कर दो तृप्ति
नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* अधरों ने कहा अधरों से,जरा ठहरो ! क्यों तुमने यूँ तड़पाया मुझेअधर कहीं एक होते नहीं,जब तक ना दोनों मिलें। अपने अधर से तुम्हारे अधर,मिल कर पा जाते तृप्तिप्यासे हैं मेरे अधर बहुत,अधरों से छू कर कर दो तुम तृप्ति। तब मैं न रहूं तुम न रहो,रह जाए सिर्फ मेरे तुम्हारेदरम्यान … Read more