३० तक अंतिम अवसर, बनेगी ‘लेखकों का बचपन’ पुस्तक

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सिरसा (हरियाणा)। न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन (८७५०६८८०५३) ने लेखकों से पुनः आग्रह किया है कि शीघ्रता से रचनाएँ प्रेषित करें, क्योंकि इस बार ‘लेखकों का बचपन’ नामक पुस्तक प्रकाशित हो रही है। इसके ३ खण्ड तैयार हो चुके हैं, यदि अपना बचपन रेखांकित करना चाहते हैं तो अपना आलेख (शब्द ३०००) ३० मई तक मेल (Editornwp@g mail.com) … Read more

कसूर तुम्हारा

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तुम ना पढ़ो तोकसूर तुम्हारा है,हम तो हर लफ्ज़ मेंतुम्हें ही लिखते है। तुम ना समझो तोकसूर तुम्हारा है,हम तो हर शब्द मेंप्रेम कहानी कहते हैं। तुम ना मानो तोकसूर तुम्हारा है,हम तुम्हारी खामोशी केहर अल्फ़ाज को सुन लेते हैं। तुम ना जानो तोकसूर तुम्हारा है,हम हर रात तुम्हारी याद मेंआँसू … Read more

नारी है संसार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* संस्कारों की चेतना, नैतिकता का सार।नारी पूरित है सदा, धर्ममयी श्रंगार॥ पति के हित को साधती, करके चोखे पर्व।इसीलिए तो नार पर, धर्म करे नित गर्व॥ वट सावित्री व्रत मना, करती अमर सुहाग।यश पाता है नार का, अति निश्छल अनुराग॥ मर्यादा को धारकर, सीता बनती नार।उसके कारण ही सदा, आलोकित परिवार॥ … Read more

धन, शक्ति, यौवन पर गर्व न  करो

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** धन, शक्ति, यौवन पर गर्व अत्यंत न करो। बिन प्रभु सुमिरे जीवन को अंत न करो॥ यह विश्व प्रभु माया की शक्ति, तुम भक्ति की शक्ति पहचानो। रैन-दिवस ऋतु काल की क्रीडा, हर पल जीवन नष्ट हुआ जानो॥सुमिरन छोड़ के इच्छाएं अनंत न करो,बिन प्रभु सुमिरे जीवन को अंत न करो…॥ भांति-भांति के रूप … Read more

भारतीय लोकतंत्र को लोक केंद्रित होने की आवश्यकता

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है। यह लोकतंत्र करोड़ों नागरिकों की आशाओं, संघर्षों और अधिकारों पर आधारित है। संविधान ने भारत को एक ऐसे गणराज्य के रूप में परिकल्पित किया था, जहाँ शासन की प्रत्येक व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य जनता का कल्याण हो। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ … Read more

आम आदमी विकास से बाहर ?

ललित गर्गदिल्ली*********************************** स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नए भारत के निर्माण के जिन आधार स्तंभों की कल्पना की गई थी, उनमें शिक्षा और चिकित्सा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। यह माना गया था कि यदि देश के नागरिक शिक्षित, स्वस्थ और जागरूक होंगे तो लोकतंत्र मजबूत होगा, सामाजिक असमानताएं कम होंगी और राष्ट्र विकास के … Read more

तुम्हारी हो गई हूँ

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** दिखा कर स्वप्न तुम हमको,प्रिये मत छोड़ जानाअकेले रह न पाऊँगी,न तुम हमको भुलाना। जलाना प्रेम का दीपक,तुम्हारे हो गए हैंसजाना ज़िंदगी को तुम,संगिनी बन गए हैं। चली आई मैं सबको छोड़,तेरा प्यार पानेनहीं जी पाऊँगी तुम बिन,न करना तुम बहाने। सभी सुख-दुख सहूँगी साथ,मैं सम्मान दूँगी।तुम्हारे साथ जीवन की,मैं हर सीढ़ी … Read more

मेरा भाई मेरी परछाई

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** ‘विश्व भाई दिवस’ विशेष… मेरा भाई है,मेरी परछाईभगवान करे सबको,मिले मेरे जैसा भाई। भाई दो शरीर, पर एक जान होते हैंएक-दूसरे की आन,बान और शान होते हैं। बड़ा भाई, छोटे भाई का,ध्यान ध्यान रखता हैऔर छोटा भाई बड़े भाई,का सम्मान करता है। भाइयों में होता है,बहुत गहरा प्यार पर कभी-कभी हो जाती … Read more

नकली मुस्कान 

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** नकली शाश्वत मुस्कान को ओढ़े, बहुत से चेहरे आज भी मिलेंगे जो आंधियों की ठिठाई के खिलाफ,बड़े हुनर से दौड़ते आते हैं नजर। मैं जब हिकारती नजरों से देखती हूँ उनको,मेरी अपनी आत्मा दबोच लेती है मुझेनहीं देखने देती आकाश को,बड़ा स्याह मंजर बन जाता है उस वक़्त। नकली मुस्कान चली जाती है,अंधे कुएँ … Read more

दूसरों में क्या रक्खा

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** प्रेम करना है तो खुद से करो, दूसरों में क्या रखा है,जमाने ने तो हमें सिखा ही दिया गैर तो गैर सदा है। गर खुद से करोगे प्रेम तो खुद का जरुर भला होगा,दूसरों से करोगे प्रेम तो कभी न कभी दगा होगा। वो जमाना चला गया, जब प्रेम के बदले प्रेम … Read more