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होली की धींगामस्ती

डाॅ. मधुकर राव लारोकर ‘मधुर’ 
नागपुर(महाराष्ट्र)

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‘हेलो आकाश’…
स्वदेश ने मोबाइल पर अपने मित्र का हाल जानना चाहा,पर फोन किसी ने उठाया नहीं। उसने पुन: मोबाइल का नम्बर मिलाया। कुछ क्षणों बाद आवाज सुनाई दी-“कौन बोल रहे हैं ?”
आवाज पहचान कर स्वदेश ने कहा-“सुधा बहन जी,मैं स्वदेश बोल रहा हूँ। आकाश को दीजिए प्लीज।”
“आकाश को हास्पिटल ले जाया गया है,डॉक्टर उसे देख रहे हैं।” सुधा ने स्वदेश से कहा।
स्वदेश अचंभित हो गया कि आकाश और हॉस्पिटल में। कल ही तो हम लोगों ने साथ होली खेली थी। स्वदेश ने हास्पिटल का नाम और पता लिया।
आकाश और स्वदेश में गहरी मित्रता थी। स्वदेश ने शीघ्र ही अपने दो सहपाठी दोस्तों को साथ लिया और संबंधित हास्पिटल पहुँच गए।
हास्पिटल में रिसेप्निस्ट से आपरेशन की जगह पूछी और वहां पहुंच गए। सामने ही उन्हें सुधा तथा उनकी माताजी नजर आ गए। वे दुखी थे और उनका रो-रोकर बुरा हाल था,ऐसा उन्हें महसूस हुआ।
स्वदेश और उनके दोस्तों को साथ माताजी बोल पड़ी-“बेटा,आकाश कल होली खेलने अपने दोस्तों के साथ बाहर निकला था। क्या हुआ, कैसे हुआ,यह पता नहीं। रात आकर आँखों में तकलीफ की बात करने लगा,तो सुधा ने उसकी आँखों में ड्राप डाल दिया। फिर वह सो गया। सुबह आठ बजे उठा तो,चिल्लाने लगा कि उसे कुछ दिख नहीं रहा है। हम उसे किसी तरह हास्पिटल ले आए। डॉक्टर उसे देख रहे हैं। यह बताओ,वह किनके साथ होली खेलने निकला था। तुम्हें पता है क्या ?”
स्वदेश यह सुनकर शोक में डूब गया,पर उसने कहा-“माताजी हम लोग ही आकाश को बुलवाए थे,और होली खेलते हुए कलर पेंट उसकी आँखों में चला गया होगा। हमें धींगामस्ती में पता ही नहीं चला। हम ही उसके दोषी हैं।”
सुधा ने रोते हुए कहा-“अगर तुम लोग होली मर्यादा में रहकर खेलते तो आज,मेरा भाई हास्पिटल में नहीं रहता। होली की धींगामस्ती में की गई असावधानी के लिए तुम लोगों को शर्म आनी चाहिए,जिससे किसी का जीवन संकट में पड़ गया है।”
उसी समय डॉक्टर बाहर आए और कहने लगे-“एक आँख में कलर पेंट ज्यादा चला गया है,शीघ्र आपरेशन करना होगा। नहीं तो एक आँख पूरी तरह से खराब हो सकती है।”

परिचय-डाॅ. मधुकर राव लारोकर का साहित्यिक उपनाम-मधुर है। जन्म तारीख़ १२ जुलाई १९५४ एवं स्थान-दुर्ग (छत्तीसगढ़) है। आपका स्थायी व वर्तमान निवास नागपुर (महाराष्ट्र)है। हिन्दी,अंग्रेजी,मराठी सहित उर्दू भाषा का ज्ञान रखने वाले डाॅ. लारोकर का कार्यक्षेत्र बैंक(वरिष्ठ प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त)रहा है। सामाजिक गतिविधि में आप लेखक और पत्रकार संगठन दिल्ली की बेंगलोर इकाई में उपाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-पद्य है। प्रकाशन के तहत आपके खाते में ‘पसीने की महक’ (काव्य संग्रह -१९९८) सहित ‘भारत के कलमकार’ (साझा काव्य संग्रह) एवं ‘काव्य चेतना’ (साझा काव्य संग्रह) है। विविध पत्र-पत्रिकाओं में आपकी लेखनी को स्थान मिला है। प्राप्त सम्मान-पुरस्कार में मुंबई से लिटरेरी कर्नल(२०१९) है। ब्लॉग पर भी सक्रियता दिखाने वाले ‘मधुर’ की विशेष उपलब्धि-१९७५ में माउंट एवरेस्ट पर आरोहण(मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व) है। लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी की साहित्य सेवा है। पसंदीदा लेखक-मुंशी प्रेमचंद है। इनके लिए प्रेरणापुंज-विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन(नागपुर)और साहित्य संगम, (बेंगलोर)है। एम.ए. (हिन्दी साहित्य), बी. एड.,आयुर्वेद रत्न और एल.एल.बी. शिक्षित डाॅ. मधुकर राव की विशेषज्ञता-हिन्दी निबंध की है। अखिल भारतीय स्तर पर अनेक पुरस्कार। देश और हिन्दी भाषा के प्रति विचार-
“हिन्दी है काश्मीर से कन्याकुमारी,
तक कामकाज की भाषा।
धड़कन है भारतीयों की हिन्दी,
कब बनेगी संविधान की राष्ट्रभाषा॥”

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