्मक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हिंदी भाषा की वैश्विक यात्रा, उसकी बढ़ती प्रतिष्ठा, उपस्थित चुनौतियों और हमारे अपने राष्ट्रीय आचरण की विडंबनाओं पर गहन चिंतन का अवसर है। यह दिन … Read more

माँ के जज़्बात

डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ माँ के हाथों की लकीरें, घिस गईं थीं,बर्तन मांजते…पाँव की बिछिया दब गई थी,रस्में निभाते…घूंघट के नीचे ले लेती थी सिसकियाँ तब,जब, याद आ जाते थे पीहर के नजारेब्रम्ह बेला में ही पीस-कूट लेती थी,गुनगुनाते अनाज के दाने,भर लाती थी गाँव के बीच में बने,पक्के कुएं से ताजा पानी। अपने … Read more

गर्व है हिंदी भाषा पर

धर्मेंद्र शर्मा उपाध्यायसिरमौर (हिमाचल प्रदेश)******************************************** विश्व हिन्दी (१० जनवरी) विशेष… गर्व है ऐसी भाषा पर,जिसे विश्व भी स्वीकार करेंगर्व है हिंदी भाषा पर,जिससे देश महान बने। गर्व है ऐसी भाषा पर,जो प्राण न्यौछावर को बतलाएगर्व है हिंदी भाषा पर,जो त्याग भावना को सिखलाए। गर्व है ऐसी हिंदी पर,जो विश्व में सनातन प्रेम फैलाएकरुणा दया जन–जन … Read more

जीवन की पहचान है हिन्दी

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** विश्व हिन्दी (१० जनवरी) विशेष… हिंदी केवल भाषा नहीं, जीवन की पहचान है,जन-जन के हृदय में बसी, भावों की मुस्कान हैमाटी की सौंधी खुशबू, शब्दों में ढली हुई,संस्कारों की उजली धारा, युग-युग से चली हुई। राजमहलों से गलियों तक, इसका ही विस्तार है,लोकस्वर की इस वाणी में, भारत का संसार … Read more

ऋतु-शिशिर

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* ढाने लगा शिशिर , तेज अपने अब तेवरजहाँ तहाँ सुलगने लगे अलाव के जेवरशीत ऋतु का जोर हुआ बदले है आलमसब लपेटना चाहते है रजाई गरमागरम। ताप रहे है सब निर्धन, अलाव के आसपासघेर घेरकर बैठे है, चेहरेपर लेकर अग्निउजासदिन- गरीब की झोपड़ियो में , कपड़े नही पर्याप्तठंड के इस कोहराम … Read more

१९८४ का वो खौफनाक मंजर

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** “उफ्फ कितना भयानक मंजर था वह।”“किसकी बात कर रही हो आंटी ?”सुधा एकदम जैसे सपनों से जागी और बोली कि बस उस दिन को याद कर रही हूँ।“किस दिन को ?”“३१ अक्टूबर सन् १९८६ का दिन था बेटा। उसी दिन तेरे अंकल की पदोन्नति हुई थी। इंदिरा गांधी की हत्या कर दी … Read more

आशा है बेहतर नया साल मिले

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… बहुत ख़ूबसूरत रहा,बीता हुआ सालखुशियों के कुछ पल थे,कुछ दुखों के जाल। खुश रहना सीखा मैंने,चाहे जैसा भी हो हालकुछ खट्टी-मीठी यादें मिली,कुछ प्यार के वादे मिले। कहीं दोस्तों की महफ़िल मिली,कहीं ख़ुद को हम अकेले मिलेकहीं नफरतें झेली हमने,कहीं अपनों के मेले मिले। … Read more

समाज को अधिक मानवीय बनाना ही लेखन का उद्देश्य-पंकज मिश्र

hindi-bhashaa

नई दिल्ली। तकनीकी विकास और बाजार की व्यवस्था ने कुछ हद तक मुक्ति भी दी है और एक अलग तरीके से अन्यायपूर्ण व्यवस्था भी बनाई है। लेखक का स्वप्न है कि ऐसा समाज बन सके जो न्याय आधारित हो। मेरा कहानी लेखन इसी दिशा में एक विनम्र प्रयास है कि हमारा समाज अधिक मानवीय बन … Read more

हिंदुत्व के पुरोधा

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** स्वामी विवेकानंद जयंती (१२ जनवरी) विशेष… कलकत्ता में जन्म लिए प्रतिभाशाली नरेंद्र नाथ जी दत्त,माता भुवनेश्वरी, पिता प्रसिद्ध वकील विश्वनाथ दत्त१२ जनवरी १८६३ मालूम है, जन्म वर्ष शुभ मुहूर्त का वक्त,शिक्षा ज्ञान से अभिभूत होकर बने माँ काली के परम भक्त। प्रेसीडेंसी कॉलेज व स्कॉटिश चर्च कॉलेज से पाई … Read more

राजभाषा अधिनियम की धारा एवं नियम का योजनाबद्ध उल्लंघन

प्रति,सेवा में,सचिव (समिति),संसदीय राजभाषा समिति,११, तीन मूर्ति मार्ग, नई दिल्ली-११००११ विषय:राजभाषा अधिनियम की धारा ३(३) एवं नियम ११ के योजनाबद्ध उल्लंघन तथा द्विभाषी स्वरूप की त्रुटिपूर्ण व्याख्या के विरुद्ध गंभीर शिकायत। महोदय,मैं भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा राजभाषा नीति की निरंतर की जा रही अवहेलना और नागरिकों के साथ भाषाई … Read more