‘स्त्री’ देती जीवन

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** ‘स्त्री’,धरा समानकरना नहीं तिरस्कार,देती जीवनवरदान। ‘नारी’,जन्म संतानपालन-पोषण करती,भू समानअभिभावक। ‘औरत’,जगत पहचानकरती जीवन संघर्ष,चुप रहतीपुष्प। ‘महिला’,कोमल मनवक़्त पर मैदान,भिड़ जातीरक्षा। ‘वनिता’,दुर्गा, कालीनहीं निर्बल-अबला,कभी ‘कामिनी’जानकी। ‘रमणी’,संस्कृति वाहककरती सदा भला,सृजन धुरीसंवेदनशील। ‘भार्या’,साथ चलतीप्रधानमंत्री, वैज्ञानिक, अभियंता,उड़ाती विमानसफलता। ‘जननी’,करती भागीदारीनिभाती हर परम्परा,रूप शक्तिपरिवार। ‘कांता’,सौन्दर्य-लक्ष्मीलुटाती ममता अपार,दर्द सहतीमुस्कान। ‘अर्धांगिनी’,कहलाती माँपर रहती पीड़ित,अनेक भेदभावविडम्बना। ‘मानवी’,सम्भालती घरहै रूप शक्ति,रखती … Read more

सम्मान कार्यक्रम २४ को, लेखक-कवि भी करें नामांकन

hindi-bhashaa

मुजफ्फर नगर (बिहार)। मेरा वजूद फाउण्डेशन (मुजफ्फर नगर) की मासिक बैठक प्रत्यूष गोयल के प्रतिष्ठान मित्तल हाउस में अध्यक्ष पं. संजीव शंकर की अध्यक्षता में रखी गई। इसमें निर्णय लिया गया कि २४ मार्च को ‘’फिफ्टी प्लस द टैलेन्ट शो’ किया जाएगा। इसमें नामांकन के लिए साहित्यकार, कवि, छायाकार, नायक, सशक्त महिला, पत्रकार व अन्य … Read more

सदा खुशबू रचती नारी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… कई संघर्षों के बीच,कई कटाक्षों के पारकटी-कटाक्ष अपमान के बीच के बाद,संघर्षों से संघर्ष करगालियों-घरों के अंदर,सदैव खुशबू फैलाती है नारी। पसीने से लथपथ चेहरा,जख्मों से भरे हाथघिसे नाखूनों वाली नारी,फूल-से कोमल हाथ, जख्म सहते हाथदर्द सहते, चोट खाते हाथ,यही हाथ खुशबू रचते हैंसंघर्ष करते हैं ऐसे … Read more

मस्ती लेकर आई होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* होली मस्ती लेकर आई, खेल रहे कन्हाई,बरसाने से राधारानी, दौड़ी-दौड़ी आई।खेल रहे ग्वाले-ग्वालाएँ, मुखड़े हैं रंगीन-रंग-अबीरों की आभा तो, सारे ब्रज में छाई॥ खेल रहे देवर-भौजाई, उल्लासित है तन-मन,जीजू और सालियाँ खेलें, इतराता है आँगन।मची हुई हुड़दंग आज तो, हुरियारों का ज़ोर-लगता है पल में जी लेंगे, अब तो सारा जीवन॥ … Read more

नारी शक्ति का नया युग और चुनौतियाँ

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…. मानव सभ्यता के विकास की कथा में यदि किसी शक्ति ने सबसे अधिक सृजन किया है, तो वह नारी शक्ति है। वह जीवन की जननी है, संस्कृति की वाहक है और समाज की संवेदनशील आत्मा है। भारतीय परम्परा ने नारी को केवल एक सामाजिक भूमिका तक सीमित … Read more

भरे रंग

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** भरे रंग पीली सरसों मेंयह बसंत है सरसाया,प्रकृति हुई है रंग-बिरंगीदेखो फिर फागुन आया। सजी हुई छवि जड़-चेतन कीमन-उमंग भर-भर जाए,पुष्पित कमल-कली उपवन मेंगुन-गुन भँवरे गीत सुनाएँ। पुलकित अंग-अंग धरती काऋतुपति सौरभ बिखराए,वृक्षों पर नव-कोपल आएपादप रसाल बौराए। फसल हुई स्वर्णिम कंचन-सीफागुन ख़ुशियाँ ले आया,चंचल मतवाली बयार मेंनृत्य मयूर ने दिखलाया। झाँझ … Read more

है शक्ति स्वरूपा

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… सशक्त शक्ति का वह रूप है,मन में लिए जो ‘कोमलता’विशाल ‘हृदय’ में दया व करुणा का संचार लिए,नारी देवी है, वह है, शक्ति स्वरूपा। उनकी ‘उड़ान’ दूर आसमान की,उन्हें आगे बढ़ने दो, ‘रोको’ मत तुमनारी को कमजोर कभी ‘मत’ समझना,नारी ‘देवी’ है, वह है, शक्ति … Read more

आग का दरिया:क्या होगा भविष्य

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** २८ फरवरी २०२६ की वह रात मध्य-पूर्व के इतिहास में एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज होगी, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ शायद ही भुला सकें। ठीक रात २ बजकर ३० मिनट पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक ८ मिनट का वीडियो बयान … Read more

५ बाल साहित्य सम्मान घोषित

hindi-bhashaa

लखनऊ (उप्र)। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा संचालित बाल साहित्य संवर्द्धन योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष २०२६-२६ के बाल साहित्य सम्मानों हेतु गठित समिति की संस्तुति घोषित कर दी गई है। इस अनुसार वर्ष २०२४ के ५ बाल साहित्यकारों को अभिनन्दित किया जाएगा।प्रधान सम्पादक डॉ. अमिता दुबे के अनुसार सुभद्रा कुमारी चौहान महिला बाल साहित्य … Read more

किसे यक़ीन था…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* मुझे पता है कोईठहरता नहीं किसी के पास,रुक जाता है कुछ पल के लिएसाथ देता हैं चंद कदमों तक…। फिर भी न जाने मनभागता है उस ओर शायद,ये सोचकर कि अचानक मिल जाएवो कभी किसी मोड़ पर…। पथिक हैं सब जीवन पथ केअलग-अलग है आप-बीती,कैसे किस पर विश्वास करेंजब बिछे हैं … Read more