कर दो तृप्ति

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* अधरों ने कहा अधरों से,जरा ठहरो ! क्यों तुमने यूँ तड़पाया मुझेअधर कहीं एक होते नहीं,जब तक ना दोनों मिलें। अपने अधर से तुम्हारे अधर,मिल कर पा जाते तृप्तिप्यासे हैं मेरे अधर बहुत,अधरों से छू कर कर दो तुम तृप्ति। तब मैं न रहूं तुम न रहो,रह जाए सिर्फ मेरे तुम्हारेदरम्यान … Read more

चलना धीमी गति से…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ सड़क पर चलना धीमी गति से,तेज रफ़्तार किसी का साथ नहीं देतीजीवन है अनमोल ध्यान दो भाई,सड़क पर रखो नजर, क्योंकि नजर हटी दुघर्टना घटी। सड़क पर चलना धीमी गति से,रास्ता यूँ ही कट जाएगा, मंजिल पर पहुंच जाएगाक्योंकि जीवन है बड़ा अनमोल,इसलिए सड़क पर सर्कस मत करो भाई। सड़क … Read more

‘छू लिया आसमां’ अपराध, प्रेम और विश्वासघात का जटिल ताना-बाना

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** समीक्षा…. साहित्य की दुनिया में कुछ लेखक ऐसे होते हैं जो मनोरंजन ही नहीं करते, बल्कि पाठकों को सामाजिक हकीकत से भी रूबरू कराते हैं। लियाकत मंसूरी एक ऐसा ही नाम बन चुके हैं, जिन्होंने रोमांचक लेखन शैली से हिंदी क्राइम थ्रिलर पाठकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई … Read more

पुस्तक ‘जहर जो हमने पीया’ पर गोष्ठी में बताई आप-बीती

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रोहतक (हरियाणा)। ‘सप्तरंग’ संस्था द्वारा ‘पुस्तक पर चर्चा’ कार्यक्रम के अन्तर्गत महिला सफ़ाईकर्मियों की आप-बीती पर आधारित पुस्तक ‘जहर जो हमने पीया’ पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। स्वामी नितानंद स्कूल में हुई इस गोष्ठी में पुस्तक के संपादक एवं पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक गर्ग, प्रिंसिपल मनोज छाबड़ा, अध्यापक राजकुमार जांगड़ा तथा लेखिका अनीता, सेवा, … Read more

भारत की सामाजिक चेतना पर बढ़ता संकट ‘आर्थिक असमानता’

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** भारत विविधता में एकता का संदेश देने वाला देश है, लेकिन यही देश वर्तमान में आर्थिक असमानता जैसी चुनौती से जूझ रहा है जो सामाजिक न्याय, अवसरों की बराबरी और समावेशी विकास को चुनौती दे रही है। ‘विश्व असमानता रिपोर्ट २०२६’ के ताज़ा निष्कर्षों के अनुसार भारत में संपत्ति और आय … Read more

यथार्थ का सशक्त स्वर है सुरेंद्र कुमार अरोड़ा की कविताएँ

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पटना (बिहार)। सुरेंद्र जी की रचनाएँ एक समर्थ रचनाकार की भाँति समाज के मन को झकझोरती हैं एवं संवेदनाओं के तल को स्पर्श करते हुए प्रश्न भी करती है और उनके उत्तर भी तलाशती है। लघुकथा के क्षेत्र में उनकी सशक्त पहचान है, किंतु उनकी कविताएँ भी समान रूप से प्रभावशाली, अर्थगर्भित और संवेदनाशील है।यह … Read more

संयुक्त परिवार-प्रेम का सागर

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* एक छत एक आँगन,एकसाथ दिलों की धड़कनविश्वास की नींव, प्रेम का सागर,मुस्कुराता है जहां अपनापन। रिश्ते जहां मीठी धुन से,सदा खुले खुशियों के द्वारसुंदर बगिया-सा महकता,सजता है संयुक्त परिवार। दादा-दादी का आशीष,माता-पिता की सच्ची सीखचाचा-चाची का निष्छल स्नेह,संयुक्त परिवार का हैं ये आधार। रिश्तों की डोरी मजबूत,एकता में शक्ति जहां साकारशिक्षा संस्कारों … Read more

बंगाल:भविष्य धर्म की लहर या प्रगति की राह ?

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, पर राजनीतिक रणभेरी बज चुकी है। इस बार संकेत साफ हैं-चुनाव विकास बनाम विकास के दावे पर नहीं, बल्कि पहचान, अस्मिता और धर्म की ध्वजा के इर्द-गिर्द घूम सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर … Read more

निदेशक डॉ. दवे के आतिथ्य में वार्षिक महोत्सव संग लोकार्पण

इंदौर (मप्र)। वृन्दावन नगर (उप्र) के साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी १९ फरवरी को साहित्यिक संस्था अखण्ड संडे (इंदौर) के स्थापना दिवस पर शाम ४ बजे आभासी वार्षिक महोत्सव में विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लेंगे। आप संस्था द्वारा प्रकाशित ‘अखंड काव्य धारा’ काव्य संग्रह का लोकार्पण भी करेंगे। महोत्सव की अध्यक्षता प्रख्यात इतिहासकार नर्मदा … Read more

फागुन आयो रे…

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* फागुन आयो रे, बौराई क्यारी-क्यारी,महके बाग-बगैयाँ, रंगत छाई न्यारी।ढोलक की थापों में झूमी गैयाँ-नारी-बोल उठी हर डाली, किलकी मारी क्यारी॥ फागुन आयो रे, पिचकारी रंग बरसाए,भीगे चुनर अंचल, साजन मन ललचाए।हँसी की फुहारों से मन का मैल धुलाए-राधा संग श्याम की गलियों में धूम मचाए॥ फागुन आयो रे, सरसों … Read more