नश्वरता
सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* फिर एक कविता आकार लेने लगी है,भीगे शब्दों के वसन धारण करने लगी हैवो जो पड़ा है जमीं पर… निर्विकल्प-सा,उसकी सौहार्द्रता का गुणगान करने लगी हैफिर से एक कविता आकार लेने लगी है। घटनाएँ खास वाली, बताई जा रही है,उसकी पूरी ज़िंदगी, गुनगुनाई जा रही हैअजनबियों को यादगार किस्से कहकर,ज़िंदगी-भर की … Read more