इतिहास में तथ्यों की प्रामाणिकता जरूरी-डॉ. सिंह

hindi-bhashaa

भोपाल (मप्र)। ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ कविता में लिखे गए उपन्यास हैं। रामायण योजनाबद्ध तरीकों से लिखा गया सुसंगठित समाज है, जबकि महाभारत में आपको भटक जाने का पूरा-पूरा खतरा है। यदि लेखक इतिहास की तरफ जाता है। इतिहास को शामिल करता है तो तथ्यों की प्रमाणिकता जरूरी है। वरिष्ठ कवि-आलोचक डॉ. विजय बहादुर सिंह ने … Read more

‘सृजनाभिनंदनम् ४’ में विशिष्ट अतिथि निदेशक डॉ. मीनू पांडेय

hindi-bhashaa

भोपाल (मप्र)। वाङ्गय कला संगम (गुरुग्राम, हरियाणा) द्वारा ‘कृतिभिनंदनम् ४’ (साहित्य सिनेमा थिएटर कला) का आयोजन २५ अप्रैल को प्रातः १० बजे दिल्ली स्थित हिंदी भवन (११, विष्णु दिगम्बर मार्ग (राउज एवेन्यू), निकट बाल भवन) में रखा गया है। संगम के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार सिंघल व संरक्षक डॉ. राकेश छोकर ने बताया कि विशिष्ट … Read more

गुण और गुनाह दोनों की ही कीमत

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** संतरंगी दुनिया-२०…         यदि आप अपनी पत्नी को खुश रखना चाहते हैं तो अपने पर्स का मुँह खुला रखें और अपना मुँह बंद रखें। वक़्त बदल गया है, पहले लड़कियाँ सफेद घोड़े पर राजकु‌मार की कल्पना किया करती थी, आजकल बीएमडब्ल्यू में गधा भी आ जाए … Read more

कैसी है जीवन की पहेली ?

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** कैसी है ये जीवन की पहेली,सब साथ में फिर भी अकेली। दिल कहीं भी लगता नहीं,भीड़ में भी होती हूँ अकेली। न झूठ बोलूँ और न करूँ फ़रेब,खाली नहीं रहती कभी जेब। दिखावा भी हमें आता नहीं,चापलूसी कभी सीखी नहीं। जो हूँ, जैसी हूँ होता है नाज,इसलिए मेरा कोई नहीं आज। यूँ … Read more

चाय के दीवाने थे

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)…. चाय की दुकान पर अक्सर चर्चे होते थे,हम दोनों भी चाय के दीवाने थेप्रतिदिन मिलने के बहाने थे,सर्दियों के मौसम में। सुबह-सुबह एक ही डिमांड थी,कहाँ है अदरक वाली चाय ?रिमझिम-रिमझिम बारिश में होती,मेरे हाथों में अदरक वाली चाय। और दिल में होती याद … Read more

प्रकृति के महत्व को समझें, समझाएं

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** ‘पृथ्वी दिवस’ विशेष… हम सबको आने वाली पीढ़ी को पृथ्वी के महत्व को समझाना और बताना आवश्यक है। प्रकृति और पृथ्वी के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए २२ अप्रैल को ‘पृथ्वी दिवस’ (अर्थ डे) मनाया जाता है। हमें इसे एक दिन के स्थान पर परंपरा या आदत की तरह से मनाने … Read more

काव्य गोष्ठी संग कृति ‘गूंज’ विमोचित

hindi-bhashaa

दिल्ली। प्रणेता साहित्य न्यास के तत्वावधान में शक्ति नगर स्थित शर्मा न्यू आर्ट्स कॉलेज के सभागार में पुस्तक ‘गूँज’ का विमोचन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता लेखक डॉ. शंभू पंवार ने की। मुख्य अतिथि हिंदी अकादमी के पूर्व उपसचिव ऋषि कुमार, अति विशिष्ट अतिथि हरीश नवल व विशिष्ट अतिथि सविता चड्ढा रहे।न्यास … Read more

वाह चाय

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)… हाय रे चाय, वाह रे चाय,सुबह से तेरी याद सताएबिन तेरे रहा ना जाए,गरमा-गरम जब तू आए,क्या कहें दिन बन जाए। देख के तुमको मन ललचाए,मिले ना तू तो सर चकराएसुबह-शाम तू ही भाए,बिन तेरे मन भरमाएहाय रे चाय, वाह रे चाय। जो तू आए … Read more

चाय में गुण अनंत

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)… चाय में गुण अति अनंत,सत्कारों को करे जीवंतरक्तचाप का करता अंत,मधुर व्यवहार रहे बेअंत। चाय पर बातें हों धुआँधार,मित्र के संग हो मस्त बहारघंटों बातें बिन लिए आहार,बाबू, लिपिक हो या सरकार। चाय बिना सूना सब संसार,चाय तत्व है अति दमदारकई रोगों … Read more

मध्यरात्रि का सूरज

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* जहाँ अंधकार ने दरवाज़े पर,जंजीरें डाल रखी थींवहीं आपका जन्म हुआ,आपने पूछा कि कुछ लोगों कोज़मीन पर क्यों रेंगना पड़ता है ?किताबों को कवच और,कानून को प्रकाश मानकरअंतहीन रात में आपने रास्ता बनाया। उन्होंने आपकी जाति को तौला,आपकी योग्यता या बुद्धि को नहींलेकिन आप इतने ऊँचे खड़े रहे कि,कोई चाहकर आप … Read more