भारत को आर्थिक-सामाजिक दृष्टि से सबल बनाना होगा

ललित गर्ग दिल्ली************************************** अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत एवं उसके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की साख और सीख के कारण भारत दुनिया का सिरमौर बनने की दिशा में अग्रसर है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में ३ देशों की यात्रा की और ३१ वैश्विक नेताओं व वैश्विक संगठनों के प्रमुखों के साथ मुलाकात की। मोदी की विदेश … Read more

अपने से प्यार करें, पर कर्तव्य भी निभाएं

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** आजकल ‘आत्म प्रेम’ (सेल्फ लव) का शिगुफा उमड़ पड़ा है, इसकी तरंग में बहुतेरे नयी दुनिया बहने को आतुर भी दिख रही है, किन्तु यह क्या है ? आत्मप्रीति ही आत्म प्रेम… बन कर आया है…!अपने-आपसे प्यार, सम्मान, अपनी देखभाल, सुरक्षा, अपनी अस्मिता की रक्षा, आत्मसंतुष्टि के लिए कार्य, अपने-आपको समय देना, … Read more

‘समय’ नहीं है…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ‘समय’ के पहिए से आगे निकलने की वर्तमान में हर किसी की चाह होती जा रही है। ज़िन्दगी में रफ्तार का हर एक परिदृश्य मनुष्य को आपा-धापी के बीच में ले जाता है। जीवन चलता तो है पर उसे इन भौतिकवादियों के शिकंजे ने तेज बना डाला है। समय ने … Read more

क्षेत्रीयता को नकारा, विकास को स्वीकारा

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव-एक विश्लेषण… देशभर की नजर में देशभक्ति और प्रतिष्ठा का परिचायक रहे महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव २०२४ के नतीजे आने के बाद सब इसकी चीर-फाड़ करने में व्यस्त हैं कि आखिर राज्य की राजनीतिक दिशा और जनता के रुझानों में महत्वपूर्ण बदलाव का ऐसा नतीजा कैसे आया ? राजनितिक अनुभव, अनुमान … Read more

देश को मंदिर-मस्जिद विवादों से निकलने की आवश्यकता

ललित गर्ग दिल्ली************************************** दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश के संभल में एक बार फिर सम्प्रदाय विशेष के लोगों ने जो हिंसा, नफरत एवं द्वेष को हथियार बनाकर अशांति फैलाई, वह भारत की एकता, अखण्डता एवं भाईचारे की संस्कृति को क्षति पहुँचाने का माध्यम बनी है। अदालत के आदेश पर मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा … Read more

समुचित विकास की योजनाएं चाहिए, ताकि भाग्य उज्ज्वल हो

ललित गर्ग दिल्ली************************************** हममें से प्रत्येक को बच्चों के अधिकारों की वकालत करने, उन्हें बढ़ावा देने, उनके शोषण को रोकने, उनका समग्र विकास करने और बच्चों का उत्सव मनाने के लिए एक प्रेरणादायी अवसर के रूप में ‘सार्वभौमिक बाल दिवस’ मनाया जाता है। इसकी स्थापना १९५४ में हुई थी। बाल अधिकारों की घोषणा बच्चों के … Read more

पुरुषों का अस्तित्व बड़ा प्रश्न

ललित गर्ग दिल्ली************************************** ‘अन्तर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस’ (१९ नवम्बर) विशेष… दुुनिया में अब महिला दिवस की भांति पुरुष दिवस प्रभावी रूप में बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। पुरुष भी अपने शोषण एवं उत्पीड़ित होने की बात उठा रहे हैं। अब पुरुषों पर भी उपेक्षा, उत्पीड़न एवं अन्याय की घटनाएं पनपने की बात … Read more

जीवन-यापन के लिए भीख मांगने की आवश्यकता नहीं

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** भिखारियों को भिक्षा देनी चाहिए या नहीं, इसी के साथ यह भी जोड़ देती हूँ कि खुले में घूमते अनाथ पशुओं को (गाय माता) को अपने घर के सामने बुला कर या गली चौबारे में जूठा, बचा-खुचा या शुद्ध कोरा ही खिलाना पिलाना चाहिए या नहीं!मेरा विचार और उत्तर है- कदापि ‘नहीं।’ … Read more

समाज-धर्म क्रांति के पुरोधा रहे

ललित गर्ग दिल्ली************************************** गुरुनानक देव जयन्ती (१५ नवम्बर) विशेष…. भारतीय संस्कृति में गुरु नानकदेव एक महान पवित्र आत्मा थे, वे ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि थेे। सिख धर्म के १० गुरुओं की कड़ी में प्रथम गुरु नानक हैं। अणु को विराट के साथ एवं आत्मा को परमात्मा के साथ एवं आत्मज्ञान को प्राप्त करने के एक … Read more

आज दयालु चरित्रवान व्यक्तियों की जरूरत

ललित गर्ग दिल्ली************************************** ‘विश्व दयालुता दिवस’ (१३ नवम्बर) विशेष… ‘विश्व दयालुता दिवस’ दुनिया के मानव समुदायों में अच्छे कार्यों को उजागर करने के लिए मनाया जाता है, जिसमें सकारात्मक शक्ति, मानवीय संवेदनाओं और दयालुता के सामान्य जीवन-सूत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए इंसान से इंसान को जोड़ने का उपक्रम किया जाता है। दयालुता मानवीय स्थिति … Read more