नश्वरता

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* फिर एक कविता आकार लेने लगी है,भीगे शब्दों के वसन धारण करने लगी हैवो जो पड़ा है जमीं पर… निर्विकल्प-सा,उसकी सौहार्द्रता का गुणगान करने लगी हैफिर से एक कविता आकार लेने लगी है। घटनाएँ खास वाली, बताई जा रही है,उसकी पूरी ज़िंदगी, गुनगुनाई जा रही हैअजनबियों को यादगार किस्से कहकर,ज़िंदगी-भर की … Read more

जीवन की अविरल धारा तुम प्रिये

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जीवन की अविरल धारा तुम प्रिये, हर पल मन को महकाती हो,सूने सपनों मरुस्थल में, सावन बनकर बरसाती होसौम्यता, गरिमा, ममतामयी, लज्जा श्रद्धा, करुण पहचान,हर रिश्ते में नव जीवन की, प्रिये मधुर सुवास बसाती हो। निशि! मंद मुस्कान तुम्हारी, दु:ख की छाया हर लेती हो,स्नेह-सुधा की फुहारें शीतल, हिय … Read more

हमारी जिम्मेदारी है गणतंत्र

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक… संविधान जो हमारा हक लिख देता है,जो हर नागरिक के न्याय समानता की बात करता है। गणतंत्र केवल उत्सव ही नहीं है,ना यह सिर्फ झंडों की शान भर ही है। यह आम आदमी के जीवन का रोज का सम्मान है,जब खेत में पसीना बहता है। किसान और … Read more

ऐसी शिक्षा नीति की आवश्यकता, जो प्रतिभा को जाति से ऊपर रखे

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विवि अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से … Read more

विष और अमृत

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** समुद्र मंथन हुआ था जिसमेंनिकले रत्न अनेकबाँट लिया मिल सुर-असुरों नेनहीं किया था कोई भेद,पर जब पहला रत्न था निकलाबड़ा विषैला कालकूट विषग्रहण नहीं उसको कर पायाविषय बड़ा गंभीर था खेद। महादेव तब आगे आयेलिया उन्होंने गरल उड़ेलकंठ में रखा उसे आपनेनीलकंठ का यह था खेल,और बहुत से रत्न थे निकलेपर जब … Read more

स्वतंत्र अधिकार

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)… हर पल रहे मन में देश के लिए तमन्ना,ईश्वर से है यही दुआ हर सूरत मुस्काए यहाँ। देश का हर जवान करता रहे देश की सेवा,दूर कर दूँ ताकतवर तानाशाही की बेला। आजाद भारत में फहराता रहे तिरंगा हरदम,स्वतंत्रता से जिए हर नागरिक यहाँ। … Read more

नाट्य-साहित्य के पुरोधा थे डॉ. चतुर्भुज, गीत-निर्झर थे विशुद्धानंद

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पटना (बिहार)। रेल में अधिकारी और आकाशवाणी में निदेशक रहे बिहार के महान रंगकर्मी डॉ. चतुर्भुज नाट्य-साहित्य के प्रणम्य पुरोधा थे। नाट्य-साहित्य को मंचन योग्य शिल्प देकर उन्होंने न केवल रंगमंच को समृद्ध किया, अपितु अपनी मोहक काव्य-कल्पनाओं से ऐतिहासिक नाटकों को विपुल समृद्धि प्रदान की। अपने नाटकों से उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि … Read more

आम आदमी को है संविधान पर अभिमान

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)…. संविधान के गठन में लगे ३ थे साल,२६ जनवरी १९५० में लागू बेमिसालअधिकारों, कर्तव्यों की अद्भुत है मिसाल,आम्बेडकर जी की अगुआई में लगे हैं सालों-साल। संविधान ने दिया हमें है लोकतंत्र बड़ा विशाल,मौलिक अधिकार संरक्षित करता बनकर ढालआम आदमी को मिलती … Read more

‘सागर से अंतरिक्ष तकःभारत की रक्षा क्रांति’ को मिला अकादमिक अनुदान

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नई दिल्ली। जब शब्द राष्ट्र की सुरक्षा और सामरिक स्वावलंबन की गाथा बन जाते हैं तो वे राष्ट्रीय चेतना का दस्तावेज कहलाते हैं। हिन्दी अकादमी, दिल्ली ने इसी चेतना को सम्मान देते हुए वरिष्ठ पत्रकार- लेखक योगेश कुमार गोयल की कृति ‘सागर से अंतरिक्ष तकःभारत की रक्षा क्रांति’ के लिए प्रकाशन अनुदान की घोषणा की … Read more

‘ग़ज़ल कुंभ-२०२६’ साहित्यिक उत्सव में पुस्तकें लोकार्पित

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पटना (बिहार)। ‘ग़ज़ल कुंभ-२०२६’ के अंतर्गत वाराणसी के पटेल भवन में अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक कार्यक्रम किया गया। प्रसिद्ध शायरा डॉ. पूनम सिन्हा ‘श्रेयसी’ (पटना) के ग़ज़ल संग्रह ‘चाक दामन’ और साहित्यकार राजकांता राज की पुस्तक (बाल ग़ज़ल संग्रह) ‘मेंढक बोला टर्र-टर्र-टर्र’ का भी लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम के संयोजक प्रसिद्ध शायर दीक्षित दनकौरी रहे। अध्यक्षता … Read more